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कड़ाके की ठंड में फूटपाथ रात गुजार रहे दर्जनों परिवार

Updated: IST lakhimpur
बाजार बंद होने के बाद भी इनकी तकलीफ नहीं खत्म होती

लखीमपुर-खीरी. कड़ाके की ठंड हो। पर न तो रहने को आशियाना हो और न ही पेट भरने को खाना। ऐसा सोच कर ही शायद आपकी रूह कांप जाएगी। मगर लखीमपुर में कई ऐसे परिवार हैं जो वाकई ऐसी जिंदगी जी रहे हैं। दिन भर यहां-वहां खाने की तलाश में भटकते हैं और बिस्तर बिछाने के लिए बाजार के बंद होने का इंतजार करते हैं। बाजार बंद होने के बाद भी इनकी तकलीफ नहीं खत्म होती। भीषण ठंड में चादर व कंबल के सहारे ही सभी रात बिताते हैं। मगर इन मजबूरों और मजलूमों की तकलीफ किसी को नजर नहीं आती।

शहर की संकटा देवी चौकी के सामने स्थित सावित्री दया सुपर बाजार मार्केट। यूं तो दिन भर यहां खरीददारों का आना-जाना होता है। सुबह से ही लोग बाजार के खुलने का इंतजार करते हैं। देर रात तक यह सिलसिला जारी रहता है। लेकिन कुछ परिवार रात काटने के लिए इस बाजार के बंद होने का इंतजार करते हैं। रात में बाजार बंद होते ही सभी अपने बिछौने लेकर बाजार में पहुंचते हैं। खाली पड़ी सड़क पर बिस्तर बिछाते हैं। दुकानों के शटरों को छत के रूप में इस्तेमाल करते हैं। लेकिन भीषण ठंड में इतना सब काफी नहीं है। उनके पास ओढऩे के लिए गद्दे आदि नहीं है। इसलिए चादर, शाल और कंबल के सहारे ही रात गुजारते हैं।

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पड़ोसी जिला सीतापुर के लहरपुर तहसील क्षेत्र अंतर्गत रतौली निवासी शंकर भगवान अपने बेटे अमित (20) का आपरेशन कराने यहां आए हैं। उन्होंने बताया कि आपरेशन दो दिन पहले हो चुका है। पर अहतियात के तौर पर उन्हें फिलहाल लखीमपुर में ही रुकना है। यहां कोई भी उनका रिश्तेदार नहीं है। जो पैसे लेकर आए थे वह आपरेशन और दवाई में ही खर्च हो चुके हैं। पिछले दो दिनों से वह भिखारियों और शरणार्थियों के बीच इसी बाजार में रात गुजार रहे हैं। उन्होंने बताया कि न तो उनके पास कुछ खाने को है और न ही कहीं ठहरने के लिए आशियाना ले सकने के पैसे। किसी तरह हाथ-पांव जोड़कर बेटे व खुद का पेट भर पाते हैं। उन्होंने बताया कि वह फिलहाल अपने नाते-रिश्तेदारों व आस-पड़ोसियों से मदद मांगने को मजबूर हैं। इसी तरह शरण लेने वाले अन्य लोगों ने बताया कि वह लोग बेघर भी हैं और बेरोजगार भी। कोई भी उन्हें काम पर नहीं रखता लिहाजा वह लोग भीख मांगते हैं। इन परिवारों के साथ कई बच्चे भी हैं जो माता-पिता के साथ मुफलिसी के हालात गुजार रहे हैं।

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फुटपाथ पर रहने वालों के लिए नहीं हैं आशियाने

सरकार यूं तो तमाम तरह की आवासीय योजनाएं चला रही है। मगर बेघर और बेसहारों के लिए यह योजनाएं दूर की कौड़ी ही बनी हुई हैं। सालों से लोग दिन-रात सड़कों पर भटकते दिखाई दे रहे हैं। आम आदमी को ये सब पता पर है पता नहीं क्यों सरकारी मशीनर को कुछ नजर नहीं आता। लोगों ने ऐसे बेघरों के लिए भी कोई आशियाने की योजना लाने की मांग की है।

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