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अब उपभोक्ताओं को 65 रुपए में एलईडी बल्ब

Updated: IST Now consumers at Rs 65 LED bulb
प्रदेश में लागू एलईडी बल्ब वितरण की योजना के तहत अब 65 रुपए की दर से बल्ब उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है।

कोरबा. प्रदेश में लागू एलईडी बल्ब वितरण की योजना के तहत अब 65 रुपए की दर से बल्ब उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। इसके पहले 85 रुपए प्रति बल्ब के हिसाब से उपभोक्ताओं को बल्ब उपलब्ध कराया जा रहा था।

बल्ब को लेकर ऐसी मान्यता है कि इसके उपयोग से बिजली की खपत कम होती है। इसके पहले शासन द्वारा सीएफएल बल्ब की सुविधा लागू की गई थी।

एलईडी आने के बाद अब इसे अपनाने पर बल दिया जा रहा है। इसके लिए शासन द्वारा विद्युत कंपनी के माध्यम से जन जागरुकता लाई जा रही है। प्रचार प्रसार के लिए बल्ब का वितरण कराया जा रहा है।

बीपीएल परिवार को निशुल्क में बल्ब दिए जा रहे हैं। एपीएल परिवार को 85 रुपए की दर से 10 बल्ब व व्यापारियों को 20 बल्ब देने का प्रावधान किया गया था।

अब इसमें बदलाव लाते हुए बल्ब कम कीमत पर देने का निर्णय लिया गया है। प्रति बल्ब 65 रुपए के हिसाब से दिए जाएंगे। योजना आज से लागू की गई है।

6.03 लाख टन कार्बन डाइआक्साइड कम

एलईडी बल्ब को अपनाने का एक प्रमुख कारण कार्बन डाइआक्साइड को भी माना जा रहा है। बल्ब को अपनाने के बाद 6.03 लाख टन कार्बन डाइ आक्साइड का प्रतिदिन उत्सर्जन कम होने का अनुमान है।

अब तक प्रदेश में 57 लाख 40 हजार उपभोक्ताओं में बल्ब का वितरण किया जा चुका है। जिले में यह संख्या दो लाख को पार कर गई है।

लगाए जा रहे शिविर

वितरण कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि योजना का क्रियान्वयन केंद्र सरकार द्वारा किया जा रहा है। एक निजी कंपनी के माध्यम से बल्ब का वितरण कराया जा रहा है।

कंपनी द्वारा समय-समय पर शिविर लगाकर लोगों को बल्ब उपलब्ध कराया जा रहा है।

149 मेगावाट की बचत

अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में बिजली की मांग लगातार हर वर्ष बढ़ रही है। गर्मी के समय मांग चार हजार मेगावाट तक जा रही है।

उपलब्धता कम रहने से सेंट्रल सेक्टर से अधिक बिजली लेनी पड़ रही है। इसे देखते हुए भी एलईडी बल्ब को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है। इससे 149 मेगावाट की बचत हो सकती है।

प्रदेश में बिजली की उपलब्धता बढ़ाने के लिए मड़वा में विद्युत कंपनी द्वारा एक हजार मेगावाट का पॉवर प्लांट स्थापित किया गया है। लेकिन एक इकाई ही चल रही है।

500 मेगावाट की एक इकाई उत्पादन में आने के बाद बंद हो गई है। तकनीकी कारणों से इकाई चालू नहीं हो पा रही है। इससे भी विद्युत कंपनी को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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