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रामगोपाल से मिली BJP की पूर्व राज्यसभा सदस्य, अखिलेश गुट से चुनाव लड़ने की अटकलें

Updated: IST kusum rai
लोकसभा चुनाव 2014 में लखनऊ से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। जिसके बाद बीजेपी हाईकमान सकते में आ गया था।

लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी से राज्यसभा सदस्य रह चुकी कुसुम रॉय ने आज नोएडा स्थित रामगोपाल यादव के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की। अटकलें लगाईं जा रही हैं कि कुसुम रॉय अखिलेश गुट से टिकट लेकर लखनऊ की किसी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। दरअसल बीजेपी की ओर से विधानसभा चुनाव 2017 के लिए टिकट मिलने की संभावनाओं को कम होता कुसुम रॉय अखिलेश गुट से टिकट मिलने की कोशिश में जुटी हैं।

इस बारे में कुसुम राॅय का कहना है कि वह सुरक्षा कारणों से रामगोपाल यादव से मिलने गये थे। क्योंकि सीएम अखिलेश यादव से मुलाकात नहीं हो पार्इ थीण् इसलिए वह रामगोपाल से मिलने गर्इ थी।

इससे पहले भी लोकसभा चुनाव 2014 में कुसुम रॉय ने लखनऊ से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। जिसके बाद बीजेपी हाईकमान सकते में आ गया था। दरअसल यहाँ से राजनाथ सिंह और लाल जी टंडन में चुनाव लड़ने को लेकर पहले से मतभेद चल रहे थे। आखिर बाद में राजनाथ सिंह को ही टिकट दी गयी थी।

जानिये कौन हैं कुसुम रॉय

कुसुम रॉय का जन्म 14 अगस्त 1968 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुआ था। उनके पिता का नाम महत्तम राॅय और माता का नाम सूर्यमती देवी था। उनका विवाह राजेश राॅय से हुआ। कुसुम राॅय की दो संतानें हैं। कुसुम रॉय भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता हैं और उत्तर प्रदेश से पूर्व राज्यसभा सदस्य रह चुकी हैं । वह उत्तर प्रदेश की आजमगढ़ सीट से सम्बन्ध रखती हैं।

कुसुम राॅय नवंबर 1995 से 2000 तक लखनऊ नगर निगम से पार्षद रही। इसके साथ ही वह मई 1999 से जून 1999 तक उत्तर प्रदेश सोशल एडवाईजरी बोर्ड की चेयरपर्सन रही। ये पद कैबिनेट मिनिस्टर के लेवल का पद होता है। नबंबर 1999 से दिसंबर 1999 तक राज्य महिला कमीशन की चेयरपर्सन रही।

फरवरी 2003 से नवंबर 2008 तक वह विधायक रही। इस बीच उनके राजनीतिक जीवन में तमाम परिवर्तन आये। मार्च 2003 से मार्च 2004 तक उन्होंने बीजेपी से अलग होकर कल्याण सिंह की राष्ट्रीय जन क्रांति पार्टी की ओर से विधानसभा में नेतृत्व किया। इस बीच वह अक्टूबर 2003 से फरवरी 2004 तक उत्तर प्रदेश सरकार में पब्लिक वर्क विभाग में मंत्री भी रही।

नवंबर 2008 में उन्हें बीजेपी की ओर से राज्यसभा सदस्य चुना गया। इस बीच वह नवंबर 2008 से मई 2009 तक ग्रामीण विकास कमेटी की सदस्य रही। इस बीच उन्हें कई कमेटियों का सदस्य भी बनाया गया।

कुसुम रॉय के पति राजेश राय को लखनऊ की एक स्थानीय अदालत ने पांच साल जेल की सजा सुनाई थी। दरअसल राजेश राय राज्य के सूचना केन्द्र में प्रभारी के पद पर कार्यरत थे। इस पद पर उनकी नियुक्ति 1991-92 में कल्याण सिंह सरकार के दौरान हुई थीं। जिसमें राजेश रॉय पर 1993 में दलित उत्पीड़न का एक मामला दर्ज हुआ था जिसमें कोर्ट ने उन्हें पांच साल की सजा सुनाई थी।

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