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होलसेलर्स व रिटेलर्स में खींचतान, लोग हलाकान

Updated: IST Wholesalers and retailers pulls people in trouble
नोटबंदी का जमीनी साइड इफेक्ट धीरे-धीरे अपना दायरा बढ़ाते जा रहा है। नकदी के संकट का सामना कर रहे बाजार में होलसेलर्स छोटे स्तर के रिटेलर व्यवसायियों को जरूरत के सामान देने से कतरा रहे हैं।

कोरबा. नोटबंदी का जमीनी साइड इफेक्ट धीरे-धीरे अपना दायरा बढ़ाते जा रहा है। नकदी के संकट का सामना कर रहे बाजार में होलसेलर्स छोटे स्तर के रिटेलर व्यवसायियों को जरूरत के सामान देने से कतरा रहे हैं।

शर्त ये है कि सामान के बदले में पूरा पेमेंट तुरंत किया जाए। लेकिन कैश की कमी से जूझ रहे मार्के ट में फिलहाल इस शर्त को पूरा कर पाना किसी के लिए भी संभव नहीं है। इसका असर सीधे तौर पर उपभोक्ताओं पर भी पड़ रहा है। कई छोटे दुकानदारों ने राशन देने से ही इंकार कर दिया है।

गंभीर बात यह है कि कि इसके लिए सरकार के बजाय काफी हद तक व्यापारी जिम्मेदार हैं। जो सबकुछ जानते हुए भी सामान्जय बिठाने को तैयार नहीं हैं। इसके बजाय वह अपने आपको सुरक्षित रखते हुए तत्कालिक व्यवस्था के विपरीत व्यवहार कर रहे हैं।

सभी इस बात से भलिभांती परीचित हैं कि 500 और 1000 के पुराने नोट बंद होने के बाद पूरी अर्थव्यवस्था काफी हद तक 100 के नोट पर आ टिकी है। बाजार में पर्याप्त कैश का अभाव है। जोकि 500 के नए नोट आने के बाद ही पूरी होगी। ऐसे में जहां परिस्थितियों को समझकर सामान्जस्य कायम करने वालों की सख्त जरूरत है।

राशन के सामानों की किल्लत

इन दिनों खासतौर पर आटा, तेल और दाल जैसे सामान्य राशन किल्लत से बाजार जूझ रहा है। खासतौर पर छोटे व्यवसायियों के पास राशन के सामान का स्टॉक समाप्त हो चुका है और दुकान में माल लाने के लिए उनके पास कैश नहीं है। इससे कुछ सामानों के दामों में उछाल भी आया है।

ऐसे पहुंचता है राशन के दुकानों में सामान

जिले के ज्यादातर होलसेलर्स कोरबा शहर में हैं। इनके सप्लायर दर्री, जमनीपाली, बालको, दीपका आदि क्षेत्रों में सप्ताह में एक या दो दिन सभी रिटेल की राशन दुकानों में अपनी आमद देते हैं।

दुकानों में पहुंचकर सप्लायर मांग के अनुसार छोटे दुकानदारों से ऑर्डर लेते हैं और पिछला बकाया हर हफ्ते वसूलते हैं। इसके बाद माल दुकानदारों का पहुंचा दिया जाता है। वर्तमान में सप्लायर हर हफ्ते दुकानदारों से पैसे तो ले रहे हैं लेकिन नए ऑर्डर लेने से कतरा रहे हैं।

तुरंत पेमेंट करने का भी दबाव बनाया जा रहा है। छोटे दुकानदार अपनी रोज की बिक्री के आधार पर ही होलसेलर्स को ऑर्डर देते हैं और पैसे चुकाते हैं। कैश की कमी से जूझ रहे मार्केट से बिक्री नहीं होने पर छोटे दुकानदार तत्काल पैसे नहीं दे पा रहे इधर होलसेलर तत्काल पैसों की मांग कर रहे हैं।

हाथ में कैश नहीं है तो ये तरीके हो सकते हैं कारगर

- बैंक अकाउंट में पैसे हैं तो चेक से पेमेंट करें, इन चेक को तत्काल अलॉट करने की व्यवस्था की गई है।

- एंड्रायड मोबाइल हो तो एसबीआई बडि एप डाउनलोड करें, इससे 20 हजार तक का भुगतान किया जा सकता है, बिजली, पोस्टपेड आदि के बिल चुकाने में भी आसानी

- व्यापारी अपनी दुकानों में तत्काल पीओएस स्वाईप मशीन लगवाएं और कैशलेस ट्रांजेक्शन के लिए तैयार हो जाएं, इससे बिक्री के पैसे सीधे बैंक में जमा होंगे।

- उपभोक्ता किसी भी तरह की खरीदारी के लिए जितना संभव हो सके एटीएम कार्ड या के्रडिट कार्ड का उपयोग करें, इससे सारी खदीरी पक्की व वैध होगी।

- 100 रुपए के नोट हों तो उसे खर्च करें, इनका संग्रहण न करें।

चैम्बर ऑफ कॉमर्स द्वारा आयोजित कार्यशाला

कोरबा. कैशलेस ट्रांजेक्शन को समझने के लिए चैम्बर ऑफ कॉमर्स द्वारा आयोजित कार्यशाला में एसबीआई के अधिकारियों ने जानकारी दी।

मंगलवार को यह कार्यशाला चैम्बर भवन में आयोजित हुई। जहां एसबीआई के अधिकारियों का पूरा फोकस गूगल प्ले स्टोर में उपलब्ध एसबीआई बडि एप को डाउनलोड कराने पर था।

कार्यशाला के दौरान शहर के व्यापारी मौजूद थे। जो कैश की कमी से जूझ रहे मार्केट में किस तरह व्यापार को सुचारू रखा जाए इन बिन्दुओं पर अपनी जिज्ञासा दूर की।

कार्यशाला में चैम्बर के अध्यक्ष राम सिंह अग्रवाल ने इसका भरपूर लाभ लेने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि कोरबा का बाजार फिलहाल कैशलेस ट्रांजेक्शन के लिए तैयार नहीं है। कार्यशाला में चैम्बर के अन्य सदस्य भी उपस्थित थे।

पीओएस मशीन से आसान होगी राह

कार्यशाला में आरबीओ के मुख्य प्रबंधक राजीव कुमार अग्रवाल के अलावा अल्बर्ट गुडिय़ा, संजय लकरा, अमन टांक व संतोष मरार उपस्थित थे।

राजीन ने बताया कि कैशलेस ट्रांजेक्शन के लिए पीओएस स्वाई मशीन बेहद उपायोगी मशीन है। आजकल हर व्यक्ति जेब में एटीएम कार्ड लेकर ही घर से निकलता है। कार्ड से पेमेंट करने पर जेब में पैसे न हों तब भी चिंता की कोई बात नहीं है।

जितनी मर्जी हो उतने की पेमेंट की जा सकती है। अब वक्त आ गया है इसे अपनाया जाए।

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