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मां-बाप की दया ही आपको दिलायेगी घर, हाईकोर्ट के फैसले पर लखनऊ के लोगों की राय 

Updated: IST old person
रिलेशन सौहार्दपूर्ण है तभी बेटा पैरेंट्स की मर्जी से रह सकता है। यानी पैरंट्स की खुद कमाई गई संपत्ति में बेटे का कोई अधिकार नहीं है।

लखनऊ। दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि मां-बाप की कोई जिम्मेदारी नहीं है कि वे अपने बच्चे को जीवनभर अपनी अर्जित संपत्ति में रहने दें। इसका दारोमदार इस बात पर है कि पैरंट्स के साथ उनके बेटे का रिलेशन कैसा है। अगर रिलेशन सौहार्दपूर्ण है तभी बेटा पैरेंट्स की मर्जी से रह सकता है। यानी पैरंट्स की खुद कमाई गई संपत्ति में बेटे का कोई अधिकार नहीं है।

पत्रिका ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर लखनऊ के लोगों की राय जानने की कोशिश की।

- पीस पार्टी की प्रभारी नाहिदा अकील ने कहा कि हाईकोर्ट ने बड़े सोच-विचार के साथ अच्छा फैसला लिया है। तमाम केसेज में देखने को मिलता है कि माँ-बाप के बूढ़े होने के बाद बच्चों की ओर से कही उन्हें घर से निकाल दिया जाता है तो कही अन्य तरीके से प्रताड़ित किया जाता है। ऐसे में इन केसेज पर रोक लगेगी।

- कैंसर बच्चों के लिए काम करने वाली सपना उपाध्याय का कहना है कि हाईकोर्ट के फैसला सराहनीय है। इस फैसले से माँ-बाप का बुढापा सुकून से गुजरेगा। क्योंकि हर इंसान के जीवन में बुढापा जरूर आता है।

- प्राइवेट सेक्टर में जॉब कर रहे प्रदीप सिंह ने कहा कि अच्छा फैसला है, इससे नालायक बेटों को सबक मिलेगा और उन्हें मजबूरी में ही सही माँ-बाप की सेवा करनी पड़ेगी।

- आईटी सेक्टर में कार्यरत जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस फैसले से युवाओं में घट रहा इन्डियन कल्चर को बढ़ावा मिलेगा।

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