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महंत ने सीएम योगी से की मांग, बंदेल में पानी के बाद इसकी है सख्त जरूरत

Updated: IST Amaran
बदहाल बुंदेलखंड के महोबा में बुंदेली समाज पिछले डेढ़ वर्षों से एम्स की मांग कर रहा है।

महोबा। बदहाल बुंदेलखंड के महोबा में बुंदेली समाज पिछले डेढ़ वर्षों से एम्स की मांग कर रहा है। कई आंदोलन के बाद देश की सबसे लम्बी भूख हड़ताल अभी भी जारी है जोकि आमरण अनशन में तब्दील हो चुकी है। बुंदेली समाज के पांच लोग इस बढ़ते तापमान में खाना त्याग चुके हैं। स्वास्थय सेवाओं से महरूम गोरखनाथ की तपोभूमि महोबा में एम्स की मांग कर रहे हैं। बुंदेली समाज को सीएम योगी से बड़ी उम्मीदें हैं। उन्हें उम्मीद है कि गोरखनाथ के भक्त योगी बुंदेलियों की सदा जरूर सुनेगे। सीएम भी गोरखपुर में एम्स की लड़ाई लड़ चुके है और वो बुंदेली समाज के इस अनशन की भावनाओ को जरूर महत्व देंगे।

वीर आल्हा उदल की नगरी महोबा, जहां कई वर्षों से दैवीय आपदाओं का दंश देखने को मिला है। गरीबी, भुखमरी और पलायन यहां का सही चित्रण है। महोबा सहित पुरे बुंदेलखंड में कोई भी एम्स जैसे बड़े अस्पताल की व्यवस्था न होने से यहां के लोग महानगरों में जाने के लिए मजबूर हो जाते हैं। ऐसे में महोबा के ही रहने वाले तारा पाटकार ने बुन्देली समाज का गठन कर रोटी बैंक की शुरूआत की और डेढ़ वर्ष पूर्व एम्स की मांग शुरू कर दी। इस अभियान का आरम्भ पोस्टकार्ड अभियान से हुआ जिसमे मुसलमानों ने संस्कृत सहित कई भाषाओँ में डेढ़ लाख खत लिखकर भेजे। मोदी को मनाने के लिए रमजान में हिन्दू भाइयों ने एक माह के रोजे रख कर एम्स की मांग की। यहीं नहीं एम्स की मांग के लिए कई प्रकार के आंदोलन किये ! तारा पाटकार पिछले 257 दिनों से अन्य त्याग कर उपवास आंदोलन कर रहे थे लेकिन उनकी सुध न तो सत्ता पक्ष ने ली और न ही विपक्ष के नेताओं ने।

सीएम योगी आदित्यनाथ बीतें दिनों बुंदेलखंड के दौरे पर आये लेकिन उन्होंने देश के सबसे लम्बी हड़ताल को लेकर कोई जिक्र तक नहीं किया। अब थकहारकर समाजसेवी तारा पाटकार ने आमरण अनशन शुरू कर दिया है। बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकार सहित उनके चार साथी शेख इकबाल हुसैन, रिटायर्ड शिक्षक 70 वर्ष के रामसहाय हेमकर, जयवंत सिंह और भगवती प्रसाद आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं। बढ़ते 46 डिग्री तापमान में सभी शहर के आल्हा चौक पर अनशन में बैठे हुए हैं। उनका समर्थन शहर के सभी बुद्धजीवी कर रहे हैं मगर राजनैतिक दल के लोग इस आंदोलन से दुरी बनाये हुए हैं। इस बात की तीस इन अनशनकारियों को बड़ी चुभ रही है।

महोबा में एम्स के लिए चल रहा ये आंदोलन देश की सबसे बड़ी भूख हड़ताल बन चुकी है। 257 दिनों से चलने वाली इस हड़तान ने अब आमरण अनशन का रूप ले लिया है। अनशन कर रहे तारा पाटकार का कहना है कि बुंदेलखंड की उपेक्षा लगातार हो रही है। उन्हें मज़बूरी में आमरण अनशन को शुरू करना पड़ा है ताकि यहां कोई इलाज के आभाव में न मरे। झांसी में एम्स की जरुरत नहीं है बल्कि महोबा में एम्स होना चाहिए महोबा बुंदेलखंड का हृदयस्थल है।

बुंदेली समाज सीएम योगी से मांग करता है कि महोबा गुरु गोरखनाथ की तपोभूमि है और यहां का उद्धार योगी जी नहीं करेंगे तो फिर कौन करेगा। अभी तक राजनैतिक दलों का रवैया नकारात्मक रहा है। अनशन कर रहे लोगों को सीएम योगी से उम्मीद है क्योंकि योगी आदित्यनाथ भी गोरखपुर में एम्स की लड़ाई लड़ चुके है सभी ने सीएम योगी से मुलाकात की मांग जिला प्रसाशन से की है। एम्स के लिए चल रहे आमरण अनशन में धर्मों को दर किनार सभी लोग इसका खुलकर समर्थन कर रहे है। तारा के साथ उनके सहयोगी इक़बाल हुसैन भी इस आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं। उन्होंने कहा कि एम्स महोबा में बनना बहुत जरुरी है। इस लिए खाना पीना छोड़ दिया है और पानी पीकर आमरण अनशन में बैठे हुए हैं।

वहीं इस आंदोलन में रिटायर्ड शिक्षक 70 वर्षीय रामसहाय हेमकर भी आमरण अनशन पर बैठे है उन्होंने कहा कि ये मांग मानवहित में है। ये अनशन व्यक्तिगत नहीं बल्कि बुंदेलखंड की जरुरत के लिए है। ये आमरण अनशन मांग न पूरी होने तक चलता रहेगा। 47 डिग्री तापमान में भी हमारे हौसलें बुलंद हैं।

एम्स के लिए आंदोलन कर रहे बुंदेली समाज का आमरण अनशन होने से प्रसाशन भी अब हरकत में आया है और तारा पाटकार को अनशन न करने का अनुरोध कर रहा है। वहीं तारा पाटकार ने कहा कि उन्हें अब सीएम योगी से उम्मीदें हैं। उनकी मानें तो सीएम योगी ने खुद गोरखपुर में एम्स के लिए आंदोलन किया और वहां एम्स बना है। योगी आदित्यनाथ गुरु गोरखनाथ मंदिर के महंत है और गोरखनाथ की तपोभूमि महोबा रही है। इसलिए उन्हें उम्मीद है कि गुरु गोरखनाथ की तपोभूमि का मान रखेंगे सीएम योगी।

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