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क्या होता है घोषणापत्र, कैसे इसे किया जाता है तैयार

Updated: IST jaago janmat
कैसे बनता है मैनफैस्टो और क्या होती है इसकी अहमियत। इसके बारे में बता रहे हैं प्रोफेसर और राजनेता।

लखनऊ. सियासी उठापटक के बीच उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। भाजपा, बसपा, कांग्रेस सहित सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी जनता प्रत्याशियों के चयन के साथ ही मतदाताओं को लुभाने के लिए मुद्दों की तलाश में जुट गए हैं। इसके बाद घोषणा पत्र बनाने की तैयारी शुरू होगी। उधर, चुनाव आयोग भी अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा है। आइए जानते हैं पार्टियां क्यों बनाती हैं घोषणा पत्र। कैसे बनता है मेनफैस्टो और क्या होती है इसकी अहमियत। इसके बारे में बता रहे हैं प्रोफेसर और राजनेता।

सार्वजनिक रूप से अपने सिद्धान्तों, इरादों व नीति को प्रकट करना घोषणापत्र कहलाता है। राजनीतिक पार्टियों द्वारा चुनाव में जाने से पहले लिखित डॉक्यूमेंट जारी किया जाता है। इसमें पार्टियां दर्शाती हैं कि यदि उनकी सरकार बनी तो वे किन योजनाओं को प्राथमिकता देंगी और कैसे कार्य करेंगी। इसे विजन डॉक्यूमेंट कहा जाता है। राजनैतिक दल चुनाव के कुछ दिन पहले अपना घोषणापत्र प्रस्तुत करते हैं। इन घोषणापत्रों में इन बातों का उल्लेख होता है कि यदि वे जीत गये तो नियम-कानूनों एवं नीतियों में किस तरह का परिवर्तन करेंगे। घोषणापत्र पार्टियों की रणनीतिक दिशा भी तय करते हैं।

प्रोफेसर्स के मुताबिक

लखनऊ यूनिवर्सिटी के पॉलिटिकल साइंस के प्रोफेसर कविराज के मुताबिक घोषणापत्र एक ऐसा डॉक्यूमेंट है जिसके आधार पर पार्टी जनता से वोट मांग सकती है तो वहीं जनता भी उसी आधार पर वोट दे सकती है। यह पूरी तरह से पॉलिटिकल डॉक्यूमेंट है जो जनता और नेता को एक दूसरे के प्रति उत्तरदायी बनाता है।

पॉलिटकल साइंस के प्रोफेसर बृजेश चंद्र मिश्र (जेएनपीजी कॉलेज) कहते हैं घोषणा पत्र पार्टी की विचार धारा और उद्देश्य की उदघोषणा करता है। घोषणा पत्र प्राय: चुनाव से पहले ही घोषित किया जाता है। इसे पार्टी द्वारा बनाई गई समिति ही तय करती है। इस पर पार्टी की विचारधारा की छाप साफ देखी जा सकती है।

नेताओं की राय

कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत के मुताबिक घोषणा पत्र एक पार्टी का जनता से किया हुआ वादा होता है। पार्टी सत्ता में आएगी तो क्या-क्या करेगी, इस बात को दर्शाता है घोषणा पत्र। वहीं बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ दिनेश शर्मा कहते हैं कि विजऩ डॉक्यूमेंट या घोषणा पत्र राजनैतिक दल का एक कांसेप्ट होता है डेवलपमेंट प्रोसेस का। इसे ऐसे समझें कि किस तरह वो सत्त्ता में आने के बाद डेवलपमेंट करेंगे। उसमें ये बताया जाता है कि किन कामों को प्राथिमिकता से करेंगे और उसकी कार्यप्रणाली क्या होगी। भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं से लेकर आम नागरिकों के सुझावों को समय समय पर इखट्टा करती है और उसे विजऩ डॉक्यूमेंट का भाग बनाती है ताकि एक अच्छा सुशासन जनता को दिया जा सके।

ऐसे तैयार होता है घोषणापत्र

कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत के मुताबिक घोषणापत्र तैयार करने का तरीका आमतौर पर सभी पार्टियों का एक जैसा होता है। पार्टियां अपने कार्यकर्ताओं को जनता के बीच भेजती हैं, उनके सुझावों को एक जगह इकट्ठा किया जाता है। पार्टी अध्यक्ष द्वारा बनाई गई कमेटी उन सुझाव को पढ़ती है जिसके आधार पर घोषणा पत्र तैयार किया जाता है।

पॉलिटकल साइंस के प्रोफेसर बृजेश चंद्र मिश्र (जेएनपीजी कॉलेज) के मुताबिक घोषणा पत्र तैयार करते वक्त पार्टी की विचारधारा का खासा ख्याल रखा जाता है। जिन योजनाओं को शुरू करने की बात कही जाती है उनके नाम पार्टी के पूर्व विचारकों या नेताओं के नाम पर होते हैं। क्या-क्या मुद्दे पार्टियां इसमें शामिल करना चाहती हैं यह पूरी तरह से पार्टियों पर ही निर्भर करता है।

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