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कैराना की रिपोर्ट केवल छह परिवारों के बयान के आधार पर

Updated: IST ajit
राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष अजीत सिंह का कहना है कि कैराना मामले की रिपोर्ट केवल छह परिवारों के बयान के आधार पर है इसलिए इसका कोई मतलब नहीं। । इस मामले में हुकुम सिंह ने 346 परिवारों के पलायन की बात की थी।

लखनऊ. राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष अजीत सिंह का कहना है कि कैराना मामले की रिपोर्ट केवल छह परिवारों के बयान के आधार पर है इसलिए इसका कोई मतलब नहीं। इस मामले में हुकुम सिंह ने 346 परिवारों के पलायन की बात की थी। हाल ही में इसको लेकर एनएचआरसी की रिपोर्ट भी आई है। कार्यकर्ताओं के सम्मेल में हिस्सा लेने लखनऊ पहुंचे अजीत ने यह बात कही।

अकेले चुनाव लड़ेंगे

आगामी विधानसभा में किसी पार्टी के साथ गठबंधन करने के सवाल पर वह बोले की फिलहाल के समीकरणों को देखते हुए वह किसी के साथ गठबंधन नहीं करेंगे। रालोद उनके बेटे और पार्टी महासचिव जयन्त चैधरी को चेहरा बनाकर चुनाव मैदान में उतरेगी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी प्रदेश का आगामी विधानसभा चुनाव अपने बलबूते पर ही लड़ेगी और वह मध्य के इलाकों तथा पूर्वांचल में भी अगले अक्तूबर-नवम्बर में सात-आठ रैलियां करके माहौल बनाएगी।

तीनों मुख्यमंत्री नहीं ले रहे भ्रष्टाचार की जिम्मेदारी

सिंह ने कहा कि प्रदेश में पूरी तरह से अराजकता फैली हुई है। उन्होंने कहा प्रदेश के सुपर सीएम, सीनियर सीएम और जूनियर सीएम यह कहते हैं कि उनके मंत्री भ्रष्ट हो चुके हैं, लेकिन इन हालात की जिम्मेदारी इनमें से कोई भी नहीं लेना चाहता। मुलायम सिंह यादव परिवार में छिड़ी जंग को उत्तराधिकार की लड़ाई करार देते हुए उन्होंने कहा कि यह उत्तराधिकार की लड़ाई है। यह इस बात का संघर्ष है कि विधानसभा चुनाव के बाद सपा पर कौन कब्जा करेगा। सिंह ने चुटकी लेते हुए कहा कि मुलायम परिवार जिन राम मनोहर लोहिया के आदर्शों पर चलने का दावा करता है, वे परिवारवार के सख्त खिलाफ थे। ऐसे में समाजवादी परिवार का क्या मतलब है।

चौधरी साहब की योजनाओं का प्रचार कर रहे राहुल

प्रदेश में जारी कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की किसान यात्रा पर उन्होंने कहा कि सिर्फ रालोद ही गांव, गरीब और किसान की पार्टी है। जमींदारी उन्मूलन, चकबंदी कार्यक्रम और किसानों को सब्सिडी की तमाम योजनाएं चौधरी चरण सिंह ने ही चलायी थीं।

पिछड़ा व अतिपिछड़ा वर्ग को लुभाने की कोशिश

लखनऊ स्थित आरएलडी कार्यालय में गुरुवार को पूर्वी उत्तरप्रदेश के पिछड़ा व अतिपिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधियों का सम्मेलन आयोजित किया गया। इस लिहाज से आरएलडी की नजर अब पिछड़ा व अतिपिछड़ा वर्ग के वोटबैंक पर है। उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ा 40% वोट बैंक पिछड़ा वर्ग का है। इसमें सात फीसदी वोट जाटों का है लेकिन पश्चिम यूपी की आबादी के हिसाब से जाटों की संख्या 15 फीसदी होने के कारण वे वहां निर्णायक की भूमिका में रहते हैं। जाट वोट बैंक का कुछ हिस्सा आरएलडी के पास है और कुछ हिस्सा बीजेपी के पास। 2014 से पहले आरएलडी के पास जाटों के साथ ही मुस्लिम वोट बैंक था, जिसके बल पर पश्चिम में आरएलडी मजबूत स्थिति में रहती थी, लेकिन मुजफ्फरनगर कांड के बाद मुस्लिम वोट बैंक जाटों से दूर हुआ माना जा रहा है। राजनैतिक जानकारों का कहना है कि पश्चिमी यूपी में फिर परचम लहराने के लिए आरएलडी के लिए जरूरी है कि वह जाटों के साथ किसी अन्य वोट बैंक को भी अपने से जोड़े।

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