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गांठ लगने पर भी जुड़ा नहीं दिख रहा प्रेम का यह धागा

Updated: IST Samajwdi party family dispute
इटावा का मतदान आते-आते फिर दिखने लगी यदुवंश की महाभारत

डॉ.संजीव

लखनऊ. रहीम का प्रसिद्ध दोहा है, रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय। टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ परि जाय॥ समाजवादी पार्टी में मुलायम सिंह यादव के परिवार में महीनों चले घमासान में प्रेम का धागा चटक कर टूटा तो ऐसा टूटा कि गांठ बांधने से भी जुड़ नहीं पा रहा है। जैसे-जैसे इटावा में मतदान की तिथि नजदीक आ रही है, यदुवंश की महाभारत फिर दिखने लगी है।

समाजवादी पार्टी में चले घमासान के बाद जिस तरह यदुवंश शिवपाल और अखिलेश के खेमे में बंटा और मुलायम सिंह ने भी बेटे अखिलेश के साथ न जाकर शिवपाल का साथ दिया, उससे साफ लग रहा था कि स्थितियां बहुत खराब हो चुकी हैं। चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही जब अखिलेश खेमे को साइकिल चुनाव चिह्न मिल गया और जिस तरह से शिवपाल खेमा समर्पण करता सा दिखा, उससे लगने लगा था कि सब ठीक होने की ओर बढ़ रहा है। अखिलेश यादव ने भी बीच-बीच में यह संदेश देने की कोशिश की की स्थितियां नियंत्रण में हैं और वे सरकार बनाकर मुलायम सिंह की झोली में डाल देंगे। अब मतदान पास आते-आते फिर घर की तलवारें खिंची हुई साफ नजर आ रही हैं।

जसवंत नगर से दूर अखिलेश

इटावा में आगामी रविवार, 19 फरवरी को वोट पड़ने हैं। इसमें मुलायम सिंह यादव की परंपरागत जसवंत नगर विधानसभा सीट भी शामिल है। इस सीट पर शिवपाल सिंह यादव चुनाव लड़ रहे हैं। पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने शिवपाल सिंह यादव के लिए वोट भी मांगे और सभाएं भी कीं किन्तु अखिलेश यादव ने जसवंत नगर का रुख तक न किया। गुरुवार को अखिलेश मैनपुरी, कन्नौज व इटावा के दौरे पर भी गए किन्तु वे जसवंत नगर नहीं गए। इटावा में अखिलेश ने इटावा व भरथना विधानसभा सीटों को तो चुनावी सभा के लिए चुना किन्तु जसवंत नगर जाना उपयुक्त नहीं समझा। हालांकि शिवपाल के बेटे आदित्य का इस मसले पर कहना था कि अखिलेश कभी जसवंत नगर नहीं आते रहे हैं, इसलिए इस बार भी नहीं आए। आदित्य कितना भी सफाई दें किन्तु जिस तरह मुलायम ने जसवंत नगर में हाथ फैलाए और अखिलेश ने वहां जाना तक मुनासिब नहीं समझा, उससे प्रेम के धागे की टूटन साफ समझ में आ रही है।

शिवपाल अपनी सीट तक सिमटे

समाजवादी पार्टी की स्थापना के बाद यह पहला चुनाव है, जब शिवपाल सिंह यादव अपनी विधानसभा सीट जसवंत नगर तक सिमट कर रह गए हैं। प्रदेश में अलग-अलग जिलों से उनके समर्थक भी खुल कर सपा प्रत्याशियों के साथ काम करते नजर नहीं आ रहे हैं। उनमें से तमाम ने तो जसवंत नगर में ही डेरा डाल लिया है। सपा के घोषित प्रत्याशी भी इस महाभारत से इस कदर डरे हुए हैं कि उनमें से कोई भी शिवपाल को अपने क्षेत्र में बुला नहीं रहा है। वैसे भी इस बार सपा के घोषित स्टार प्रचारकों की सूची से शिवपाल सिंह यादव का नाम गायब है। शिवपाल लगातार जसवंत नगर में ही सक्रिय हैं। माना जा रहा है कि घमासान के बीच शिवपाल के लिए यह सीट जितना उनके लिए आर-पार की लड़ाई जैसा प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। शिवपाल के साथ सक्रिय उनके पुत्र आदित्य भी स्वीकार करते हैं कि कुछ महीनों से चली खींचतान के कारण वे लोग जनता के बीच नहीं पहुंच पाए थे, इसीलिए अब कुछ अधिक समय देना पड़ रहा है। हालांकि आदित्य यह कहना नहीं भूलते कि हर सीट जीतने के साथ अंतिम लक्ष्य प्रदेश में सरकार बनाना है और सरकार बनकर रहेगी।

देवरानी-जेठानी दिखा रहीं प्रेम

इस घमासान के बीच जसवंत नगर के बाद जो दूसरी सीट सर्वाधिक चर्चा में है, वह सीट है लखनऊ कैंट। इस सीट से अखिलेश के सौतेले भाई प्रतीक यादव की पत्नी अपर्णा यादव चुनाव लड़ रही हैं। जसवंत नगर के अलावा मुलायम सिंह यादव ने लखनऊ कैंट सीट पर सभा कर बहू अपर्णा के लिए वोट मांगे हैं। जसवंत नगर सीट पर भले ही अखिलेश या उनकी पत्नी सांसद डिंपल यादव वोट मांगने न गए हों किन्तु लखनऊ कैंट में बुधवार को पहले मुलायम सिंह यादव, फिर डिंपल यादव ने न सिर्फ जनसभा की, बल्कि खुलकर देवरानी के लिए वोट मांगे। देवरानी अपर्णा ने भी सभा के दौरान जेठानी के पांव छुए और कैंट सीट से जीत का आशीर्वाद भी पाया। अब देवरानी-जेठानी का यह प्रेम भी चर्चा में है। कुछ लोगों का कहना है कि देवरानी-जेठानी यह प्रेम दिखाकर न सिर्फ जनता से वोट मांग रही हैं, बल्कि परिवार में भी कुछ लोगों को चिढ़ाने की कोशिश कर रही हैं।

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