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Photo Icon BirthdaySpecial : नाना मंगल दास से बहुत प्रेम करती थीं मायावती, लकड़बग्घे से लड़ गईं थी

Updated: IST mayawati
अपने जन्मदिन पर मायावती प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगी साथ ही ब्लू बुक नमक पुस्तक का विमोचन करेंगी।

लखनऊ। कल यानि रविवार 15 जनवरी को बसपा सुप्रीमो मायावती अपनी 61वां जन्मदिन मनाने जा रही हैं। कल मायावती के जन्मदिवस पर कल्याणकारी दिवस का आयोजन होगा। लेकिन यह कार्यक्रम चुनाव अाचार संहिता के चलते यूपी, उत्तराखंड, पंजाब जैसे 5 राज्यों में नहीं होगा। अपने जन्मदिन पर मायावती प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगी साथ ही ब्लू बुक नमक पुस्तक का विमोचन करेंगी। आइये इनके बारे में कुछ खास बातें जानते हैं -

बसपा सुप्रीमो मायावती के बचपन का नाम चन्द्रावती था और इसी नाम से उनकी पढ़ाई-लिखाई हुई थी, लेकिन जब वे कांशीराम के संपर्क में आईं और सक्रिय राजनीति में भाग लेने लगीं तब कांशीराम ने उनका नाम मायावती रख दिया।

भाई को लेकर हॉस्पिटल दौड़ गईं मायावती

बात तब की जब मायावती की मां ने 3 बेटियों के बाद 1 बेटे को जन्म दिया था। उस समय मायावती 5वीं कक्षा में पढ़ती थीं। उनके भाई की जन्म के महज 2 दिन बाद ही भाई की हालत बिगड़ने लगी और उन्हें निमोनिया हो गया। पिता घर पर नहीं होने की वजह से मायावती ने एक हाथ में पानी की बोतल और दूसरे में भाई को लिया और हॉस्पिटल की ओर दौड़ लगा दी। रास्ते में जब भी मायावती का भाई रोता, वो उसे थोड़ा पानी पिलाकर चुप करा देतीं। उन्होंने भाई का इलाज करवाया और उसे लेकर वैसे ही वापस घर लौटीं। मायावती के हाथ में उसके भाई को हंसता देख उनकी मां की जान में जान आई।

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जब लकड़बग्घे से लड़ गईं मायावती

हम आपके बता दें की मायावती अपने नाना मंगल दास से बहुत प्रेम करती थीं। वे उन्हें अपना मार्गदर्शक व आदर्श मानती थीं। एक बार वे अपने नाना की गोदी में बैठी थीं, तभी उनकी नजर पास से गुजरते एक लकड़बग्घे पर पड़ी। उन्होंने अपने नाना से पूछा - ये कौन-सा जानवर है? इस पर उनके नाना ने कहा - ये लकड़बग्घा है। इससे दूर रहना, नहीं तो तुम्हें खा जाएगा। नाना के डराने पर मायावती ने कहा- ये क्या मुझे खाएगा। ये मुझे खाए उससे पहले मैं इसे खा जाऊंगी। इतना कहते ही मायावती नाना की गोद से कूदकर लकड़बग्घे के पीछे दौड़ गईं। वहीं, काम कर रहे किसानों ने उन्हें बीच में पकड़ा और लकड़बग्घे के पीछे जाने से रोका। मायावती का पूरा परिवार उनका साहस देख दंग था।

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डरपोक भी थीं मायावती

मायावती ने ग्रैजुएशन दिल्ली के कालिन्दी कॉलेज से किया। वो कोई सुपर-इंटेलिजेंट नहीं थीं। उन्होंने बीए थर्ड डिवीजन में पास किया था। उनके प्रोफेसर जेबी आनंद के मुताबिक, मायावती एक डरी-सहमी सी डरपोक स्टूडेंट थीं। कॉलेज में एडमिशन के टाइम उनकी उम्र महज 16 साल थी।

राजनीतिक सफर

मायावती के राजनितिक करियर से तो हम सभी वाकिफ हैं। वे लोक सभा के लिए पहली बार 1989 में निर्वाचित हुई। इसके बाद 1998 में दुबारा तथा 1999 में नेता, बहुजन समाज पार्टी संसदीय दल भी बनीं ।

· लोकसभा के लिए चौथी बार मई, 2004 में निर्वाचित (इस्तीफा-26 जून 2004 ) ।
· राज्यसभा के लिए पहली बार अप्रैल 1994 (इस्तीफा- 25 अक्टूबर, 1996)।
· राज्यसभा के लिए दूसरी बार जुलाई 2004 में निर्वाचित तथा नेता, बहुजन समाज पार्टी संसदीय दल, राज्य सभा भी बनीं (इस्तीफा- 5 जुलाई, 2007) ।
· सदस्य, निर्वाचित, उत्तर प्रदेश विधान सभा प्रथम बार 1996 ।
· सदस्य, निर्वाचित, उत्तर प्रदेश विधान सभा दूसरी बार 2002 (इस्तीफा-20 अगस्त, 2003 ) ।
· मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश प्रथम बार 3 जून, 1995 से 18 अक्टूबर,1995 ।
· मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश दूसरी बार 21 मार्च, 1997 से 20 सितम्बर, 1997 ।
· मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश तीसरी बार 3 मई, 2002 से २९ अगस्त, 2003 ।
· मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश चौथी बार 13 मई, 2007 से 15 मार्च, 2012
· सदस्य निर्वाचित, उत्तर प्रदेश विधान परिषद् प्रथम बार, 29 जून, 2007 तथा दूसरी बार 7 जुलाई 2010 ।
· बहुजन समाज पार्टी की उपाध्यक्ष रहीं और अब अध्यक्ष हैं ।

ये हैं विदेश यात्राएं

मायावती ने अपने जीवन में विभिन्न यात्राएं की जैसे- कनाडा (टोरण्टो), डेनमार्क, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, स्विटजरलैण्ड (ज्यूरिच), ताइवान, यूके (लंदन और वाल्वर हैम्पटन), यूएसए (आरलैण्डो, वाशिंगटन और न्यूयार्क)

ये हैं इनकी प्रकाशित पुस्तक

"बहुजन समाज और उसकी राजनीति" नामक पुस्तक अक्टूबर 2000 में (हिन्दी में) तथा इसका अंग्रेजी संस्करण अक्टूबर 2001 में प्रकाशित।
"मेरा संघर्षमय जीवन एवं बहुजन मूवमेंट का सफरनामा" भाग-1 व भाग-2 जनवरी, 2006 में प्रकाशित (अब तक 4 खण्ड प्रकाशित)।

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