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पिता-पुत्र की लड़ाई में सपा के बड़े बड़े लड़ाकों ने मान ली हार

Updated: IST Samajwadi Party
पारिवारिक संघर्ष में दर्द हो रहा है चाहने वालों को

अनिल के. अंकुर
लखनऊ।
वर्ष 2012
माह- मार्च
स्थान- लखनऊ विधानसभा
बहुमत से ज्यादा समाजवादी पार्टी को एक तरफा 224 विधायक मिले।
सीएम बने सपा मुखिया मुलायम सिंह के पुत्र अखिलेश यादव।
इसे शायद वक्त की नजाकत कहें या तकदीर की इबादत- जो पार्टी यूपी में बेहिसाब बहुमत से राज कर रही थी वह पांच साल आते आते हासिए पर आ गई। अब स्थिति यह बन गई है कि सपा के बड़े-बड़े लड़ाके हार मानने लगे हैं। अब वे यह मानने लगे हैं कि यूपी में वे 100 का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाएंगे।

पुत्र की जिद्द के आगे काफी कमजोर दिखाई देने लगे हैं मुलायम
बार बार संघर्ष करके सत्ता हासिल करने वाले सपा के सबसे बड़े योद्धा मुलायम सिंह यादव की ललकार अब कोई नहीं सुन रहा। एक जमाना था कि 1990-91 में जब वे यूपी के सीएम थे तो उन्होंने कहा कि अयोध्या में परिंदा भी पर नहीं मार पाएगा। तो ऐसा उन्होंने कर भी दिखाया। अब उनका बेटा भी उनकी नहीं सुन रहा है। इसी बेटे को उन्होंने पांच साल पहले बिना विधायकों की राय लिए मुख्यमंत्री की गद्दी सौंपी थी। यह योद्धा अब कितना कमजोर और लाचार हो गया है यह उनके दो दिन पहले लखनऊ में कार्यकर्ताओं के बीच दिए गए बयान से जाहिर होता है। उन्होंने कहा-मेरे पास बचा ही क्या है? सब कुछ तो हमने बिना किसी से पूछे उसको सौंप दिया। हम बात करेंगेे। वह मान जाएगा। तमाम बिखरे दलों को एक करने वाले मुलायम आज अपने परिवार में ही बिखरे दिखाई दे रहे हैं। मन से मुलायम और फैसले में कठोर के जुमले से मशहूर मुलायम वाकई अपने पुत्र की जिद्द के आगे काफी कमजोर दिखाई देने लगे हैं।

साईकिल की ब्रांडिंग हो गई बेकार
पिछले दो दशकों से मुलायम सिंह यादव साईकिल चुनाव चिह्न को लेकर जितने आगे बढ़ गए थे उतने ही अब पीछे होते दिख रहे हैं। ऐसा नहीं कि अखिलेश यादव को इसका लाभ मिलेगा। अखिलेश सरकार ने भी साईकिल बाटने से लेकर साईकिल पथ इसलिए बनवाए ताकि लोगों के दिलो-दिमाग में साईकिल बैठ जाए। साईकिल चुनाव चिह्न अब चुनाव आयोग के आदेश पर निर्भर करता है कि वह इन दोनों में से किसे मिलेगा-पिता को या पुत्र को। अभी विवाद यह चल रहा है कि पार्टी का असली अध्यक्ष कौन है। जो असली अध्यक्ष होगा वही चुनाव चिह्न बाटेगा।

बहुत मायूस हो गए हैं समाजवादी कार्यकर्ता
समाजवादी कुनबे में पिता पुत्र की लड़ाई चरम पर है । अब हालत यह है कि पिता मुलायम सिंह यादव और पुत्र अखिलेश यादव कोर्ट पहुंच गए हैं। इन दोनो की लड़ाई से सबसे ज्यादा दुखी हैं तो उनके चाहने वाले। उन्हें लग रहा था कि अगले पांच साल फिर से वे अपने समाजवादी नेताओं के साथ फिर सत्ता में राज करेंगे, लेकिन अब इस पर सवालिया निशान लगने गले हैं। सपा मुख्यालय पर लोग दो खेमों में बटे हुए दिखते हैं कुछ मुलायम के साथ तो कुछ अखिलेश के साथ। पर सबके चेहरे पर मायूसी है। जहां हर पार्टी में झंडे बैनरों की दुकानों पर भीड़ लगी हुई है वहीं सपा मुख्यालय के सामने लगी एक दर्जन दुकानें बंद हो गई हैं। दुकानदारों का करबी सवा करोड़ रुपए का माल बर्बादी की कगार पर है। वे पहले से ही साइकिल और अखिलेश मुलायम के झंडे बैनर छपवा चुके थे। अब ये दुकानदार आयोग के आदेश का इंतजार कर रहे हैं।

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