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सोसाइटी में दिनदहाड़े किसानों से अवैध वसूली, मंडी में खरीदार तक नहीं

Updated: IST illegal Extort money
समर्थन मूल्य पर धान खरीदी केन्द्रों में बोरों में धान भराई और तौलाई के नाम पर किसानों से प्रति क्विंटल 5 रुपए की वसूली की जा रही है

महासमुंद. समर्थन मूल्य पर धान खरीदी केन्द्रों में बोरों में धान भराई और तौलाई के नाम पर किसानों से प्रति क्विंटल 5 रुपए की वसूली की जा रही है। किसानों से की जा रही अवैध वसूली का सोसाइटियों में कोई हिसाब किताब भी नहीं है, वहीं प्रशासन अनजान बना हुआ है और किसानों को लूटा जा रहा है।

नियमानुसार धान बेचने के लिए पहुंच रहे किसानों से खरीदी केंद्रों में किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाना है। खरीदी फड़ में उन्हें अपने धान की ढेरी लगानी है। किसानों के धान की बोरों में भराई और तौलाई के लिए अलग से कर्मचारियों की व्यवस्था की गई है। इसके लिए शासन से प्रति क्विंटल 12 रुपए सोसाइटियों को दिया जा रहा है। इसके बावजूद खरीदी केन्द्रों में किसानों से 5 रुपए वसूला जा रहा है। पत्रिका ने पिटियाझर, बिरकोनी, बरोंडाबाजार, बावनकेरा, जलकी, सिरपुर आदि खरीदी केन्द्रों में किसानों से बात की।

किसान खुद ही धान भरें या पैसे दें

समिति प्रबंधकों का कहना है शासन द्वारा समितियों को प्रति क्विंटल सिर्फ 12 रुपए दिए जा रहे हैं। इतनी राशि से धान खरीदी की पूरी व्यवस्था कर पाना संभव ही नहीं है। 12 रुपए में भूसी, कैपकवर, पालीथिन, रंग, सुतली, लेवर, तौलाई, भराई कैसे संभव है। इन सबमें प्रति क्विंटल 18-20 रुपए खर्च आता है। 80 प्रतिशत धान खरीदी केन्द्रों में धान भराई का खर्च किसान ही वहन कर रहे हैं। या अपना धान बोरों में खुद ही भरकर तौल करने के लिए दे रहे हैं। तुमगांव ब्रांच के सभी केन्द्रों में बोरा भराई के नाम पर किसानों से पैसा लिया जा रहा है। नियम के तहत किसानों से धान खरीदी से लेकर तौलाई, धान भराई और ढुलाई तक सभी खर्च प्रशासन की ओर से बहन किया जाता है। इसके अलावा रख रखाव के लिए अलग बजट मिलता है।

कार्रवाई की जाएगी

समितियों को शासन से जो राशि दी जा रही है, उतने में ही सब कार्य करना है। अलग से राशि लेने का अधिकार नहीं है। यदि ऐसा हो रहा है तो मैं कल ही टीम भेजता हूं। जांच भी होगी और कार्रवाई भी।
प्रेमप्रकाश शर्मा, एसडीएम

स्वयं भरना है धान

समिति वसूली नहीं कर रही। किसानों को अपना धान बोरा में भरकर देना है, जो किसान स्वयं नहीं भरते वे लेवर से भराते हैं और इसका खर्च देते हैं।
अशोक साहू, समिति प्रबंधक बावनकेरा

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