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#CG10thresult : सतीश ने पेश की मिसाल, भूखे पेट अंधेरे में की पढ़ाई, जुनून से बना गया अव्वल

Updated: IST Topper satish  yadav
माता-पिता यूपी के किसी ईंट भट्टे में रोटी के लिए जूझ रहे हैं। घर में बिजली नहीं है, दो वक्त का खाना भी मुश्किल से मिल पाता है

महासमुंद.माता-पिता यूपी के किसी ईंट भट्टे में रोटी के लिए जूझ रहे हैं। घर में बिजली नहीं है, दो वक्त का खाना भी मुश्किल से मिल पाता है। गांव में स्कूल नहीं, दूर के रिश्तेदार के घर रहकर सरकारी स्कूल में पढऩे वाले सतीश यादव ने 10वीं की परीक्षा में 96.50 प्रतिशत अंक लेकर टॉप-10 में आठवां स्थान बनाया है।
महासमुंद जिले के बागबाहरा ब्लॉक के शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल बीके बाहरा के छात्र सतीश कुमार की सफलता से जहां पूरा जिला गौरवान्वित है, वहीं उनके माता-पिता को इसकी खबर तक नहीं है। प्रदेश के ओडिशा सीमावर्ती ग्राम भटगांव (सूअरमार) के रहने वाले सतीश के पिता रामकुमार व माता देवकी बाई तीन महीने पहले रोजी-रोटी की तलाश में उत्तरप्रदेश पलायन कर गए हैं।

सतीश अपनी दादी मनटोरा बाई के साथ खल्लारी के पास ग्राम बीके बाहरा आ गया, जहां उसकी दादी की बहन देवकी बाई रहती है, लेकिन इस घर में भी बिजली नहीं है। गरीबी इस कदर कि किसी दिन मजदूरी पर नहीं गए तो दाने के लाले पड़ जाते हैं। गरीबी के चलते ही सतीश का बड़ा भाई पंकज आठवीं के आगे नहीं पढ़ सका, लेकिन पंकज घोर अभावों के बीच भी पढ़ाई में मन लगाए रहा। ट्यूशन का सामथ्र्य तो है नहीं, न गाइड, न कुंजी, केवल में स्कूल में शिक्षकों द्वारा कराई गई पढ़ाई के सहारे उसने यह सफलता पाई है। मजदूर का यह बेटा इंजीनियर बनना चाहता है।

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