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CSE ने खड़े किये भारत सरकार  द्वारा की गयी स्वच्छता रैंकिंग पर सवाल

Updated: IST Swachh Survekshan
जिन शहरों में घर से कूड़ा सेग्रीगेट होता है और री यूज़ और री साइकिल पर जोर दिया जाता है उनकी रैंकिंग काफी पीछे है।

लखनऊ। सेण्टर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट ने भारत सरकार द्वारा स्वच्छ सर्वेक्षण के अंतर्गत दी गयी रैंकिंग पर सवाल खड़े किये हैं। साथ ही एक केंद्र सरकार को इसमें अपनाई जा रही तकनीक और तरीके को बदलने की बात भी सुझाई है। मालूम हो की हाल ही में लखनऊ को 269 रैंक मिली थी जिसके बाद सीएम योगी से लेकर नगर विकास मंत्री ने खुद झाड़ू उठा लिया। रजधानी के मेयर से भी सीएम ने नाराज़गी जाहिर की थी जिसके दो दिन के अंदर सुबह शाम सफाई करने का प्लान भी बना लिया गया।

दरअसल हाल ही में स्वछता रैंकिंग में प्रदेश का सिर्फ एक ही शहर टॉप 100 में जगह बना पाया था। जबकि सबसे गंदे 10 शहरों में प्रदेश के पांच शहर शामिल हैं। सीएसई द्वारा किये गए एक आंकलन के आधार पर जिस इंदौर शहर को नंबर एक पर जगह मिली है वहाँ कूड़ा निस्तारण के लिए अपने जा रही तकनीक पर्यावरण की दृष्टि से सही नहीं हैं। इंदौर, भोपाल और विशाखापटनम इन तीनों शहरों में असंबद्ध कचरे को डंप किया जा रहा है। इसलिए, इन नगरों में नगरपालिका नियम (एमएसडब्ल्यू नियम), 2016 की वैधानिक आवश्यकताओं को पूरा नहीं किया गया है।

एमएसडब्ल्यू नियम में साफ़ तौर से कूड़े के सेग्रिगेशन पर जोर दिया गया है। इसके तहत कूड़े को तीन अलग लेवल पर घर ही से बांटा जाना है। गीला वेस्ट, ड्राई वेस्ट और घरेलू खतरनाक वेस्ट। लेकिन मौजूदा समय में उन शहरों में ऐसा नहीं होता। वहां आज भी लैंडफिल से कूड़े का निस्तारण हुआ है। साथ ही री यूज़ और रीसाइक्लिंग पर भी ज़ोर नहीं दिया गया है।

इस आंकलन की माने तो इंदौर जो की सबसे साफ़ शहर माना गया वे आज भी कूड़े के निस्तारण के लिए जूझ रहा है। सूरत जो की 4 स्थान पर रहा वहाँ अभी भी कूड़ा डंप किया जा रहा है। वही जिन शहरों में घर से कूड़ा सेग्रीगेट होता है और री यूज़ और री साइकिल पर जोर दिया जाता है उनकी रैंकिंग काफी पीछे है। उदाहरण के तौर पर अलप्पुज़ः और पंजिम में लैंडफिल नहीं है। वहा वेस्ट तो बायो गैस और कम्पोस्ट में बदला जाता है। साथ कांच और प्लास्टिक जैसे वेस्ट का री यूज किया जाता है। लेकिन इन शहरों की रैंकिंग बहुत ख़राब है।

सीएसई के डिप्टी डायरेक्टर चंद्र भूषण का कहना है की सर्वेक्षण के तरीके को बदलाव की ज़रुरत है। जिस शहर में अच्छा काम हो रहा है उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए। ऐसा न होने से काम करने वालों का मनोबल कम होता है। तभी हम पूरे देश को साफ़ कर सकेंगे। अब अगली बार 4 हज़ार शहरों की स्वच्छता रैंकिंग निकाली जाएगी। उम्मीद है इसमें सही तरीकों का प्रयोग होगा।

पर्यावरण अभियंता पंकज भूषण ने बताया कि लखनऊ में कूड़ा निस्तारण नियमानुसार हो रहा। कुछ समस्याएं बीच में ज़रूर हुई थी लेकिन समय के साथ चीज़ें बदल रही हैं। जिन घरों से वेस्ट कलेक्शन होता है वहाँ सेग्रीगेशन की तैयारी की जा रही है। इसके आलावा घर की लड़कियों को भी किचन सेग्रीगेशन की ट्रेनिंग दी जा चुकी है। उम्मीद है की हम अगली बार अच्छी रैंक ला सकेंगे।

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