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व्यापारी की मौत हुई मौत, दरोगा और दो सिपाहियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज

Updated: IST Murder
ईसानगर थाना क्षेत्र के बरारी गांव में व्यापारी को मौत के घाट उतारने के मामले में एक दरोगा और दो सिपाहियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है।

लखीमपुर. ईसानगर थाना क्षेत्र के बरारी गांव में व्यापारी को मौत के घाट उतारने के मामले में एक दरोगा और दो सिपाहियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अधीक्षक अखिलेश चौरसिया ने शुरूआती कार्रवाई करते हुए एक नामजद सिपाही समेत तीनों हत्या आरोपी पुलिस वालों को सस्पेंड कर दिया है। मामले की जांच एसओ ईसानगर शिवानन्द यादव को सौंपी गई है। जिन्होंने जांच अधिकारी बदले जाने का प्रत्यावेदन सीओ धौरहरा हरीराम वर्मा से किया है।

ईसानगर थाना क्षेत्र के बरारी गांव के मजरा लोहारन पुरवा में दबिश देने गई ईसानगर पुलिस ने इसी गांव के मजरा तमोली पुरवा निवासी रामचंद्र चौरसिया (47) पुत्र सीताराम को पीट पीट कर मौत के घाट उतार दिया था। ग्रामीणों के आक्रोश के बाद आला अधिकारियों का मूवमेंट हुआ और मृतक के बेटे अनूप कुमार की तहरीर पर ईसानगर थाने के सिपाही रामबहादुर समेत एक अज्ञात दरोगा और एक अज्ञात सिपाही के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया। घटना के बाद अपर पुलिस अधीक्षक और सीओ धौरहरा हरीराम वर्मा रात में ही मौके पर पहुंचे और भारी आक्रोश और हंगामे के बीच किसी तरह शव का पंचनामा कर पीएम के लिए भेजा। मामले की नजाकत को देखते हुए कई थानों की पुलिस मौके पर बुला ली गई थी।

मामले में फौरी कार्रवाई करते हुए हत्या में लिप्त तीन पुलिस वालों को एसपी अखिलेश चौरसिया ने निलंबित कर दिया। निलंबित किए गए पुलिस कर्मियों में दरोगा लालजी और सिपाही रामबहादुर व प्रदीप कुमार शामिल हैं। मृतक की बेटी रेनू ने बताया कि उसका पिता सब्जी बेचने के बाद करीब सात बजे घर आ गया था। बाद में वह लोहारन पुरवा में बकाया भुगतान करने गया था। जहां ईसानगर थाने के एक दरोगा और दो सिपाहियों ने उन्हें मार डाला।

बुधवार को छावनी बना रहा ईसानगर

बरारी के मजरा तमोली पुरवा में सब्जी व्यापारी को पुलिसियों द्वारा मौत के घाट उतार दिए जाने के बाद ईसानगर थाना छावनी में तब्दील हो गया। बुधवार को पीएम के बाद रामचंद्र चौरसिया का शव गांव पहुंच पाता। इससे पहले ही अनहोनी की संभावनाओं के चलते भारी पुलिस बल थाने पर बुला लिया गया। बुधवार को सुबह से ही दंगा रोधी दस्ते, फायर ब्रिगेड और कई थानों की पुलिस पहुंच गई। सूचना थी कि कुछ राजनैतिक लोग गांव पहुंचकर स्थितियां खराब करने की कोशिश कर सकते हैं। जिनको रोकने के लिए तमोली पुरवा में सुरक्षा के बड़े बंदोबस्त किए गए। भारी पुलिस बल एहतियातन मौके पर बुला जरूर लिया गया। पर गांव तक नहीं भेजा गया। थाने और गांव की दूरी महज छः किलोमीटर है। ऐसे में अगर गांव में किसी तरह की गड़बड़ी के हालात बनते तो चंद मिनटों में ही फ़ोर्स गांव में होता। शव आने के बाद जब रामचंद्र का अंतिम संस्कार बिना किसी झमेले के सम्पन्न हो गया। तब पुलिस की वापसी शुरू हुई।

बे-वजह ही मारा गया रामचंद्र

पता चला है कि जिस वक्त पुलिस लोहारन पुरवा में लक्ष्मण के घर कच्ची शराब बरामद करने के लिए दबिश दे रही थी। उस वक़्त वहां भगदड़ मची थी। इसी दौरान रामचंद्र भी पहुंच गया। भगदड़ देख कर रामचंद्र भी भागने लगा। तब दबिश देने गई पुलिस अपना काम छोड़ कर उसी के पीछे पड़ गई। पुलिस वालों ने उसे दौड़ाकर पकड़ा और सरकारी रायफल के बटों से उसे तब तक पीटा जब तक उसकी मौत नहीं हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पुलिस रामचंद्र को ऐसे पीट रही थी जैसे वह कोई बहुत बड़ा क्रिमिनल हो। जबकि रामचंद्रव के खिलाफ थाने में कभी कोई शिकायती पत्र तक नहीं पहुंचा था। गरीबी के चलते रामचंद्र आसपास लगने वाली साप्ताहिक बाजारों में सब्जी बेंचकर अपना परिवार चला रहा था।

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