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मुलायम-अखिलेश अपनाएंगे नया सिंबल, तो क्या होगा साईकिल का?

Updated: IST Samajwadi Party
इस चुनावी संग्राम में चुनाव चिन्ह की अहमियत पर भी सवाल उठ रहे हैं।

लखनऊ. समाजावदी पार्टी में चल रही अंतरकलह शांत होगी या नहीं इसका फैसला कोई नहीं कर पा रहा है। वहीं आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है। इसी कड़ी में अब लोकदल के अध्यक्ष सुनील सिंह भी शामिल हो गए हैं। उन्होंने साफ शब्दों में अखिलेश यादव खेमें के नेता रामगोपाल यादव पर निशाना साधते हुए कहा है कि वो मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के बीच लड़ाई करवा रहे हैं। सुनील सिंह ने कहा है कि हम चाह रहे है कि मुलायम सिंह यादव हमारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनें। मुलायम सिंह यादव हमारे नेता हैं। वहीं चुनाव चिन्ह पर निर्वाचन आयोग का फैसला हमें मंजूर होगा।

क्या होगा 'साईकिल' का

इस चुनावी संग्राम में चुनाव चिन्ह की अहमियत पर भी सवाल उठ रहे हैं। साईकिल किसकी होगी और किसकी नहीं, ये सवाल तो बड़ा है। लेकिन अंत में जिसे भी मिले उसे क्या वाकई में बड़ा फायदा मिलेगा? मुलायम-अखिलेश के बीच जारी सियासी जंग को देखते हुए चुनाव चिह्न की कोई खास अहमियत रह जाएगी?

देखा जाए तो परिस्थितियां बदल चुकी हैं खासतौर पर मुलायम सिंह यादव के लिहाज से। उनकी पार्टी में दो फाड़ हो चुका है। जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता लगातार कम हो रही है। और अगर ऐसे में उन्हें साइकिल का सिंबल मिल भी जाए तो ये उम्मीद करना कि चुनाव में किसी तरह का उन्हें चुनावी फायदा होगा, वो बेईमानी होगी।

वहीं अखिलेश तो पहले ये निर्णय ले चुके हैं कि अपनी राजनीतिक पूंजी बढ़ाने के लिए वो परिवार की सियासी विरासत से उधार नहीं लेंगे। वो पुरानी समाजवादी पार्टी के साथ कतई चलना नहीं चाहते, क्योंकि उन्हें लगता है कि उन्हें इससे नुक्सान पहुंचेगा।

उनके खेमें के नेता रामगोपाल यादव उनकी इसी नीती का प्लान तैयार कर रहे हैं। जिसमें मोटरसाईकिल उनका नया चुनाव चिन्ह होगा। वहीं मुलायम खेमें में भी दूसरे विकल्पों की तलाश की जा रही है और बताया जा रहा था कि ‘खेत जोतता किसान’ को मुलायम सिंह यादव अपना सकते हैं। लोकदल के अध्यक्ष सुनील सिंह भी कह चुके हैं कि वो इस मामले में अमर सिंह और शिवपाल यादव से पहले से ही संपर्क में थे। अब ऐसे में 'साईकिल' का क्या होता है, ये देखना बाकी है।

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