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लगभग 10 लाख गरीब परिवारों को 2018 तक निःशुल्क आवास दिये जायेंगे

Updated: IST mahendra singh
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अब तक 6.31 लाख परिवारों का पंजीकरण तथा 5.70 लाख परिवारों को एमआईएस पर फोटो अपलोडिंग कराकर 4.95 लाख आवास स्वीकृत किये जा चुके हैं

लखनऊ.उत्तर प्रदेश के ग्राम्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं राज्यमंत्री चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डा. महेन्द्र सिंह ने कहा है कि आवास विहीन अथवा कच्चे आवासों में रहने वाले सभी पात्र परिवारों को जिनके नाम सामाजिक आर्थिक एवं जाति जनगणना की सूची में शामिल हैं, ऐसे 24 लाख परिवारों को वर्ष 2022 तक निःशुल्क आवास उपलब्ध कराये जायंगे। इनमें से 9.71 लाख परिवारों को मार्च 2018 तक आवास अवंटित किये जाने का लक्ष्य रखा गया है।
डा. सिंह ने यह जानकारी आज यहां विधान भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष में दी। उन्होंने बताया कि डा. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत चयनित लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र भी वितरित किए जाएंगे।
सबके लिए आवास वर्तमान सरकार का संकल्प है। इसको पूरा करने के लिए देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा 20 नवम्बर 2016 को प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) शुरू की गयी थी। इस योजना का उद्देश्य बेसहारा एवं आवास विहीनों को पक्का घर मुहैया कराना है।
वर्तमान सरकार के गठन के बाद से ही अभियान चलाकर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अब तक 6.31 लाख परिवारों का पंजीकरण तथा 5.70 लाख परिवारों को एमआईएस पर फोटो अपलोडिंग कराकर 4.95 लाख आवास स्वीकृत किये जा चुके हैं, जिनमें से 4 लाख परिवारों को प्रथम किश्त की धनराशि भी उनके खातों में पहुंचा दी गई है।
ग्राम्य विकास मंत्री ने बताया कि लाभार्थियों को बिचैलियों के शोषण से बचाने के लिए संपूर्ण धनराशि उनके खातों में इलेक्ट्रानिकली ट्रान्सफर किया जा रहा है। साथ ही सम्पूर्ण प्रक्रिया को पारदर्शी एवं व्यावहारिक बनाया गया है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से लाभार्थियों को शोषण से पूरी तरह बचाया गया है।
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत दिये जाने वाले आवासों की लागत की जानकारी देते हुए डा. सिंह ने कहा कि सामान्य क्षेत्रों में इसकी कीमत 1.20 लाख रुपये तथा नक्शल प्रभावित क्षेत्रों में 1.30 लाख रुपये है। आवास का क्षेत्रफल 25 वर्ग मीटर है, जिसमें रसोईघर के लिए भी स्थान दिया गया है।
लाभार्थियों को धनराशि 40 हजार रुपये की तीन बराबर किश्तों में की जाएगी। अनुदान के अतिरिक्त 70 हजार रुपये की धनराशि विकल्प के रूप में लाभार्थियों को संस्थागत वित्त/बैंक के माध्यम से ऋण के रूप में प्राप्त हो सकेगी।

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