Patrika Hindi News
UP Election 2017

क्या अब किताबों के जरिए लड़ी जाएगी सियासी जंग?

Updated: IST SP bsp
किताबों के जरिए अब होगा हिसाब-किताब चुकता.

मधुकर मिश्र.
लखनऊ. सियासत पर किताब लिखने वाले इन दिनों सियासत चमकाने के लिए किताबें लिखने और छपवाने में जुटे हुए हैं। चुनावी मौसम में तमाम दलों का आखिर क्या है पुस्तक प्लान? खुलासा करती विशेष रिपोर्ट-

सियासत पर किताब लिखते-लिखते अब तमाम दल और उनके नेता अपनी सियासत को चमकाने के लिए ही किताबें लिखने और छपवाने में जुट गए हैं। चूंकि मौसम चुनावी है इसलिए इन किताबों के विषय भी चुनावी मुद्दों पर ही आधारित हैं। कोई किताबों के जरिए खुद को पाक-साफ बताते हुए विरोधी दलों को गलत ठहराने की कोशिश कर रहा है तो कहीं कोई सवालों के ही जरिए सियासी तीर चलाकर समुदाय विशेष को लुभाने की जुगत में लगा हुआ है। जबकि सत्ताधारी दल बुकलेट के जरिए अपने पांच साल में किए गए कामकाज का गुणगान करते हुए लोगों से खुद के लिए एक मौका और मांग रहा है।

सबसे पहले बात दलित की बेटी कहलाने वाली बसपा सुप्रीमो मायावती की, जो पांच साल का वनवास खत्म कर सत्ता के सिंहासन पर पहुंचने के लिए लालायित नजर आ रही हैं। माया को अपने इस सपने को साकार करने के लिए मुस्लिम वोटों की संजीवनी की दरकार है। ऐसे में वे किसी भी मंच या मौके से मुसलमानों को बहलाने-फुसलाने से चूक नहीं रही हैं। माया को यकीन है कि भले ही 2014 के लोकसभा चुनाव में मुस्लिम मत बंट गए हों, लेकिन समाजवादी कुनबे की कलह को देखते हुए उत्तर प्रदेश का मुसलमान आगामी विधानसभा चुनाव में अपना वोट नहीं खराब करेगा। अपनी इस सोच को साकार करने के लिए उन्होंने बकायदा एक बुकलेट भी जारी की है। जिसमें मुस्लिम समुदाय को समझाने की कोशिश की गई है कि वह आखिर समाजवादी की बजाए बसपा को ही क्यों वोट दें?

माया द्वारा मुस्लिम मन को मोहने वाली इस किताब के जरिए भाजपा को सांप्रदायिक पार्टी ठहराते हुए सपा-भाजपा की नजदीकियों के पुख्ता प्रमाण भी पेश किए गए हैं। दरअसल, मायावती उस भ्रमजाल को तोड़ने की हरसंभव कोशिश कर रही हैं, जिसे विरोधी दल बुनते हुए उन्हें खुद सवालों के कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। विरोधी दलों के मुताबिक चुनाव बाद यदि त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति बनती है तो निश्चित रूप से हाथी अपनी सूंड़ से कमल को उठाकर सत्ता के सिंहासन पर पहुंचा देगा। वहीं मायावती तमाम मौकों पर सपा और भाजपा के नेताओं की गलबहियां और प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दिए गए समर्थन का खुलासा बुकलेट के जरिए करते हुए पूछ रही हैं कि 'मुस्लिम समाज का सच्चा हितैषी कौन है'?

सपाईयों ने भी ढूढ़ निकाली सियासी काट-
कहते हैं कि लोहा लोहे को काटता है। इसी कहावत को चरितार्थ करते हुए समाजवादी पार्टी भी बुकलेट और काॅमिक्स के जरिए अपनी सोच और काम को लोगों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक पत्रिका के साथ बुकलेट छपवाकर अपने पांच साल के कामकाज का लेखा-जोखा लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की है। 'उत्तर प्रदेश - प्रगति की राह पर अग्रसर' पुस्तिका में उन्होंने उन सभी चुनावी वायदों और अपने किए गए कार्यो का जिक्र किया है, जिसे उन्होंने अपने कार्यकाल के भीतर पूरा कर दिखाने का दावा किया है। उपलब्धियों से भरी इस बुकलेट के आखिरी पन्ने में अखिलेश यादव द्वारा लिखी एक कविता भी है जिसमें उन्होंने लोगों से भविष्य में एक खुशहाल प्रदेश बनाने के लिए सबसे सहयोग की अपील की है।

किताबों के जरिए चुनावी जंग लड़ने में समाजवादी परिवार कहीं से भी पीछे नजर नहीं आ रहा है। हाल ही में सपा सुप्रीमों के जीवन पर आधारित एक काॅमिक्स भी रिलीज की गई है। 'एक गरीब परवर रहमदिल नेता के संघर्ष की कहानी' काॅमिक्स में नेता जी के जीवन से जुड़े संघर्ष की दास्तां और उनकी सोच को लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की गई है। बीते दिनों जब पार्टी से निकाले गए नेतागण मुलायम सिंह यादव के पास अपना पक्ष रखते हुए माफी मांगने पहुंचे तो उन्होंने नारेबाजी करने वाले नेताओं से पूछा कि क्या किसी ने जनेश्वर मिश्र, लोहिया जैसे समाजवादी नेताओं की कोई किताब पढ़ी है। तो हर कोई बगले झांकने लगा था। यह कोई पहला मौका नहीं था। इससे पहले भी रामगोपाल यादव की किताब रिलीज करते समय मुलायम ने कार्यकर्ताओं को लोहिया की कही गई बात याद दिलाते हुए चेताया था कि राजनीति में बेहतर करने के लिए पढ़ना-लिखना बहुत जरूरी है।

तैयार है इनका भी पुस्तक प्लान
चुनावी मौसम में किताबों के आने का सिलसिला पुराना है। लोकसभा चुनाव के पहले कुछ ऐसे ही ब्रांड मोदी को भुनाने के लिए भाजपा ने नरेंद्र मोदी के जीवन पर आधारित एक काॅमिक्स को लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की थी। जब 'बाल मोदी' काॅमिक्स काफी लोकप्रिय हुई तो 'नरेंद्र मोदी: भविष्य की आशा' जैसी किताबें भी बाजार में उतारी गईं थीं। जिसमें मोदी के चाय बेंचने से लेकर प्रधानमंत्री का उम्मीदवार बनने तक का किस्सा समाहित था। सूत्रों की मानें तो उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों को देखते हुए भाजपा और उसके सहयोगी पार्टियों का पुस्तक प्लान लगभग तैयार है। जिसे वह कभी भी घटाव-जुड़ाव के साथ लोगों के बीच पहुंचा सकते हैं। जाहिर तौर पर मोदी खेमा अखिलेश सरकार के कामकाज पर सवाल उठाते हुए लोगों से समर्थन की अपील करेगा तो वहीं कांग्रेस अपने 27 साल यूपी बेहाल के मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए अपनी बात लोगों तक पहुंचाएगी। सूबे में अपनी सियासी ताकत बढ़ाने में जुटी अनुप्रिया पटेल की पार्टी भी बुकलेट को जल्द रिलीज करने वाली है। खबर है कि इसमें अखिलेश यादव की सरकार के कामकाज पर सुप्रीम कोर्ट की उन तमाम फटकारों का सिलसिलेवार जिक्र होगा जो उनकी नाकामियों को दर्शाएगा।

अपने विवाह के सपने को सपने भारत मैट्रीमोनी से साकार करे।- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन करे!
'
Patrika.com

लेटेस्ट ख़बरें ई-मेल पर पाने के लिए सब्सक्राइब करें

Dus ka Dum
Ad Block is Banned Click here to refresh the page

???? ??????? ?? ??? ???? ????? ???