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UP Election 2017

मुलायम ने जिसकी टिकट काटी अखिलेश ने उसे टिकट बाटी, अब अशुल यादव को टिकट

Updated: IST anshul yadav
अभिषेक यादव उर्फ अंशुल यादव मुलायम सिंह यादव के भाई राम पाल के बेटे हैं। इस तरह रिश्ते में वे अखिलेश के चचेरे भाई हैं। इनकी मां प्रेम लता यादव भी जिला पंचायत की अध्यक्ष रह चुकी हैं

अनिल के. अंकुर
लखनऊ। सपा कुनबे में चुनाव चिह्न को लेकर विवाद अभी थमा भी नहीं था कि इसी बीच यह विवाद और गहरा गया। यह विवाद मुलायम के गृहजनपद इटावा की सीटों पर चरम पर देखने को मिल रहा है। शिवपाल सिंह यादव ने शनिवार को करहल विधानसभा सीट से उसे टिकट दे दिया जिसका टिकट काट कर अखिलेश यादव ने अपने चचेरे भाई अभिषेक यादव उर्फ अंशुल यादव को टिकट दिया था। अब करहल विधानसभा सीट इसलिए रोचक मोड़ पर आ गई है क्योंकि इस सीट से एक तरफ मैदान में दर्शन सिंह का बेटा मौजूदा विधायक सौबरन सिंह यादव मुलायम गुट से चुनाव मैदान में होगा तो वहीं दूसरी ओर मुलामय परिवार की चौथी पीढ़ी अखिलेश गुट से आपस में टकराएंगे।
इस घटना की शुरूआत उस वक्त हुई थी जब शिवपाल सिंह यादव ने करहल विधानसभा सीट से भाजपा के पूर्व नेता दर्शन सिंह यादव के बेटे सौबरन सिंह यादव को टिकट दिया था। दूसरे दिन जब अखिलेश ने अपनी सूची जारी की तो उसमें सौबरन सिंह यादव का नाम शामिल था। इसके बाद अखिालेश ने अपनी संशोधित सूची जारी की और उसमें सौबरन सिंह का नाम काट दिया। उनके स्थान पर अपने चचेरे भाई अंशुल यादव को उन्होंने टिकट देने की घोषणा कर दी। अभिषेक यादव उर्फ अंशुल यादव मुलायम सिंह यादव के भाई राम पाल के बेटे हैं। इस तरह रिश्ते में वे अखिलेश के चचेरे भाई हैं। इनकी मां प्रेम लता यादव भी जिला पंचायत की अध्यक्ष रह चुकी हैं। अक्टूबर 2015 में जिला पंचायत सदस्य बनने के साथ यादव परिवार के 14वें सदस्य के रूप में अपने राजनीति में कदम रखा था। यूं तो अंशुल यादव ने अपना चुनावी क्षेत्र जसवंत नगर के आखा इलाके में बनाया था। लेकिन अब उनको करहल विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लडऩा होगा।
सपा कुनबे की जंग इस हद तक पहुंच गई कि पिता पुत्र के समर्थकों को टिकट देने से इत्तेफाक नहीं रखते हैं तो पुत्र पिता के नजदीकियों से दूरी बनाए हुए हैं। फिलहाल सपा समर्थकों की निगाहें चुनाव आयोग के फैसले पर टिकी हुई हैं कि कौन सी सपा असली है। इसका असली अध्यक्ष कौन है। यह सब तब हो रहा है जब पहले चरण के नामांकन की शुरूआत के लिए केवल 48 घंटे ही बाकी हैं। अंशुल अकेले ही नहीं हैं, बल्कि मैदान में मुलायम ङ्क्षसह यादव के भी चार प्रत्याशी हैं, तो अखिलेश यादव ने भी चार प्रत्याशी चुनावी दंगल में उतारे हैं। अब देखने की बात यह होगी कि आखिरी में कौन प्रत्याशी रहेगा?

उल्लेखनीय है कि मुलायम ङ्क्षसह यादव ने भोगांव से मौजूदा विधायक आलोक शाक्य के स्थान पर शिव बक्श शाक्य को टिकट दिया, जबकि किशनी से मौजूदा विधायक ब्रजेश कठेरिया के स्थान पर पूर्व विधायक संध्या कठेरिया को मैदान में उतारा। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव के करीबी सदर विधायक राजकुमार यादव का टिकट काटकर उनके स्थान पर शिवपाल यादव के बेहद करीबी सपा जिलाध्यक्ष मानिक चंद्र यादव को प्रत्याशी बना दिया गया। करहल विधानसभा पर मुलायम ने अपने करीबी मौजूदा विधायक सोबरन ङ्क्षसह यादव पर ही दांव लगाया।

मुलायम की इस सूची के विपरीत अखिलेश यादव ने अपनी सूची जारी की, तो तीनों मौजूदा विधायकों के साथ ही करहल में सोबरन ङ्क्षसह को ही उम्मीदवार बनाया, लेकिन अगले ही दिन अखिलेश ने अपनी सूची से सोबरन यादव का नाम काट दिया। इसके बाद अखिलेश यादव ने प्रत्याशी चयन में सीधा हस्तक्षेप किया। उन्होंने भोगांव, किशनी और सदर के तीनों मौजूदा विधायकों की दावेदारी सबसे मजबूत है। तीनों विधायक खुलकर मुख्यमंत्री के पाले में हैं। सौबरन सीएम की बैठक में नहीं गए। वे मुलायम सिंह यादव के यहां हुई बैठक में शामिल हुए। केवल इटावा की जनता ही नहीं बल्कि पूरे देश की नजर इस परिवार के हुए विवाद पर गड़ी हुई है। सब ये जानना चाहते हैं कि यादव परिवार के इस युद्ध में कौन जीतेगा और कौन चक्रव्यूह में फंस कर अभिमन्यु की गति को प्राप्त होगा।

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