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Video Icon जानिए, क्षेत्रिय सांसद उमा भारती के गोद लिए गांव की हकीकत

Updated: IST village
लोकप्रिय भारतीय जनता पार्टी की फायर ब्रान्ड नेता, और क्षेत्रिय सांसद उमा भारती के गोद लिया गांव पवा आज भी विकास की राह से कोसों दूर है

ललितपुर.लोकप्रिय भारतीय जनता पार्टी की फायर ब्रान्ड नेता, और क्षेत्रिय सांसद उमा भारती के गोद लिया गांव पवा आज भी विकास की राह से कोसों दूर है। यहां केवल विकास की बात कही जाती है बात को निभाया नहीं जाता। गोद लेना मात्र अब औपचारिकता बनकर रहा गई है। मगर विकास नहीं किया जाता। गांववालों का कहना है कि जब हमने सुना कि हमारे गांव को हमारी सांसद उमा भारती जी ने गोद ले लिया है तो हमारी खुशी का ठिकाना नहीं रहा क्योंकि हम जानते थे कि अब हमारे और हमारे गांव के अच्छे दिन आ गए है मगर एेस कुछ भी देखने को नहीं मिला।

गांवों को गोद लेना और वहां जाकर भोले भाले ग्रामीणों को विकास के नये नये सपने दिखाकर ऐसा महसूस कराना कि बस अब तो यहां विकास की नदियां ही बहेगी। सभी गांववालों के अब अच्छे दिन आयेंगे। बेचारे भोले भाले ग्रामीण जो सदियों से ठगे जाते रहे हो ,एक बार फिर ठगे जाने के लिये तैयार होकर पंडाल में आ बैठते हैं। और शुरू होता है गोद लेने का भव्य आयोजन।

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जब माननीय विकास का माडल ग्रामीणों के समक्ष रखते है तो ग्रामीण भी उसे देखकर धन्य हो जाते है ऐसा रहनुमा पाकर।विकास के पक्के वादे के साथ आयोजन खत्म। ओर यही खत्म हो जाते है सारे विकास के वादे। पर इसका अहसास ग्रमीणों को धीरे-धीरे तब होता है जब दिन महीने ओर साल गुजर जाती है और वे वही विकास की बात करते रह जाते है। फिर कोई दूसरा रहनुमा आयेगा फिर वही भव्य आयोजन वही विकास की बाते ओर फिर वही ढांक के तीन पांत वाली कहावत चरितार्थ होती नजर आ जायेगी।

अब देखिये गांव का विकास ?

जनपद मुख्यालय से लगभग 45 किमी दूर तालवेहट के आगे ओर झांसी से पहले नेशनल हाइवे से कुछ किमी दूरी पर पवा गांद गोद लिया जैसे ही पवा के लिये नेशनल हाइवे से उतरकर लिंक रोड पर गाडी पहुंची कि विकास की परते दर पर दर खुलती नजर आने लगी एेसी रोड जिसमें सड़क कम ओर गड्डे ज्यादा थे पर गाड़ी चलाना कठिन नहीं नामुमकिन था। बडी सावधानी से गाडी चलाते हुये गांव पहुंचे। रास्ते में पुलिया के बीचोबीच गड्ढे , कई जगह पानी के भराव के कारण रास्ते पर कीचड़ के बीच से निकलते हुए, अब आप समझ ही गये होंगे की जब लिंक रोड की हालत ऐसी है तो गांव की अन्य सड़कों की हालत क्या होगी गाडी तो दूर पैदल चलना भी इंहा दूभर था जगह-जगह पानी का भराव ,कीचढ़ और जहां थोडी सूखी सड़क है भी तो वहां जानवरों का जमघट।

चिकित्सा के नाम पर एक छोटा प्राथमिक केन्द जो ANM की अनुस्थिति में अधिकतर बंद रहता है। जहां पर पहले एक एएनएम रहा करती थी अब वह भी नहीं रहती उसने भी नेशनल हाईवे पर कमरा लेकर निवास बना लिया है।कुछ समय के लिये ही केन्द्र जाती है। केंद्र पर न तो भरपूर दवाइयां है और न ही आपात स्थिति से निपटने का सामान बस नाम मात्र का स्वास्थ्य केंद्र और एक आयुर्वेदिक अस्पताल है जो समय समय पर खुलता है।

शिक्षा के नाम पर किया गया वादा भी मान्यनीय भूल गई कि गोद लेते समय एक बालिका इन्टर कॉलेज शिक्षा विभाग के सहयोग से यहां खुलवाना था। ढाई साल होने को है अभी तक तो इसपर कुछ हुआ नहीं। प्राइमरी शिक्षा का स्तर भी निम्न स्तर का बच्चों को पोस्टिक भोजन के नाम पर बस खानापूर्ति हालांकि यहां 7 प्राइमरी विद्यालय है जिनमें 2या 3 स्कूलों की स्थिति अच्छी है।

सांसद प्रतिनिधि जी ने शौचालय की बात बताई थी कि गांव में शौचालयों का निर्माण कराया गया है जब इसके बारे में गांव वालों से पूछा तो उन्होंने बताया कि शौचालय तो बन रहे है पर ग्रमीण विकास के बजट से बन रहे है न कि सांसद निधि से।

यदि कुल मिलाकर देखा जाये तो गांव पवा सड़क शिक्षा चिकित्सा जैसी मूलभूत आवश्यक सुविधाओं से आज तक महरूम हैं।भले ही सासंद प्रतिनिधि विकास कराये जाने की बडी-बडी बाते क्यों न करें पर ग्रामीणों की नजर से किये गये रियलटी चैक में गांव आज भी विकास के लिये मुहताज है। इस बारे में जब हमने सांसद प्रतिनिधि से बात की तो उन्होंने बताया कि गांव के विकास के लिए कोई अलग से धन नहीं आता है जो सरकारी योजनाएं है उन्ही को लागू करवाया जाता है।

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