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तीन तलाक मुद्दे पर पर्सनल लॉ बोर्ड को नहीं दी जा सकती चुनौती, सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर

Updated: IST
शिया पर्सनल लॉ बोर्ड तीन तलाक के विरोध में

लखनऊ.ट्रिपल तलाक मामले में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में एक और हलफनामा दाखिल कर दिया है। इसमें केंद्र की दलीलों का विरोध किया गया है। हलफनामें में यह कहा गया है की तीन तलाक से महिलाओं के मौलिक अधिकारों का हनन नहीं हो रहा केंद्र की दलील निराधार है। हलांकि राजधानी लखनऊ में तीन तलाक के विरोध में 40 हज़ार महिलाएं भारतीय मुस्लिम महिला संगठन से जुड़ चुकी हैं।

ट्रिपल तलाक के मामले में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में एक और हलफनामा दाखिल किया है और केंद्र की दलीलों का विरोध किया है। हलफनामें में कहा गया है की ट्रिपल तलाक को महिलाओं के मौलिक अधिकारों का हनन बताने वाले केंद्र सरकार का रुख बेकार की दलील है। पर्सनल लॉ को मूल अधिकार की कसौटी अपर चुनौती नहीं दी जा सकती। ट्रिपल तलाक, निकाह हलाल जैसे मुद्दे पर कोर्ट अगर सुनवाई करता है तो यह ज्यूडिशियल लेजिस्लेशन की तरह होगा केंद्र सरकार ने इस मामले में जो स्टैंड लिया है की इन में इन मामलों को दुबारा देखा जाना चाहिए बेकार है।

हलफनामें में चुनौती

हलफनामें में पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा की पर्सनल लॉ चुनौती नहीं दी जा सकती। सोशल रिफार्म के नाम पर मुस्लिम पर्सनल लॉ को दोबारा नहीं लिखा जा सकता। यह प्रैक्टिस संविधान के अनुच्छेद 25, 26 और 29 के तहत प्रोटेक्टेड है। कॉमन सिविल कॉड कमीशन के प्रयास का विरोध करते हुए मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा की कॉमन सिविल कोड संविधान के डायरेक्टिव प्रिंसिपल का पार्ट है।

तीन तलाक का यह था मामला

दरअसल ट्रिपल तलाक, निकाह हलाला और बहुविवाह के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की गई थी। इस मामले में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की तरफ से एफिडेविड दाखिल कर याचिका का विरोध किया जा चुका है। इसके बाद इस मामले में केंद्र सरकार की तरफ से हलफनामा दायर किया गया जिसमें कगाह गया की तीन तलाक के प्रावधान को संविधान के तहत दिए गए समानता के अधिकार और भेदभाव के खिलाफ अधिकार के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। केंद्र ने कहा की लैंगिक समानता और महिलाओं के मान और सम्मान के साथ समझौता नहीं हो सकता।

लखनऊ में 40 हज़ार मुस्लिम महिला 'झटके' तलाक के खिलाफ

भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन चाल्ने वाली नाइस हसन से अब तक 40 हज़ार महिलाएं जुड़ चुकी हैं जो तीन तलाक यानि झटके के तलाक से मुक्ति पाना चाहती हैं। इन महिलाओं ने झटके तलाक के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान भी चलाया। अब शिया पर्सनल लॉ बोर्ड भी तीन तलाक में महिलाओं को हक़ देना चाहता है। नाइस हसन ने कहा की हाल ही में लखनऊ में एक सेमिनार हुआ था जिसमें यह प्रस्ताव रखा गया की मर्द और पुरुष को तब तक तलाक न मिले जब तक तलाक के लिए दोनों रज़ामन्द न हों। पुरुष के तीन बार तलाक बोल देने से तलाक नहीं माना जाए। शिया धर्मगुरु मौलाना युसूफ अब्बास ने कहा की इस मसले में हम चाहते हैं की बात हो और इसमें महिलाओं के साथ कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।

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