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मुलायम कुनबे में रार ! नहीं भा रहा गीत, पापा कहते हैं बेटा बड़ा नाम करेगा...

Updated: IST Mulayam Singh Yadav
समाजवादी पार्टी में सब अपनी-अपनी ढपली लेकर अपना-अपना सुर ताल निकाल रहे हैं...

लखनऊ. वर्ष 2012 में अखिलेश यादव की अपार सफलता के बाद मुलायम सिंह यादव की जुबान से ये गीत जरूर निकला होगा, 'बेटा हमारा बड़ा नाम करेगा।' फिर अखिलेश ने भी अपनी तेज रफ्तार में ये गीत गुनगुनाया कि पापा कहते हैं बेटा हमारा बड़ा काम करेगा। तीन साल तक बजने वाला ये गीत अब नहीं भा रहा है। इस परिवार में न कोई इस गीत को सुनने को तैयार है और न कोई गाने को। सब अपनी-अपनी ढपली लेकर अपना-अपना सुर ताल निकाल रहे हैं।

सपा परिवार का सबसे होनहार कहा जाने वाला बालक अचानक इनता क्रांतिकारी क्यों हो गया। उसने अपने पिता और चाचा के खिलाफ ये बगावती रुख क्यों अख्तियार किया। इसका सीधा सा जवाब तो मनोचिकित्सक ही दे सकते हैं। लखनऊ के चिकित्सा विश्व विद्यालय के मनोचिकित्सकों की मानें तो युवा वर्ग ये क्रांति तब करता है जब उसके परिवार के या नजदीकी लोग उसकी हर बात पर उसे टोकने लगते हैं। बड़े ओहदे के बाद भी उनके अधीन काम करने वाले उनके रिश्तेदार सामूहिक रूप से यह कह देते अभी वह बच्चा है। टीवी शो के कार्यक्रम में अखिलेश के एक चाचा से जब यह सवाल किया गया कि आपने इनके पिता मुलायम के साथ काम किया और अब उनके बेटे के साथ मंत्रिमंडल में हैं तो दोनों में क्या फर्क है। इस पर उनके चाचा का जवाब था कि अखिलेश के पिता मुलायम से वे सीखते थे और अखिलेश को उन्हें सिखाना पड़ता है।

किसी भी कार्यालय अथवा संस्था में अगर उसका विभागाध्यक्ष नई उम्र का आ जाए तो क्या उसके बुजुर्ग अधीनस्थ उसकी बात नहीं मानेंगे। उसे बच्चे की तरह ट्विट करेंगे। इसका सीधा सा उत्तर है नहीं। बॉस बॉस होता है, चाहे वह जितनी भी छोटी उम्र को भले क्यों न हो। इसी प्रकार की गलती हुमायुं के खास वजीर बैरमखां ने की थी। अकबर को वे हमेशा बच्चा ही मानते रहे। चाचा बैरम खां की इस सोच से अकबर बहुत ही उद्वैलित होता गया। ऐसा ही कुछ यूपी में होता दिखा। बेटे ने पिता और चाचा से बगावत के लहजे में जो किया वह सर्व विदित है, लेकिन किसी ने यह जानने की काशिश की कि आखिर वह क्या चाहता है। पत्रकारों ने भी सवाल किए तो परिवार को लड़ने वाले।

अब देखिए बेटे ने क्या किया। यूपी में अपनी घोषणा के अनुरूप विधवा पेंशन दी, लैपटॉप बाटे, टैबलेट दिए। किसानों के कर्ज माफी के आदेश दिए। शहरों को विकसित करने के लिए चार बड़े नगरों में मेटो की योजना दी। एशिया का सबसे बड़ा एक्सप्रेस वे बनवाया। सीजी सिटी और लाइट की पहले से बेहतर व्यवस्था दी। फिर भी परिवार में वह बच्चा ही गिना जाए तो विद्रोही स्वर निकलना वाजिब है। अब तमाम चाचाओं और पुराने मि़त्रों के हस्तक्षेप के बाद परिवार फिर से गाना गाने के दिन आते दिख रहे हैं। देखना है कि अब यह गाना कौन गाएगा कि पापा कहते हैं बेटा हमारा बड़ा नाम करेगा...।

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