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BREAKING - रायसीना हिल्स के बहाने राजनीति @ 360 डिग्री

Updated: IST BJP Mission 2019
शिवपाल ने ताल ठोंककर कोविंद को दिया वोट, उनके साथ पार्टी के सात अन्य विधायक भी मौजूद थे। निर्दलीय भी साथ दिखे, बसपा के कुछ विधायक भी ‘यूपी गौरव’ की आड़ में अपनी राजनीति का भविष्य दुरुस्त करने की फिराक में दिखे। ‘ऑफ द रिकॉड’ राम को मीरा के मुकाबले सुलझा और निर्विवाद व्यक्ति बताकर अपने वोट का मूल्यांकन कराने वाले विधायकों की संख्या को जोडक़र आंकलन किया जाए तो 403 सदस्यों वाली यूपी विधानसभा में रामनाथ कोविंद के पक्ष में 360 विधायकों ने मतदान किया है।

आलोक पाण्डेय

लखनऊ. देश के नए महामहिम के लिए मतदान ने यूपी की सियासत के नए समीकरण गढ़ दिए हैं। दलित बनाम दलित उम्मीदवार मुकाबले के बावजूद भाजपा के चक्रव्यूह में अखिलेश और मायावती के मोहरे बुरी तरह उलझे नजर आए। सोमवार को विधानसभा में सपा के सुल्तान शिवपाल सिंह खुलकर एनडीए प्रत्याशी रामनाथ कोविंद के पक्ष में मतदान करने पहुंचें। उनके साथ पार्टी के सात अन्य विधायक भी मौजूद थे। बसपा के कुछ विधायक भी ‘यूपी गौरव’ की आड़ में अपनी राजनीति का भविष्य दुरुस्त करने की फिराक में दिखे। ‘ऑफ द रिकॉड’ राम को मीरा के मुकाबले सुलझा और निर्विवाद व्यक्ति बताकर अपने वोट का मूल्यांकन कराने वाले विधायकों की संख्या को जोडक़र आंकलन किया जाए तो 403 सदस्यों वाली यूपी विधानसभा में रामनाथ कोविंद के पक्ष में 360 विधायकों ने मतदान किया है। मीरा के हिस्से संभवत: 43 विधायकों का समर्थन आया है। यह 360 विधायकों का समर्थन यूपी की राजनीति में 360 डिग्री का बदलाव लाने की बुनियाद रख चुकी है। वर्ष 2019 के आम चुनावों और उससे तनिक पहले 2018 में राज्यसभा चुनावों के दरम्यान 360 डिग्री की सियासत बसपा-सपा को झटका देगी तो भगवा ब्रिगेड को मजबूती मिलने की संभावना है।

अधिकांश ‘माननीयों’ ने लाइन लगाकर किया मतदान

सुबह करीब 12 बजे विधानसभा में नजारा कुछ दिलचस्प नजर आया। आमतौर पर वीआईपी कल्चर के शौकीन तमाम विधायक एक लाइन में खड़े थे। मौका था देश के प्रथम राष्ट्रपति के चुनाव के लिए मतदान। कैमरे का फोकस घूमते ही विजयश्री का चिह्न बनाकर कोविंद की जीत का इशारा करने वाले माननीय अपने विपक्षी साथियों पर ताने कसने से भी नहीं चूक रहे थे। ‘इकतरफा जंग’ का कमेंट उछलते ही दूसरे पक्ष से ‘मूल्यों की लड़ाई’ का शब्दबाण छोड़ा जाता रहा। कुल मिलाकर लाइन में खड़े विधायकों को पीस-पच्चीस मिनट इंतजार करने के बाद ही बैलेट पेपर मिला, जिसमे प्रत्याशी के नाम के आगे वरीयता लिखकर निकल गए।

शिव ने ताल ठोंककर दिया राम का साथ

किसने किसे वोट दिया, यह तो 20 जुलाई को मालूम होगा, लेकिन सपा के सुल्तान अखिलेश यादव के चाचा और जसवंतनगर से विधायक शिवपाल ताल ठोंककर भाजपा उम्मीदवार रामनाथ कोविंद के पक्ष में मतदान करने पहुंचे। विधानसभा के गेट नंबर सात से पार्टी के पांच-छह विधायकों के साथ दाखिल हुए शिवपाल ने रामनाथ कोविंद को लोहियावादी करार दिया। शिवपाल ने दावा किया कि नेताजी (मुलायम सिंह) के आदेश पर सपा के 22 विधायक रामनाथ कोविंद को वोट देंगे। सपा की भगदड़ जैसी यह स्थिति बसपा में भी चुपके-चुपके नजर आई। बसपा के करीब नौ विधायकों के एनडीए प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करने का दावा किया गया है। भाजपा का दावा है कि कांग्रेस के दो विधायकों ने भी भाजपा का साथ दिया है। चर्चाओं पर यकीन करें तो कुंडा से निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह, बाबागंज से निर्दलीय विधायक विनोद कुमार और नौतनवा से निर्दलीय विधायक अमनमणि त्रिपाठी ने भी राम का साथ दिया है। ऐसे में उम्मीद है कि 403 सदस्यों वाली विधानसभा में रामनाथ कोविंद के पक्ष में 360 विधायकों ने मतदान किया है।

मिशन 2019 की तैयारी है यह 360 डिग्री राजनीति

कानपुर विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर एसपी सिंह के मुताबिक, वर्ष 2019 में आम चुनावों में पिछली कामयाबी को कायम रखने के लिए भाजपा ने विपक्षी दलों को कमजोर करने की रणनीति बनाई है। इसी योजना के तहत बसपा को खत्म करने की कोशिश जारी है। साथ ही सपा के सुल्तान अखिलेश यादव को कमजोर करने के लिए शिवपाल सिंह यादव के जरिए समाजवादी पार्टी को दो टुकड़ों में कराने की मंशा है। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रकाश शर्मा कहते हैं कि भाजपा तोड़-फोड़ में यकीन नहीं करती, जिन्हें यकीन हो गया है कि भाजपा के नेतृत्व में प्रदेश में विकास संभव है, ऐसे लोग खुद पार्टी के साथ आने की कोशिश में जुटे हैं। बहरहाल, वरिष्ठ पत्रकार अशोक पाण्डेय कहते हैं कि मायावती पर सीधा हमला बोलने के बजाय भाजपा दलित बिरादरी को अपने पक्ष में खड़ा करने की कोशिश में है। बसपा की मौजूदा संख्याबल के आधार पर अकेली मायावती भी राज्यसभा के लिए दोबारा निर्वाचित नहीं हो पाएंगी। उन्हें किसी दूसरे दल के समर्थन की दरकार होगी। ऐसे हालात में बसपा टूटती है तो मायावती के सामने अपने अस्तित्व का संकट होगा। भाजपा ऐसे ही हालात पैदा करना चाहती है। ऐसा हुआ तो मायावती भी भाजपा को मिशन 2019 में परोक्ष समर्थन देकर अखिलेश से संभावित गठबंधन बनाने से तौबा करेंगी।

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