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#जागो जनमत: सेल टैक्स बार एसोसिएशन ने पत्रिका के माध्यम से उठाई भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज

Updated: IST jago janmat campaign
इस सिलसिले में पत्रिका की टीम हजरतगंज स्थित वाणिज्य कर विभाग के ऑफिस पहुंची और वकीलों से बातचीत की।

लखनऊ। यूपी के विधानसभा चुनाव 2017 को लेकर हर पार्टी की तैयारियां चल रही है। इस बीच पत्रिका ने जागो जनमत अभियान के माध्यम से अलग-अलग फील्ड के लोगों से उनके मुद्दों के बारे में जानने की कोशिश की। इस सिलसिले में पत्रिका की टीम हजरतगंज स्थित वाणिज्य कर विभाग के ऑफिस पहुंची और वकीलों से बातचीत की।

भ्रष्टाचार है अहम समस्या

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सीनियर वकील अनुपम श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार नियम तो बना देती है लेकिन उसे सख्ती से लागू नहीं करा पाती। विभाग में रजिस्ट्रेशन के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा तो दे डदी गयी। जिसमें दिए प्रॉसेज के मुताबिक़ तीन दिन में रजिस्ट्रेशन कंप्लीट हो जाएगा लेकिन इसमें ऑनलाइन होने के बाद भी महीनों लगते हैं। जब तक सरकारी अफसरों को घूस न दो तब तक रजिस्ट्रेशन होता ही नहीं। ऐसे लोग रजिस्ट्रेशन काउंटर पर बैठे हैं जिनको कंप्यूटर चलाना नहीं आता। ऐसे में वही पुरानी धीमी प्रणाली और घूसखोरी से रजिस्ट्रेशन होता है। इसको लेकर सरकार की ओर से सख्त नियम तो बनाये जाते हैं लेकिन उनको सरकार सही से लागू नहीं करा पाती।

मुआवजे के लिए बने नियम

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वकील जयराम सिंह कहते हैं कि वकीलों के मर्डर होने पर उन्हें मुआवजे के लिए लड़ना पड़ता है। इसलिए इस बार के चुनाव में हम उसी सरकार का समर्थन करेंगे जो किसी कारणवश अनहोनी के शिकार हुए वकील के परिवार वालों को मुआवजे को लेकर स्पष्ट क़ानून बनाएगी। इसके अलावा विभाग में किसी भी कार्य के लिए एडवोकेट एक ऑर्थराइज़ड पर्सन है और उसके बिना कोई काम नहीं किया जा सकता।

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वकील उमेश चंद्र श्रीवास्तव कहते हैं विभाग में मुंशी, चपरासी और हाईस्कूल पास ऐसे लोग काम करवा रहे हैं जो इसके लिए पूरी तरह से अनाधिकृत लोग हैं। इनका समर्थन विभाग में तैनात अफसर भी करते हैं क्योंकि ये अफसरों को अवैध पैसा कामवाते हैं। इस बारे में सेल्स टैक्स बार एसोसिएशन की ओर से हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की गयी है। इसके अलावा जीएसटी लॉ में पूरी पावर वकीलों को दी गयी है लेकिन अनाधिकृत लोग काम करवा रहे हैं। इस बारे में पार्टियों को ध्यान देना चाहिए। भारत में जुगाड़ सबसे बुरी चीज है। यही भ्रष्टाचार को जन्म दे रही है।

सम्मान नहीं मिलता

उम्र के 65 दशक पर कर चुके सीनियर वकील आरकेपी खट्टा कहते हैं कि विभाग के अफसरों की ओर से वकीलों का सम्मान नहीं किया जाता। एक समय था जब वकील समाज का बुद्धिजीवी वर्ग माना जाता था लेकिन अब वकील को विभाग में ही सम्मान नहीं मिलता। विभाग के अफसरों की ओर से उसे मुंशी, चपरासी के सामने नीचा दिखाने की कोशिश की जाती है। इसलिए पार्टियों को समाज के बुद्धिजीवी वर्ग के सम्मान के बारे में सोचना चाहिए और इसके लिए जरूरी है कि अनाधिकृत लोगों को कानूनी काम नहीं करने देना चाहिए।

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