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आदेशों में 'खेल', सीएम ने कहा 'हटाओ' तो पीएमओ ने कहा 'लगाओ'

Updated: IST Yoga
आदेशों को लेकर सीएमओ और पीएमओ में मतभेद ?

लखनऊ। पीएम नरेंद्र मोदी मंगलवार को राजधानी पहुंचे। 21 जून को होने वाले योग दिवस से पहले वे कार्यक्रम में शिरकरत करेंगे। इस बीच पीएम नरेंद्र मोदी के शहर में आने पर पूरे शहर में विशेष होर्डिंग लगाई गयी। राज्य सरकार की ओर से पहले ही इस समबन्ध में आदेश किये गए थे की सिर्फ योग आसान को दर्शाती हुई ही होर्डिंग लगाई जाएं। लखनऊ मंडल की समीक्षा बैठक में खुद सीएम योगी ने स्पष्ट तौर से कहा था कि शहर से अवैध होर्डिंग हटाई जाएं। लेकिन आखिर उनके इन आदेश के बाद कार्रवाई शुरू ही हुई थी की उनके आदेशों में कुछ परिवर्तन हो गया।

सीएम ने कहा अवैध होर्डिंग के खिलाफ हो कार्रवाई

सूत्रों ने बताया कि अवैध होर्डिंग के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा था। चौराहों और रोड किनारे अवैध ढंग से लगी होडिंग तो हटाया जा रहा था। इसमें कुछ प्रिवेट होर्डिंग भी थी जिसमें योग का राजनीतिकरण करते हुए नेताओं ने सीएम से लेकर पीएम की तस्वीरें लगाई थीं। इसमें योग के आसान भी नहीं थे और साथ ही ये नियम विरुद्ध भी थीं। लिहाज़ा इन्हे उतार दिया गया।

आला अधिकारियों ने लगा दी 'क्लास'

मामला सत्ताधारी पार्टी से जुड़ा होने के चलते हाई कमान तक पहुंचा। आनन फानन में निगम अधिकारियों को शासन में तलब किया गया। उनसे कहा गया कि उन होर्डिंग को भी न हटाया जाए जो प्राइवेट हैं और उनपर योग कार्यक्रम से सम्बंधित हों। उच्च अधिकारियों का कहना था कि मामला पीएमओ तक पहुँच चुका है। लिहाज़ा 21 जून तक ऐसी होर्डिंग्स को न हटाया जाए।

लोहिया पथ 'नो एडवरटाइजिंग जोन' लेकिन लगी है होर्डिंग

यही कारण है कि निगम अधिकारी लोहिया पथ पर लगी होर्डिंग को हटाने से कतरा रहे हैं। बतादें कि लोहिया पथ नो एडवरटाइजिंग ज़ोन है लेकिन योग के प्रचार के चलते वहां लगी होर्डिंग नहीं उतरीं गयी। ये कहना गलता नहीं कि सीएम के सरकारी घर 5 केडी से आधे किलोमीटर दूर ही अवैध होर्डिंग सजी हैं।

प्रचार प्रभारी अशोक सिंह ने बताया कि 175 होर्डिंग सूचना विभाग द्वारा योग के प्रचार के लिए लगवाई गयी हैं। कुछ प्राइवेट होर्डिंग भी लगी हैं लेकिन वे योग से सम्बंधित हैं। इन सभी होर्डिंग्स को 21 जून के बाद हटाया जाएगा।

अधिकारी को गाली देने वाले प्रचार माफिआ का पता है लेकिन कार्रवाई नहीं

अवैध होर्डिंग पर कार्रवाई के दौरान प्रचार अधीक्षक राजेश सिंह को प्रचार माफियों ने गाली और धमकी दी थी। इस मामले में एफआईआर तक दर्ज की गयी। खुद राजेश सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने स्तर से नंबर ट्रेस कर लोकेशन का पता लगाया है। यहां तक की आरोपी खुद अवैध स्टैंड चला रहा है। लेकिन न निगम आला अधिकारी और न ही पुलिस विभाग ने अभी तक आरोपी पर किसी प्रकार की कार्रवाई की है। लग रहा है सम्बंधित अधिकारी प्रचार माफियों के नेटवर्क के आगे नतमस्तक हो चुके हैं।

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