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भ्रष्टाचार के दोषी तहसीलदार के रीडर को तीन साल की कैद

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भ्रष्टाचार के लगभग साढ़े तीन साल पुराने एक मामले में स्पेशल कोर्ट ने कोरबा तहसीलदार के तत्कालीन रीडर आनंद पोद्दार को तीन साल कैद में रखने की सजा दी है।

कोरबा. भ्रष्टाचार के लगभग साढ़े तीन साल पुराने एक मामले में स्पेशल कोर्ट ने कोरबा तहसीलदार के तत्कालीन रीडर आनंद पोद्दार को तीन साल कैद में रखने की सजा दी है।

अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता नूतन सिंह ठाकुर ने बताया कि 11 जून, 2012 को एंटी करप्शन ब्यूरो ने कोरबा के तत्कालीन तहसीलदार के रीडर आंनद पोद्दार को दो हजार रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा था।

ब्यूरो ने आंनद के खिलाफ भष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा सात, 13 (ए), 13 (2) के तहत केस दर्ज किया था। इसकी सुनवाई स्पेशल कोर्ट में चल रही थी। स्पेशल न्यायाधीश सुनीता साहू की अदालत ने आनंद को भ्रष्टाचार का दोषी माना।

बुधवार को फैसला सुनाया। कोर्ट ने आनंद को तीन साल की सश्रम करावास और जुर्माना लगाया है। वर्तमान में रिश्वत का दोषी कर्मचारी आनंद जिला प्रशासन में नियोजित है।

क्या था मामला

एक व्यक्ति ने अधिवक्ता नूतन के जरिए तहसील कार्यालय में जमीन नामांतरण के लिए आवेदन लगाया था। नामांतरण से पहले बयान दर्ज करने की प्रक्रिया होनी थी।

रीडर कार्रवाई शुरू करने से पहले दो हजार रुपए की मांग कर रहा था। बिना घूस काम करने को तैयार नहीं था। नूतन ने घटना की शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो में की थी। ब्यूरो की टीम ने रीडर को दो हजार रुपए रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था।

मारपीट के दोषी पति पत्नी को दो साल की कैद

कोरबा. एक अन्य मामले में स्पेशल कोर्ट ने मारपीट के दोषी पति पत्नी को दो साल कैद में रखने की सजा दी है। अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता ने बताया कि 28 फरवरी, 2009 को बालकोनगर तेलगू बस्ती में रहने वाले पोरेन्द्र द्विवेदी और उसकी पत्नी पुष्पलता द्विवेदी ने सेक्टर- 5 के आवास नंबर 240ए में घुसकर ओमप्रकाश कुर्रे और उसकी पत्नी से मारपीट की थी।

बालकोनगर थाने में केस दर्ज किया गया था। विशेष न्यायाधीश वी एक्का की अदालत में सुनवाई चल रही थी। न्यायाधीश एक्का ने पति पत्नी को मारपीट का दोषी माना। दोनों को दो- दो साल कैद में रखने की सजा सुनाते हुए चार हजार रुपए का अर्थदंड लगाया। जुर्माना नहीं देने पर दोषी पति पत्नी को जेल में अतिरिक्त सजा काटनी होगी।

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