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Video Icon UIDAI के सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ कर फर्जी आधार कार्ड बनाने के बड़े मामले का खुलासा, कई गिरफ्तार

Updated: IST Adhar Card Fraud Exposed in UP
असली सॉफ्टवेयर को क्रैक कर मेनिपुलेटेड कॉपी सॉफ्टवेयर बनाकर बेचता था गिरोह, बिना उंगलियों के निशान और आईडी के बनाते थे आधार कार्ड।

कुशीनगर. नागरिक पहचान पत्र के साथ ही तकरीबन हर योजना में जरूरी कर दिये गए बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज आधार कार्ड को लेकर बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। पुलिस ने एक ऐसे गिरोह के सदस्यों को गिरफ्तार किया है जिन्होंने आधार कार्ड के आधिकारिक सॉफ्टवेयर को क्रैक कर एक उसमें बदलाव करने के बाद धड़ल्ले से फर्जी आधार कार्ड बनाते थे। बड़ी बात यह कि इनके सॉफ्टवेयर से बनाए गए आधार कार्ड में न तो अंगुलियों के निशान की जरूरत पड़ती थी और न ही लोकेशन की। यह सभी सुरक्षा फीचर्स बायपास कर फर्जी आधार कार्ड बनाते थे, जिसे पकड़ना मुश्किल था। गैंग इस सॉफ्टवेयर को असली बताकर लोगों को बेचता भी था। पुलिस ने गिरोह के छह हैकरों को गिरफ्तार किया है जो आधार कार्ड के फर्जीवाड़े का यह खेल चला रहे थे।

मामला का खुलासा करने वाली कुशीनगर पुलिस की मानें तो गिरफ्तार युवक अब तक आधार कार्ड के यूआईडीएआई के साफ्टवेयर में छेड़छाड़ कर बनाए गए मेनिपुलेटेड सॉफ्टवेयर को करीब छह सौ सेंटरों को पूरे यूपी में बेच चुके हैं। इनका नेटवर्क यूपी के कइ्र जिलों में फैला हुआ बताया गया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से बड़ी संख्या में लैपटॉप, मोबाइल व स्कैनर भी बरामद किया है। कुशीनगर के एसी का दावा है कि यह नेटवर्क बहुत बड़ा है और इससे और भी लोग जुड़े हैं।

मालूम रहे कि किसी भी व्यक्ति की बायोमेट्रिक पहचान, आईडी व लोकेशन की पुष्टि के बाद ही राष्ट्रीय पहचान का दस्तावेज आधार कार्ड बनता है। पर पकड़े गए गिरोह ने यूआईडीएआई के साफ्टवेयर को क्रैक कर ऐसा मेनिपुलेटेड सॉफ्टवेयर तैयार किया, जिसमें इन सब सुरक्ष पहचानों को बाईपास करने की क्षमता है। कुशीनगर के पुलिस अधीक्षक यमुना प्रसाद बताते हैं कि कुछ दिन पहले जिले के पडरौना कोतवाली में दो केस दर्ज किए गए थे। इन मुकदमों में वादी की ओर से जो आरोप लगाए गए थे जब उनकी जांच शुरू हुई तो चैंकाने वाले तथ्य सामने आने लगे।

मामला देश की सुरक्षा से जुड़ा होने के चलत कुशीनगर पुलिस ने भारतीय विशिष्ठ पहचान प्राधिकरण यूआईडीएआई के क्षेत्रीय कार्यालय लखनऊ के तकनीकी जानकारों की मदद से अपनी जांच आगे बढ़ाई। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ती गयी देश की सुरक्षा के साथ हो रहे खिलवाड़ की परत दर परत उधड़ती चली गई। बताते हैं कि यूआईडीएआई की ओर से रजिस्टर्ड साकेत एडवरटिजमेंट प्राईवेट लिमिटेड से आधार कार्ड बनाने के लिए अनामिका कंप्यूटर मरदह, गाजीपुर के शैलेद्र कुमार चतुर्वेदी ने फ्रेंचाईजी लिया था। अप्रैल महीने में यूआईडीएआई ने एडवांस सिक्योरिटी फीचर्स के साथ नया इनरोलमेंट वर्जन लांच कर दिया। इसके चलते अनामिका कंप्यूटर सहित साकेत एडवरटिजमेंट से जुडे करीब 400 केंद्र बंद हो गए।

इसी दौरान साकेत एडवरटिजमेंट से जुड़ा अरविंद मौर्य हाईवे कंस्ट्रक्शन इनरोलमेंट से जुड़ गया और बंद पड़े केंद्रों को दो हजार रुपये में नया इंरोलमेंट नंबर देने के लिए संपर्क साधना शुरू कर दिया। अरविंद ने अपने सहयोगियों की मदद से यूआईडीएआई का साफ्टवेयर क्रैक कर मैनिपुलेटेड साफ्टवेयर तैयार कर लिया, जिसमें बायोमेट्रिक, आईडी व जीपीएस लोकेशन को बाईपास करने के फीचर्स हैं। इस साफ्टवेयर को शैलेंद्र के दोस्त आनंद सिंह ने भी किसी तरह से कॉपी कर लिया।

ये लोग इस साफ्टवेयर को 500 से एक हजार रुपये में बेचने लगे। पर देश की सुरक्षा को और चोट पहुंचा पाते उससे पहले ही ये लोग कुशीनगर पुलिस के हत्थे चढ़ गए। पुलिस ने गाजीपुर जिले के मरदह थाना क्षेत्र निवासी शैलेंद्र कुमार, आनंद सिंह, अनुज विश्वकर्मा, रामचंद्र यादव, फैजाबाद जिले के कैंट थाना क्षेत्र निवासी अरविंद मौर्य व कौशाम्बी जिले के रहने वाले अविनाश केसरवानी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। एसपी कुशीनगर के मुताबिक अभी जांच जारी है और कुछ दूसरे चेहरे भीहरे सामने आ सकते हैं।

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