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अपना-पराया बर्ताव, चहेतों के इलाकों में सिमट गए नेता

Updated: IST up politics 2017
जहां से वोट मिलेंगे, वहां विकास होगा!

लखनऊ। मुद्दों-बड़े सवालों से तौबा करने के बाद उम्मीदवारों ने जनसंपर्क में अपना-पराया करना शुरू कर दिया है। मतदान की तारीख करीब आते ही प्रत्याशियों ने सिर्फ ऐसे इलाकों में फोकस करना शुरू कर दिया है, जहां से एकमुश्त वोट मिलना तय है। छिटपुट वोट वाले इलाकों में समर्थकों की टोली घूम रही है तो निगेटिव पोलिंग वाले इलाकों में झांकने से परहेज है। अपना-पराया करने में भाजपा और सपा के उम्मीदवार सबसे आगे हैं। भाजपा को अल्पसंख्यक बाहुल्य इलाकों से परहेज है, जबकि सपा के उम्मीदवार कट्टर हिंदू इलाकों में समय व्यर्थ नहीं करना चाहते हैं।

भाजपा की किताब में ऐसी रणनीति

भाजपा ने अपने सभी उम्मीदवारों को चुनाव जीतने के पचास फंडे बताते हुए एक मार्गदर्शिका मुहैया कराई है। इस किताब में क्षेत्रवार प्रत्याशियों को समझाया गया है कि किसी इलाके में ज्यादा मेहनत करना है और किस इलाके में कम। जीत के फंडे में यह बिंदु भी है कि अल्पसंख्यक बाहुल्य इलाकों में ज्यादा वोट मिलने की उम्मीद नहीं है, ऐसे में वहां एक बारगी घूम अवश्य लिया जाए, लेकिन लगातार जनसंपर्क करने और कार्यकर्ताओं को अमुक क्षेत्र की जिम्मेदारी में उलझाना ठीक नहीं होगा। अवध क्षेत्र के चुनाव में भाजपा की यह रणनीति स्पष्ट नजर आने लगी है। लखनऊ-कानपुर की बात करें तो अभी तक मुस्लिम इलाकों में भाजपा के प्रत्याशी जनसंपर्क करने नहीं पहुंचे हैं।

मुस्लिम मोहल्लों में दौड़ रही साइकिल

भाजपा की तर्ज पर सपा ने स्पष्ट तौर पर किसी इलाके से परहेज का इरादा नहीं बनाया है, लेकिन मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में सपा के कार्यकर्ता दिन-रात जुटे हैं। पार्टी को उम्मीद है कि भाजपा से खिलाफत करने वाली बिरादरी इस मर्तबा एकजुट होकर सपा के साथ रहेगी। ऐसे में मुस्लिम मतों के बिखराव को रोकने के लिए सपा आलाकमान ने प्रत्याशियों को आदेश दिया है कि अव्वल अल्पसंख्यक मतों का बिखराव रोका जाए, इसके साथ ही बिरादरी के ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं को बूथ तक पहुंचाया जाए।

नेताओं की सभा भी चहेते इलाकों में

स्टार प्रचारकों की जनसभा में भी अपना-पराया सामने है। भीड़ जुटाने के लिए सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने बड़े नेताओं की जनसभा उन्हीं इलाकों में कराई हैं या कराना चाहते हैं, जहां पार्टी का जनाधार है। पार्टियों की इस रणनीति पर राजनीतिक विश्लेषक शैलेंद्र त्रिपाठी कहते हैं कि राजनीति के चश्में से देखा जाए तो कुछ गलत नहीं है, लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए। क्या गारंटी कि चुनाव के वक्त चुनिंदा इलाकों से परहेज करने वला नेता विधायक बनने के बाद क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के बारे में बात करेगा। जाहिर है कि जहां से वोट मिलेंगे, वहां विकास होगा और दूसरे इलाके के साथ सौतेलापन।

वर्जन...

ऐसा नहीं है, पार्टी तो प्रत्येक सीट पर फोकस कर रही है। प्लानिंग फेज के अनुसार हो रही है। यह कहना ठीक नहीं होगा कि केवल जहां मजबूत हैं वहीं फोकस कर रहे हैं। हमारे नेता प्रत्येक सीट पर प्रचार करने पहुंच रहे हैं। प्रत्याशियों की बात करें तो सभी चुनाव जीतना चाहते हैं, जहां ज्यादा समर्थक होंगे, वहां ज्यादा ध्यान दिया जाता है।

- विजय बहादुर पाठक, प्रदेश प्रवक्ता, बीजेपी

हमारे प्रत्याशी और कार्यकर्ता प्रदेश में सभी स्थानों पर प्रचार के लिए पहुँच रहे हैं, हमारे पास ऐसी कोई शिकायत नहीं आई, इस बार समाजवादी पार्टी के जीत के लिए कार्यकर्ता और प्रत्याशी मेहनत कर रहे हैं। अल्पसंख्यक मतदाता सपा के साथ हैं और रहेंगे।

जूही सिंह, प्रदेश प्रवक्ता, सपा

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