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UP Election 2017

आधे-अधूरे कामों के भरोसे चुनावी रण में उतरेंगे अखिलेश, अधूरी तैयारियों से कैसे बदलेगा प्रदेश!

Updated: IST akhilesh
विकास करने के लिए लोकार्पण पर जोर गलत

लखनऊ. चुनाव नजदीक हैं और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एक के बाद एक विकास योजनाओं का लोकार्पण किए जा रहे हैं। कई हो चुके हैं और अभी तमाम बाकी हैं। सपा सरकार अपने कार्यकाल में हुए सभी विकास कार्यों का श्रेय लेने से पीछे नहीं हटना चाहती। जाहिर है हटे भी क्यों? चुनावी सीजन है और 'काम बोलता है' के सहारे सीएम अखिलेश यादव डेवलपमेंट का अजेंडा जनता के बीच ले जाना चाहते हैं। गुरुवार को मुख्यमंत्री ने गुरुवार को लखनऊ मेट्रो के ट्रायल रन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसी क्रम में लखनऊ स्मार्ट सिटी में चुने गए हेरिटेज जोन का लोकार्पण 4 दिसम्बर को प्रस्तावित है। विपक्षी दलों खासकर बसपा और भाजपा का आरोप है कि यूपी सरकार आधी-अधूरी योजनाओं का लोकार्पण कर रही है।

बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि आधी अधूरी योजनाएं शुरू करना गलत है। हमारी सरकार बनते ही इसकी जांच कराई जाएगी और दोषी दंडित होंगे। भाजपा प्रवक्ता आईपी सिंह ने कहा कि सरकार को आधी अधूरी योजनाओं को लोकार्पण नहीं करना चाहिए। विकास करने के लिए लोकार्पण पर जोर नहीं होना चाहिए। केंद्रीय मंत्री सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्री कलराज मिश्र ने कहा कि लखनऊ मेट्रो के लिए पैसा केंद्र सरकार ने दिया और इसका ट्रायल यूपी सरकार द्वारा किया जा रहा है। पत्रिका संवाददाता ने आरोपों पर पड़ताल की तो हकीकत सामने आई कि इससे पहले भी मुख्यमंत्री कई अधूरे कामों कर चुके हैं।

लखनऊ मेट्रो का ट्रायल ट्रांसपोर्ट नगर से आलमबाग स्टेशन के बीच हुआ। लेकिन प्राथिमिकता क्षेत्र में ट्रांसपोर्ट नगर से चारबाग तक का रुट तय है। ट्रायल के लिए सिर्फ 3 स्टेशन ही इसलिए चुने गए क्योंकि आलमबाग स्टेशन का प्लेटफार्म कार्य अभी बाकी है। साथ ही मवैया और चारबाग में भी कुछ चरणों का काम बाकी है।

इन अधूरे कामों हुआ लोकार्पण
लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे : 21 नवंबर 2016 को अखिलेश के ड्रीम प्रोजेक्ट लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे के लोकार्पण के दिन जमीन पर प्लेन उतरे। अभी भी साइन बोर्ड, डिवाइडर, डिफर लाइन, सर्विस लेन और सड़क पर कट जैसी सुविधाएं पूरी नहीं हुई है। सफर कर चुके यात्री वीडी त्रिपाठी ने कहा कि इससे अच्छा पुराना रूट है। सिर्फ थोड़े ही पैच पर सड़क बनी है बाकी अधूरी है।

डायल 100 : यह परियोजना भी हाल ही में लॉन्च हुई है। इस योजना को 11 जिलों में शुरू किया गया है, जबकि इसे प्रदेश के 75 जिलों में शुरू करना बाकी है।

जनेश्वर मिश्र पार्क : 2014 में बना एशिया का सबसे बड़ा जनेश्वर मिश्र पार्क आज भी अधूरा है। लगभग 2 साल से गंडोला बोट का संचालन नहीं हो सका है। इसके लोकार्पण के समय न किड्स जोन बना था और न झील कम्?प्लीट थी। आज भी यहां कहानी घर और इन्?डोर स्टेडियम निर्माणधीन ही है।

लोकभवन : 3 अक्टूबर को नए लोक भवन का लोकार्पण हुआ। यहां तीन ब्लॉक बनने थे लेकिेन सिर्फ एक ही ब्लॉक बनने के बाद ऑफिस का इनॉगरेशन कर दिया गया। ऑफिस में पार्किंग का भी चल रहा है।

म्यूजियम ब्लॉक : जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर में म्यूजियम ब्लॉक बनते ही इसका लोकार्पण 11 अक्टूबर को कर दिया गया। वहीं, अभी हैलीपैड, स्पोट्र्स ब्लॉक, एक्वेटिक ब्लॉक और गेस्ट हाउस का काम पूरा होना बाकी है।

रिवर फ्रण्ट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट : लोकार्पण हो चुका है, लेकिन अभी भी 12 किलोमीटर में काम होना बाकी है।

आधे-अधूरे हेरिटेज जोन का लोकार्पण!
लखनऊ स्मार्ट सिटी में चुने गए हेरिटेज जोन का लोकार्पण 4 दिसम्बर को होना है, लेकिन अभी कई काम बाकी हैं-
नए कम्युनिटी सेंटर के पीछे एक ग्रुप हाउसिंग बनाई गई है, जिसका नक्शा पास नहीं है।
शीशमहल तालाब अवैध निर्माण से घिरा हुआ है।
टीले वाली मस्जिद के पीछे अब तक सड़क का निर्माण पूरा नहीं हुआ।
नींबू पार्क बिजली उपकेंद्र हटाया जाना प्रस्तावित था, जो अभी तक नहीं हो पाया।
पार्किंग की समस्या से जूझ रहे इस क्षेत्र में सरकार 200 करोड़ खर्च कर रही है, लेकिन समस्या अभी भी बनी है।
पर्यटकों के लिए फूडकोर्ट बनना था जो अभी तक नहीं बना।

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