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केवल प्लेटलेट्स काउंट के आधार पर डेंगू का इलाज कर रहे हैं निजी अस्पताल

Updated: IST Dengue
उन्होंने बताया कि इस बारे में उन्होंने जांच में भी पाया कि निजी अस्पताल केवल प्लेटलेट्स काउंट बताकर डेंगू की पुष्टि कर देते हैं और मरीज में भय पैदा करते हैं।

लखनऊ। प्रदेश में डेंगू के बढ़ते प्रकोप के चलते प्राइवेट अस्पतालों की चांदी है। ये अस्पताल फर्जी प्लेटलेट्स काउंट बताकर मरीज को भर्ती करते हैं और डेंगू के इलाज के नाम पर मरीजों के परिजनों से मोटी उगाही कर रहे हैं।

दरअसल निजी अस्पतालों की ओर से पैथोलॉजी सेण्टर पर पहले ही सेटिंग कर ली जाती है और जांच में जानबूझकर प्लेटलेट्स काउंट कम दिखाया जाता है ताकि मरीज के अंदर भय बनाया जा सके। निजी अस्पतालों में केवल कार्ड टेस्ट की सुविधा है लेकिन इसके बावजूद अस्पताल एलाइजा न कराकर केवल कार्ड टेस्ट के दम पर डेंगू का इलाज कर रहे हैं।

एक एलआईयू अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि लगातार दो दिन बुखार आने के बाद उन्होंने इंद्रानगर स्थित एक निजी पैथोलॉजी सेण्टर में डेंगू की जांच करवाई। जिसमें प्लेटलेट्स काउंट 30 हजार से नीचे दिखाया गया और डेंगू होने की बात कही गयी। इसके बाद जब उन्होंने सरकारी अस्पताल में कार्ड टेस्ट करवाया तो डेंगू नहीं निकला। बस डॉक्टर ने वाइरल फीवर की दवा दी और वह ठीक हो गये। उन्होंने बताया कि इस बारे में उन्होंने जांच में भी पाया कि निजी अस्पताल केवल प्लेटलेट्स काउंट बताकर डेंगू की पुष्टि कर देते हैं और मरीज में भय पैदा करते हैं।

इसके अलावा मुंशी पुलिया निवासी रितेश(15) को तीन दिन से बुखार आ रहा था। जिसके बाद परिजनों ने कपूरथला स्थित एक निजी पैथोलॉजी सेण्टर पर जांच कराई जिसमें प्लेटलेट्स काउंट 35 हजार निकला। जिसके बाद वहां मौजूद कर्मचारियों ने डेंगू होने की बात कहकर परिजनों को मरीज की गंभीर हालत बताते हुए तुरंत अपने जानने वाले एक निजी अस्पताल ले जाने का दबाव बनाने लगे लेकिन शिक्षित परिजनों ने बलरामपुर अस्पताल में जब जांच करवाई तो रितेश को डेंगू की पुष्टि नहीं हुई।

प्लेटलेट्स काउंट कम होने से न घबराएं

इस बारे में केजीएमयू के उपचिकित्सा अधीक्षक डॉ. वेदप्रकाश ने बताया कि वाइरल फीवर में प्लेटलेट्स काउंट कम होना स्वाभाविक है। इसका मतलब ये नहीं है कि मरीज को डेंगू हुआ है। प्लेटलेट्स काउंट कम होने पर मरीज को घबराना नहीं चाहिए। डेंगू का इलाज एलाइजा जांच में पुष्टि होने के बाद ही शुरू करना चाहिए। मीडिया को भी डेंगू के प्रति समाज में जागरूकता जगानी चाहिए न कि डर पैदा करना चाहिएइससे अस्पतालों में वीवीआईपी कब्जा कर लेते हैं और जिस गरीब आदमी को वाकई में इलाज की जरूरत है, वह मौत की चपेट में आ जाता है

डेंगू से बचाव

तेज बुखार और शरीर के जोड़ों में तेज दर्द हो या शरीर पर चकत्ते हों तो पहले दिन ही डॉक्टर की सलाह पर डेंगू का टेस्ट करा लेना चाहिए। लगातार दो दिन तक तेज बुखार आने के बाद फिजिशियन के पास जरूर जाएं। शक होने पर डॉक्टर डेंगू की जांच कराएगा।

डेंगू की जांच के लिए शुरुआत में एंटीजन ब्लड टेस्ट (एनएस 1) किया जाता है। इस टेस्ट में डेंगू शुरू में ज्यादा पॉजिटिव आता है, जबकि बाद में धीरे-धीरे पॉजिविटी कम होने लगती है। अगर तीन-चार दिन के बाद टेस्ट कराते हैं तो एंटीबॉडी टेस्ट (डेंगू सिरॉलजी) कराना बेहतर है। डेंगू की जांच कराते हुए वाइट ब्लड सेल्स का टोटल काउंट भी जरूर चेक करें।

ये रखें सावधानी

-समय-समय पर कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें।

- कूलर में पानी जमा न होने दें। एयरकंडीशन से टपकने वाले पानी को जमा न होने दें।

- खिड़कियों व दरवाजों में जाली जरूर लगवाएं।

- फुल बाजू की शर्ट पहनें, मच्छरदानी में सोएं।

- घरों के आसपास खुले गड्ढों में मिट्टी भर दें।

नीम की गिलोय है डेंगू में फायदेमंद

बलरामपुर अस्पताल के आयुर्वेद डॉक्टर निरंजन ने बताया कि डेंगू में नीम के पेड़ पर उगने वाली गिलोय फायदेमंद हो सकती है। गिलोय की छड़ को लेकर इसे गर्म पानी में खूब उबालें और बाद में ठंडा हो जाने पर इसे दिन में कई बार पिलायें। इससे डेंगू रोगी को लाभ होता है। कई आयुर्वेदिक कंपनियों गिलोय का पाउडर भी मार्केट में उपलब्ध है

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