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लखनऊ मेट्रो होगी बाकियों से अलग, बस कुछ ही पल दूर है फाइनल ट्रायल

Updated: IST lucknow metro
देखें Lucknow Metro के प्री ट्रायल का Exclusive विडियो

लखनऊ. लखनऊ मेट्रो का दीदार लखनऊ वासी करीब 11 बजे अवध चौराहे पर कर सकेंगे। मेट्रो के ट्रायल रन सीएम अखिलेश यादव हरी झंडी दिखा कर करेंगे। तय कार्यक्रम के मुताबिक सीएम पहले डिपो का लोकार्पण करेंगे और फिर अवध चौराहे पर एक सभा को संबोधित करेंगे। ट्रेल रन टीपी नगर से आलमबाग के बीच होगा। लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (एलएमआरसी) के अफसरों ने सोमवार देर रात प्री-ट्रायल के तौर पर मेट्रो चला दी थी। इस दौरान मेट्रो ट्रेन टीपी नगर डिपो में बने टेस्टिंग ट्रैक से सिंगार नगर स्टेशन (नहरिया चौराहे) के बीच दौड़ी। माना जा रहा है कि गुरुवार से शुरू होने वाले ट्रायल से पहले तैयारी के लिए एलएमआरसी अफसरों ने मेट्रो का सीक्रेट प्री-ट्रायल रन करवाया।

देखें प्री ट्रायल का विडियो -

सिग्नल की टेस्टिंग बाकी

लखनऊ मेट्रो के एमडी कुमार केशव ने बताया कि प्री-ट्रायल में सिर्फ ट्रेन चलाकर देखी गई। इसमें कम्युनिकेशन बेस्ड ट्रेन ऑपरेटिंग सिस्टम (CBTS) का ट्रायल नहीं हुआ। इसका ट्रायल बाद में होगा। प्रियॉरिटी रूट पर गुरुवार से शुरू होने वाला ट्रायल लखनऊ मेट्रो के लिए बेहद अहम है। ट्रायल शुभारंभ कार्यक्रम के लिए प्रियॉरिटी रूट पर काम करने वाले कर्मचारियों, इंजीनियरों के माता-पिता के साथ प्रियॉरिटी रूट में जमीन देने वाले 55 लोगों को विशेष आमंत्रण दिया गया है।

सीबीटीसी के तहत ऐसे होता है काम

सीबीटीसी के तहत ट्रेनों में सेंसर लगाए जाते हैं, जो दूसरी ट्रेनों व प्लेटफार्म पर लगे सेंसरों को रीड कर सकते है। इन सेंसर के ज़रिये ही मेट्रो का डायरेक्शन तय होता है और इसी के आधार पर ट्रेनें रिएक्ट करती हैं। ट्रेनों के आने जाने का समय भी इसी के ज़रिये निर्धारित किया जाता है। प्लेटफार्म पर लगे सेंसर में टाइम की सेटिंग कर दी जाती है जिससे ये सेंसर ट्रेन को मैसेज भेजता है। इट्रेनों के बीच में कम्युनिकेशन बनाने के लिए ट्रेनों से सेंसर लगाए जाते हैं जिससे दुर्घटना पर लगाम लगाई जा सकती है।

लखनऊ मेट्रो है ख़ास अलग

मौजूदा समय में भारत में दौड़ रही अन्य मेट्रो से लखनऊ मेट्रो काफी अलग होगी। लखनऊ मेट्रो में डिस्क ब्रेक होगा जिससे हाई एक्सेलेरेशन और एमर्जेन्सी ब्रेकिंग में फ़ायदा मिलेगा। साथ ही झटका भी कम लगेगा। लखनऊ मेट्रो का निर्माण ऐसा किया गया जिससे वियर एंड टियर काफी हद तक कम होगा। यानि आधुनिक खर्चे भी कम होंगे। इसमें हाईटेक कम्युनिकेशन बेस्ड सिस्टम मौजूद होगा।

मेट्रो के डिब्बे हैं ख़ास
-लखनऊ मेट्रो का डिजाईन कई हद तक बुलेट ट्रैन जैसा होगा।
-मेट्रो कोच में होंगेफायर फाइटिंग के पुख्ता इंतज़ाम।
-आग लगने पर सूचित करने के विशेष उपकरण।
-डिस्क ब्रेक के चलते कम लगेगा झटका।
-बिना ड्राइवर दौड़ेगी मेट्रो।

-ड्राइवर एरिया और कण्ट्रोल रूम से सीधा कोच की निगरानी होगी।

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