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UP Election 2017

मुलायम ने अखिलेश पर लगाए गंभीर आरोप, कहा- हलफनामे पर कई मुर्दों के साइन!

Updated: IST mulayam singh yadav
चुनाव आयोग के सामने मुलायम ने खोला बहुत बड़ा राज़, अखिलेश के हरफनामें में कई मुर्दों के साइन।

लखनऊ.समाजवादी पार्टी में इस वक्त घमासान चल रहा है। सपा प्रमुख मुलायाम सिंह यादव और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इस वक्त चुनाव आयोग में यह साबित करने के लिए जुटे हुए हैं कि उनका गुट असली समाजवादी पार्टी है। मुलायम और अखिलेश दोनों ही लोगों के गुट चुनाव चिन्ह साइकिल को लेकर अपना दावा ठोंक रहे हैं। साइकिल किसकी होगी, फिलहाल अभी इस पर से पर्दा उठना अभी बाकी है, लेकिन चुनाव आयोग में सुनवाई के दौरान दोनों गुटों की दलीलें सुनकर यह तो साफ हो गया कि दोनों खेमों के बीच कड़वाहट काफी बढ़ चुकी है। मुलायम सिंह यादव भले ही मीडिया में अखिलेश के लिए नरम रुख अपना रहे हों, लेकिन आयोग में सुनवाई के दौरान वह किसी हाल में पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

हलफनामे में मुर्दों के साइन

एक अंग्रेजी अखबार में छपी खबर के मुताबिक चुनाव आयोग में सुनवाई के दौरान मुलायम खेमे के वकील काफी आक्रामक रुख अपनाए हुए थे। मुलायम के वकीलों ने सुनवाई के दौरान अखिलेश यादव के दावों और आयोग में अखिलेश यादव खेमे की तरफ से पेश की गई हलफनामे की प्रमाणिकता पर गंभीर सवाल उठाए। मुलायम गुट ने आयोग में कहा कि अखिलेश यादव के दावों के समर्थन में जा हलफनामे पेश किए गएं है, उनपर कई ऐसे लोगों के साइन हैं जो अब इस दुनिया में हैं ही नहीं। साथ ही कई ऐसे लोगों के भी साइन हैं जो आईसीयू में भर्ती हैं और कोमा में हैं। मुलायम खेमे ने यह भी कहा कि अखिलेश खेमे ने जो हलफनामे पेश किए हैं उनपर कई जगह हेल्ड (held) शब्द की जगह हेल्प (help) लिखा है, जो यह बताता है कि हलफनामे को कहीं से चोरी कर बनाया गया है। साथ ही अखिलेश खेमे ने जो इतनी तादाद में कागजात जमा किए हैं उसका मकसद यह है कि आयोग इन्हें जांचनें में ज्यादा समय लगाए जिससे इन्हें भी तैयारी के लिए समय मिल जाए।

सिब्बल रख रहे हैं अखिलेश का पक्ष

समाजवादी पार्टी में चल रहे घमासान में गेंद अब चुनाव आयोग के पाले में है। आयोग को फैसला करना है कि चुनाव चिन्ह साइकिल का क्या करना है। दोनों ही पक्ष साइकिल पर अपना दावा ठोंक रहे हैं।अखिलेश गुट ने सीनियर वकील कपिल सिब्बल को अपना पक्ष रखने के लिए रखा है। वहीं उनके सामने हैं सीनियर वकील मोहन पराशरन। मोहन भारत के सॉलिसिटर जनरल हैं वहीं कपिल सिब्बल कांग्रेसी नेता होने के साथ-साथ मनमोहन सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं।

ये हैं संभावनाएं

सपा और साइकिल पर अगर आयोग अगर अखिलेश खेमे का दावा मान लेता है तो मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक जीवन के लिए ये बड़ा झटका होगा। वहीं अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी के सबसे बड़े नेता बनकर उभरेंगे और मुलायम सिंह महज संरक्षक की भूमिका में आ जाएंगे। चुनाव में टिकट भी अखिलेश की मर्जी से दिये जाएंगे और शिवपाल यादव की पार्टी संगठन से पकड़ खत्म हो जाएगी। वहीं अगर आयोग से मुलायम को जीत मिलती है तो ये अखिलेश यादव के लिए बड़ा झटका होगा। उसके बाद उन्हें या तो वही उम्मीदवारों की पुरानी लिस्ट माननी होगी या बागी होकर अपनी अलग पार्टी और निशान के साथ चुनाव मैदान में उतरना होगा। वहीं अगर चुनाव आयोग साइकिल सिंबल को फ्रीज कर देता है तो ऐसे में अखिलेश और मुलायम दोनों खेमा अलग-अलग चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में उतरेगा।

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