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बच्चों में बढ़ रहा है ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा, इस डॉक्टर ने हिंदी में लिखी बीमारी पर पहली 'बुक'

Updated: IST osteoporosis
इस बीमारी को समझने के लिए केजीएमयू के बाल अस्थि शल्य चिकित्सा विभाग के हेड प्रो. अजय सिंह ने अपने लंबे अनुभव के आधार पर हिंदी और अंग्रेजी भाषा में दो पुस्तकें लिखी हैं। जिसमें बीमारी के लक्षण, इलाज सहित तमाम जानकारियां मौजूद हैं।

लखनऊ। ऑस्टियोपोरोसिस यानी शरीर में हड्डियों का कमजोर होना अब बूढ़े लोगों की समस्या नहीं रही बल्कि ये समस्या अब बच्चों में तेजी से बढ़ने लगी है। इस बीमारी को समझने के लिए केजीएमयू के बाल अस्थि शल्य चिकित्सा विभाग के हेड प्रो. अजय सिंह ने अपने लंबे अनुभव के आधार पर हिंदी और अंग्रेजी भाषा में दो पुस्तकें लिखी हैं। जिसमें बीमारी के लक्षण, इलाज सहित तमाम जानकारियां मौजूद हैं। अंग्रेजी में लिखी पुस्तक का नाम Bone Repair & Regeneration : An insight और हिंदी की पुस्तक का नाम ऑस्टियोपोरोसिस है। इस पुस्तक को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान ने प्रकाशित किया है।

पुस्तक के कुछ अंश

- प्रत्येक वर्ष 20 अक्टूबर को विश्व ऑस्टियोपोरोसिस दिवस मनाते हैं। यह दिवस राष्ट्रीय ऑस्टियोपोरोसिस सोसाइटी इंग्लैंड और यूरोपीय कमीशन के सहयोग से 20 अक्टूबर 1996 से मनाया जा रहा है।

- आम भाषा में ऑस्टियोपोरोसिस को खोखली हड्डी की बीमारी बताया जाता है। सामान्य रूप से ऐसा माना जाता है कि यह बीमारी 40 से 45 वर्ष के वयस्कों में पायी जाती है लेकिन ये सच बात नहीं है। बच्चों में होने वाली ऑस्टियोपोरोसिस को बाल्यावस्था ऑस्टियोपोरोसिस कहते हैं। बच्चों में यह दो प्रकार से होती है -

- प्राथमिक (जिसकी कोई वजह न हो )अथवा किसी अन्य कारण से ऑस्टियोपोरोसिस का होना। प्रायः बच्चों में किसी वजह का मिल पाना संभव नहीं होता है। इस बीमारी के बच्चे आमतौर पर कमर दर्द, कूल्हों का दर्द, कूल्हों का दर्द एवं पैरों में दर्द की शिकायत करते हैं। जिससे उनके चलने-फिरने में परेशानी होती है।

- सामान्य जांचें इस प्रकार के दर्द की कोई वजह नहीं बन पाती हैं। ऐसे बच्चों को ऑस्टियोपोरोसिस का संदेह लगते हुए यदि बीएमडी डेक्सा (एक प्रकार की जांच) कराया जाय तो इस बीमारी का पता चल सकता है। विशेष बात यह है कि नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ हेल्थ यूके एवं डब्ल्यूएचओ ने वयस्कों में बीएमडी डेक्सा के जो मापदंड जो इस बीमारी के निदान के लिए बताये हैं, वह इससे पीड़ित बच्चों पर लागू नहीं हो सकते।

बच्चों के ऑस्टियोपोरोसिस के उपचार में ध्यान देने योग्य बातें

- बच्चों में ऑस्टियोपोरोसिस सिर्फ बीएमडी से नहीं करना चाहिए।

- बच्चों की कमर की हड्डी बिना किसी विशेष चोट के पिचक जाती है तो बीएमडी द्वारा इस बीमारी की जांच करनी चाहिए तथा बच्चों में विशेष मानकों द्वारा इस बीमारी की पुष्टि की जानी चाहिए।

- यदि कोई बच्चा बिना किसी वजह के हाथ एवं पैर में दर्द की शिकायत करे तो भी बीएमडी के विशेष मानकों द्वारा ऑस्टियोपोरोसिस की पुष्टि की जानी चाहिए।

-ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता धूम्रपान करते हैं तथा लेड के अत्यधिक मात्रा के प्रभाव में होते हैं। ऐसे बच्चों को इस बीमारी का खतरा अधिक होता है।

-ऐसे बच्चे जो एक वर्ष से कम के हैं उनको कैल्शियम के साथ-साथ 400 IU विटामिन डी देना चाहिए। एक वर्ष से अधिक के बच्चों में विटामिन डी की यह मात्रा 600 IU प्रतिदिन होनी चाहिए। बच्चों में इस बीमारी के खतरे को कम करने के लिए नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन एवं सूरज की रोशनी लेना बहुत आवश्यक है।

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