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UP Election 2017

स्वर्णिम भविष्य की चाह में उठा कदम पड़ा उल्टा, शान तो गई नाम भी डूबा

Updated: IST BJP
सुरक्षित ''ठिकानों'' के लिये पाला बदलने वाले ये नेता आज हो गए गुमनाम

अनिल के अंकुर
लखनऊ. भाजपा में ऐसे तमाम नेता शामिल होने के बाद गायब हो गए हैं जो अपनी मूल पार्टियों में रोज सुर्खियों में रहते थे। वेबसाइट और सोशलमीडिया में आकर्षण का केन्द्र रहा करते थे। अब पार्टियां बदलने के बाद उनका पता ही नहीं चल रहा है। आखिर वे क्या कर रहे हैं और किस तरह से अपने आपको सक्रिय बनाए हुए हैं, यह बात इन दिनों राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।

इनमें कोई ऐसा नाम नहीं है जिन्हें जनता जानती नहीं है, बल्कि लम्बी राजनीति करने वाले इन नेताओं में नामी गिरामी लोग हैं। इनमें अगर देखा जाए तो विधानसभा में बहुजन समाज पार्टी के नेता प्रतिपक्ष रहे स्वामी प्रसाद मौर्य, बसपा के नेता और सांसद रहे बृजेश पाठक, कांग्रेस की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगणा जोशी समेत अनेक नेता शामिल हैं।

दरअसल पिछले दिनों इन नेताओं ने अपने-अपने दलों से अचानक नाता तोड़कर भाजपा का दामन पकड़ लिया था। भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने कतई ऐसा कोई काम नहीं किया, जिससे उन्हें पार्टी ने हाथों हाथ ले लिया हो। भाजपा पुराने जड़ीले नेताओं ने भी उन्हें तब तक हाथों हाथ लिया जब तक वे भाजपा में शामिल नहीं हो गए। उसके बाद वे नेता भी गायब हो गए हैं। भाजपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य को किसी भी रूप में स्वीकारने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। ऊपरी मन से ये स्वामी प्रसाद के साथ दिखते हैं पर अंदर ही अंदर उनकी काट करते रहते हैं। इसके विपरीत स्वामी प्रसाद मौर्य कहते हैं कि भाजपा में बेहतर पोजीशन में हैं।
मायावती की प्रेस कांफ्रेंस हो या मायावती की रैली। सफारी सूट में हमेशा सक्रिय दिखने वाले छह फिट लम्बे बृजेश पाठक को भी भाजपा में उतनी तरजीह नहीं दी जा रही है जितनी उन्हें बसपा में मिलती थी। अब भाजपा में उनका कहीं पता ही नहीं चल रहा है। उनके समर्थकों का कहना है कि बृजेश पाठक को पार्टी ने जो जिम्मेदारी सौंपी है वे उसे निर्वाहन कर रहे हैं।

कांग्रेस की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहीं रीता बहुगुणा पिछले महीने भाजपा में शामिल हो गईं। कांग्रेस में जब तक रीता बहुगुणा जोशी रहीं तब तक यूपी की जनता उन्हें बड़े नेता के रूप में देखती थी, लेकिन भाजपा में शामिल होने के बाद उनकी उस तरह की चेतन्यता और सक्रियता खत्म सी हो गईं। अब देखने की बात है कि जो नामी नेम फेम वाले नेता थे वे भाजपा में कैसे अपने आपको सक्रिय करते हैं।

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