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UP Election 2017

इस सीट पर ब्राहम्ण प्रत्याशी ही सियासत का रहा है बडा खिलाड़ी

Updated: IST kanishiram
कांग्रेस और भाजपा का रहा कब्जा, सपा का नहीं खुला खाता

लखनऊ. लखनऊ कैंट विधान सभा सीट कांग्रेस और भाजपा के लिए मुफीद रही है। लेकिन वर्ष 1957 से 2012 तक दोनों राष्ट्रीय पार्टियों ने ब्राहम्ण प्रत्याशी पर ही अपना ध्यान ज्यादा दिया। जो इस सीट से सियासत के बडे खिलाडी रहे। इस विधान सभा सीट से 15 बार विधान सभा चुनाव में 10 बार ब्राहम्ण प्रत्याशी ही विजयी हुए हैं। कांग्रेस ने महिला प्रत्याशी को दो बार मैदान में उतरा और दोनों बार विजय मिली। वर्ष 1957 में कैंट को पहला विधायक कांग्रेस के श्याम मनोहर मिश्रा के रूप में मिला। उसके बाद से अभी तक ब्राहम्ण प्रत्याशी का दबदबा बरकरार है। भाजप ने यहा से कभी भी महिला प्रत्याशी को मैदान में नहीं उतारा। वर्ष 2017 के विधान सभा चुनाव के लिए सपा ने भी महिला प्रत्याशी अर्पणा यादव को मैदान में उतारा है। इस विधान सभा में लखनऊ म्यूनिसपल कॉरपोरेशन के कैंट, सदर बाजार, आलमबाग, आशियाना, कृष्णानगर, चारबाग, मवैय्या, नाका, तेलीबाग क्षेत्र है।

ब्राहम्ण प्रत्याशी ही लगाते रहें हैट्रिक

वर्ष 1980 से 2012 तक विधान सभा चुनाव में लगातार ब्राहम्ण प्रत्याशी ही विजयी होता रहा है। कांग्रेस की प्रेमावती तिवारी और भाजपा के सुरेश चन्द्र तिवारी ने यहां से विधान सभा चुनाव में हैट्रिक लगाई। वर्ष 2012 के विधान सभा चुनाव में यहां से कांग्रेस की रीता बहुगुणा जोशी विधान सभा पहुंचीं।

ये क्षेत्र हैं गेमचेंजर

अधिक मतदाता

सूर्यनगर 1758 मतदाता, गुलजारनगर एक और गुलजार नगर दो में 1613 मतदाता, हरचन्दपुर कनौरा एक और दो में 1568 मतदाता, करेहटा एक 1545 मतदाता और बाबूबनारसीदासनगर एक और बाबूबनारसीदास नगर दो में 1450 मतदाता हैं।

कम मतदाता

शक्ति नगर एक और दो में केवल 481 मतदाता, मुरलीनगर में 636 मतदाता, गर्वमेंट प्रेस क्वाटर्र में 519 मतदाता, बहमनगर एक और बहमनगर दो में 544 और चाणक्यपुरी एक और कन्हैया कुंजबिहार में 639 मतदाता हैं।

कुछ आंकडे

वर्ष 2012 में 25 प्रत्याशी थे मैदान में

कुल मतदाता : 320755

पुरूष : 173,740

महिला : 146,998

डाक से हुए मतदान : 681

50 प्रतिशत मतदान

अब तक के विधायक

1957 श्याम मनोहर मिश्रा - कांग्रेस

1962 बालक राम वैश्य - कांग्रेस

1967 बीपी अवस्थी - निर्दलीय

1969 सच्चिदानंद - भारतीय क्रांति दल

1974 चरण सिंह - कांग्रेस

1977 कृष्णकांत मिश्रा- जनता पार्टी

1980 प्रेमवती तिवारी- कांग्रेस

1985 - प्रेमवती तिवारी - कांग्रेस

1989- प्रेमवती तिवारी- कांग्रेस

1991 सतीश भाटिया- बीजेपी

1993 सतीश भाटिया- बीजेपी

1996 सुरेश चंद्र तिवारी- बीजेपी

2002 सुरेश चंद्र तिवारी- बीजेपी

2007 सुरेश चंद्र तिवारी -बीजेपी

2012 रीता बहुगुणा जोशी- कांग्रेस

प्रमुख इलाके जिनकी ये हैं समस्याएं

आलमबाग

मेट्रो निर्माण के चलते यहां सडक के दोनों तरफ ठेले वालों ने जगह घेर ली है। लोगों के लिए यह प्रमुख बाजार भी है। जिससे यहां जाम लगा रहता है।

भोला खेड़ा

भोलाखेड़ा घनी आबादी वादा क्षेत्र है। स्कूल बस या ट्रक के आने से घंटों जाम लग जाता है। बारिश में जल भराव से लोग परेशान हो जाते हैं। वर्षों से इस समस्या का समाधान नहीं हो रहा।

कृष्णा नगर और बरगवां

दोनों क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बनी रहती है। यह समस्या यहां के विधान सभा चुनाव का प्रमुख मुददा होता है।

जातीय समीकरण

यहां सिंधी और उत्तराखण्ड के लोग अधिक संख्या में रहते हैं। जिसका फायदा भाजपा और कांग्रेस को मिलता है। पूर्वांचल के लोग यहां अधिक संख्या में रहते है जिसे देखते हुए सपा ने अर्पणा यादव को मैदान में उतारा है। लेकिन ब्राहम्ण मतदाता ही यहां का जातीय समीकरण बदलते रहे हैं।

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