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खदान जहां हुई थीं 14 मौत सहित 2 माइंस को Coal India ने बंद करने का लिया फैसला

Updated: IST Deva incline mines Chirimiri
कोल इंडिया अंजनहिल भूमिगत खदान बरतुंगा कालरी व नार्थ चिरमिरी कालरी डोमनहिल की देवा इन क्लाइन माइंस में लगाएगा ताला, एसईसीएल चिरिमिरी ने दोनों भूमिगत खदान को ओपन कास्ट प्रोजेक्ट्स बनाने के लिए हेडक्वार्टर को भेजा है प्रस्ताव

चिरिमिरी. कोल इंडिया के अपेक्स कमेटी ने घाटे में चलने वाले अंजनहिल भूमिगत खदान बरतुंगा कॉलरी और नार्थ चिरिमिरी कॉलरी के डोमनहिल देवा इन क्लाइन खदान को बंद करने का निर्णय लिया है। खदानों में उत्पादन प्रभावित होने से पहले हर दिन 3 हजार टन कोयला उत्खनन हो रहा था।

वर्तमान में माइंस से कोयला उत्पादन पूरी तरह से ठप हो चुका है और कर्मचारियों को अन्यत्र स्थानांतरित कर दिया गया है। वहीं नए खदान के रूप में लंबे समय से बंद लक्ष्मन झरिया नार्थ चिरमिरी कालरी भूमिगत परियोजना को 2-3 साल के भीतर शुरू करने की तैयारी हो चुकी है। गौरतलब है कि वर्ष 2010 में अंजनहिल खदान में 14 कॉलरीकर्मियों की मौत हो गई थी।

जानकारी के अनुसार कोलकाता में कोल इंडिया की अपेक्स कमेटी की बैठक हुई थी। इस दौरान कोल इंडिया की 137 खदानों को बंद करने का निर्णय लिया गया है और एक महीने के भीतर खदानों में ताला लगा दिया जाएगा। कोल इंडिया के फैसले के बाद अंजनहिल बरतुंगा कालरी चिरमिरी और नार्थ चिरमिरी कालरी डोमनहिल देवा इन क्लाइन माइंस में ताला लगा दिया जाएगा।

माइंस में उत्पादन प्रभावित होने से पहले हर दिन तीन हजार टन कोयला उत्खनन किया जा रहा था। जिसमें करीब तीन हजार से अधिक अधिकारी-कर्मचारी कार्यरत थे। हालाकि एसईसीएल प्रबंधन ने माइंस से कोयले का उत्खनन बंद कर दिया गया है। औपचारिकता के तौर में माइंस संचालित है।

मांइस हादसे में 14 स्टाफ की हुई थी मौत

जानकारी के अनुसार वर्ष 2010 में अंजनहिल भूमिगत खदान में हादसा होने के कारण 14 अधिकारी-कर्मचारियों की मौत हो गई थी। मामले में घटना के बाद से स्थानीय एसईसीएल प्रबंधन ने माइंस से तत्काल कोयले का उत्खनन बंद कर दिया था। केवल औपचारिकता के तौर पर अन्य कार्यों को अंजाम दिया जाता है।

अंजनहिल माइंस दुर्घटना को सबसे बड़ी खान दुर्घटना के तौर पर रखा गया है। कोल इंडिया की लंबी जांच और कार्रवाई के बाद खदान को भूमिगत परियोजना से हटाते हुए ताला लगाने का आदेश जारी किया गया है। वहीं दूसरी भूमि गत खदान नार्थ चिरमिरी कालरी डोमनहिल परियोजना देवा इन क्लाइन खदान को भी ताला लगाने का फरमान जारी किया गया है।

हालांकि उक्त भूमि गत खदान में करीब डेढ़ वर्षों से कोयले का उत्खनन बंद है। इसमें केवल बाहर के अन्य कार्यो को अंजाम दिया जा रहा है और करीब 200 से अधिक श्रमिक अलग-अलग शिफ्ट में कार्यरत हैं।

ओपन कास्ट प्रोजेक्ट बनाने का प्रस्ताव भेजा

एसईसीएल चिरिमिरी क्षेत्र के अनुसार अंजनहिल और देवा इन क्लाइंस भूमिगत खदान को अधिकृत रूप से ताला लगाने का निर्णय लिया गया है। वहीं भूमिगत खदान को ओपन कास्ट परियोजना के रूप में शुरू करने के लिए हेड क्वार्टर को प्रस्ताव भेजा गया है।

हालांकि ओपन कास्ट प्रोजेक्ट बनाने की प्रक्रिया में काफी लंबा समय लग सकता है। खदानों के ऊपर शहर की सबसे घनी आबादी बसी हुई है। जिससे आबादी को विस्थापित कर दूसरे स्थान पर बसाने में काफी मशक्कत करनी पड़ सकती है।

दोनों खदान बंद करने के मिले हैं आदेश

शहर के दो खदानों को अब अधिकारिक तौर पर क्लोज करने का आदेश मिला है। बरतुंगा कालरी में संचालित अंजनहिल भूमिगत माइंस लगभग सात वर्ष पहले ही बंद हो गई है। काफी लंबे प्रयास के बाद भी खदान के अंदर आग नहीं रुक नहीं रही है। कही न कही से आज भी ऑक्सीजन की मात्रा मिलने से फायर हो रहा है। खदान को दोबारा शुरू में जितना खर्च आएगा, उतना उत्पादन संभव नहीं होगा।

वहीं देवा इन क्लाइन भी इसी क्रम में है। उसके अगल बगल बड़ी घनी आबादी की बसाहट है। इसलिए इसे बंद करने पर सहमति बनाई गई है। आने वाले समय में ओपन कास्ट परियोजना का विस्तार होगा। उत्पादन के लिए नीति का बदलाव हो सकता है, पर कोयले का उत्खनन जरूर किया जाएगा।

बजरंगी शाही, सदस्य श्रमिक कल्याण बोर्ड चिरिमिरी

काफी दुखी हूं

एक श्रमिक नेता होने के नाते हमें काफी दु:ख हो रहा है कि दो खदानों को अब आधिकारिक तौर पर बंद होने का आदेश मिला है। हलाकि दोनों खदानें उत्पादन के क्षेत्र में कई वर्षों से बंद ही थी, बीते दिनों में शहर की सभी पांच श्रमिक संगठनों ने कई स्थानों का चयन किया गया था। जहां नए खदानों को खोला जा सकेगा। जिसका प्रयास निरंतर गति पर रहेगा।

लिंगराज नाहक, क्षेत्रीय महामंत्री एटक चिरमिरी

दोनों में कई वर्ष से नहीं हो रहा उत्पादन

दो माइंस को डिस्क्लोज करने का आदेश मिल चुका है। दोनों भूमिगत खदानों में कई वर्षो से उत्पादन नहीं किया जा रहा था। रही बात अंजनहिल भूमिगत खदान की, तो कोल इंडिया की एक हाई पावर कमेटी इसकी जांच कर रही है। जिसका भूमिगत कोयला उत्खनन संभव नहीं दिखाई दे रहा है। कमेटी की रिपोर्ट पर बंद करने का आदेश दिया गया है। जल्द ही अंजनहिल खदान में ओपन कास्ट परियोजना का संचालन किया जाएगा। वहीं नए खदान के रूप में लम्बे समय से बंद लक्ष्मन झरिया नार्थ चिरमिरी कालरी भूमिगत परियोजना को 2-3 साल के भीतर शुरू कर दिया जाएगा। जो कि शहर के लिए मिल का पत्थर साबित होगा।

के. सामल, सीजीएम एसईसीएल चिरमिरी एरिया

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