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एकेटीयू के लिए बड़ा सवाल, कैंपस नया लेकिन क्या सुलझेंगी पुरानी समस्याएं?

Updated: IST aktu
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी के जानकीपुरम एक्सटेंशन स्थित न्यू कैंपस का उद्घाटन मंगलवार को पीएम मोदी करेंगे।

लखनऊ. डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी के जानकीपुरम एक्सटेंशन स्थित न्यू कैंपस का उद्घाटन मंगलवार को पीएम मोदी करेंगे। यूं तो 30 एकड़ में फैले इस कैंपस में कई नई तकनीक देखने को मिलेंगे लेकिन सवाल वही है कि क्या नए कैंपस में शिफ्ट होने से पुरानी समस्याओं से छुटकारा मिल जाएगा। पत्रिका ने पड़ताल में पाया कि कई समस्याएं हैं जिनको लेकर एकेटीयू अक्सर सवालों के घेरे में रहा है-

मार्कशीट अपडेशन के लिए दिनभर चक्कर लगाते हैं छात्र

एकेटीयू में रोजाना दर्जनों छात्र मार्कशीट अपडेशन के लिए चक्कर लगाते रहते हैं। मार्कशीट अपडेशन की समस्या तो बहुत कॉमन सी हो गई है। एग्जाम कंट्रोलर से मिलने के लिए स्टूडेंट्स अक्सर चक्कर लगाते रहते हैं। कई बार उन्हें निराश होकर भी लौटना पड़ता है। पिछले दिनों कई छात्रों ने इसी कारण एकेटीयू ओल्ड कैंपस में हंगामा भी काटा था।

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अंदरूनी राजनीति से कई मामले लटके

एकेटीयू की अंदरूनी राजनीति भी खुलकर सामने आई है। पिछले दिनों पकड़े गए मुन्नाभाई देवेश ओझा के मामले में अंदरूनी कलह सामने आई थी। आईईटी के पूर्व निदेशक प्रो़ एएस विद्यार्थी ने 11 मई को एक रिसर्च स्कॉलर द्वारा प्री-पीएचडी परीक्षा का प्रश्नपत्र बनाने और मूल्यांकन कर खुद को पास करने का मामला पकड़ा था। इतना बड़ा मामला पकड़ने के बावजूद वह आरोपित स्कॉलर देवेश ओझा और उसके मददगार शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर तक नहीं दर्ज करवा सके थे। इस बीच प्राविधिक शिक्षा विभाग ने पहले प्रो. विद्यार्थी और फिर IET के रजिस्ट्रार को हटाने का आदेश जारी कर दिया था। प्रो़ विद्यार्थी को हटाने का फैसला काफी पहले हो चुका था लेकिन देवेश को पकड़ने के बाद जारी हुए आदेश ने शासन की मंशा पर कई सवाल खड़े कर दिए।

आईईटी और एकेटीयू के अधिकारियों के झगड़े में देवेश ओझा को मोहरे के तौर पर इस्तेमाल किए जाने की आशंक भी जताई जा रही है। देवेश सिविल विभाग में रिसर्च स्कॉलर है। इस विभाग के एचओडी और छात्र के गाइड शिक्षक ने यह जानते हुए कि वह भी परीक्षा में शामिल हो रहा है, उससे प्रश्नपत्र बनवाया। एकेटीयू के कुलपति प्रो. विनय पाठक के मुताबिक इस बीच प्रो. विद्यार्थी को पता चला कि उन्हें पद से हटाया जा सकता है। ऐसे में उन्होंने इस मामले का खुलासा कर दिया। इस मामले में जेबी श्रीवास्तव, सिविल इंजीनियरिंग विभाग के अध्यक्ष डॉ. एनबी सिंह, डॉ.वीरेंद्र पाठक, प्रो.एके शुक्ला, डॉ.एसपी शुक्ला, डॉ.विनय कुमार सिंह और प्रो.कैलाश नारायण की भूमिका पर सवाल उठे थे।

कैसें रोकेंगे टॉपर्स को

अक्सर यूपीएसईई में टॉप रैंकिंग वाले छात्र एकेटीयू से एफिलेटेड कॉलेजों में दाखिले नहीं लेते। उनका तर्क होता है कि एकेटीयू के कॉलेजेस से अच्छे पैकेज पर प्लेसमेंट नहीं होता। इसी कारण वह दूसरे इंजीनियिंग व मैनेजमेंट संस्थानों को प्रिफर करते हैं। ऐसे में एकेटीयू के लिए ये भी बड़ा चैलेंज है कि वह कैसे इन टॉपर्स छात्रों को अपनी ओर आकर्षित करे।

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