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उबड़-खाबड़ मैदान से निकल रहे हॉकी के 'हीरे

Updated: IST mandsaur news
- एक दशक में स्कूल मैदान से निकले 500 नेशनल खिलाड़ी- अमरसिंह व अविनाश तराश रहे हैहॉकी के हीरे

मंदसौर. रतलाम

शहर में हॉकी की लोकप्रियता अन्य किसी भी खेल से कम नहीं है। यह तब है जब शहर में एक भी हॉकी का मानक खेल मैदान नहीं है। अन्य सुविधाएं तो दूर की बात है। इसके बाद भी उत्कृष्ट स्कूल के उबड़-खाबड़ मैदान हर साल अनेक हॉकी के 'हीरेÓ उगल रहा है। करीब एक दशक में इस मैदान से पांच सौ राष्ट्रीय खिलाड़ी निकले है। इन हॉकी के हीरे को ख्यात कोच अमर ङ्क्षसह शेखावत और अविनाश उपाध्याय तराश रहे है। इन हीरों में अंतराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी नीलू डाडिया और इंडियन आइल की महिला हॉकी टीम की नियमित खिलाड़ी प्रियंका चंद्रावत भी शामिल है।

शहर में ना तो हॉकी का खेल मैदान और ना ही इस खेल की अनुकूलता। बावजूद इसके यहां हॉकी के प्रति समर्पित रेलवे के पूर्व अधिकारी हॉकी के कोच अमर ङ्क्षसह शेखावत व अविनाश उपाध्याय नन्हें खिलाडिय़ों को ऐसे प्रशिक्षित करते है जैसे कि एक कुम्हार गिली मिट्टी को सुंदर आकर देते है। अनुशासन, कठिन परिश्रम, शरीरिक दक्षता पर शेखावत व उपाध्याय खासा जोर देते है। यह ना केवल नन्हे बच्चोंं को हॉकी के आधुनिक खेल पद्धति को सिखाते है। वरन् कड़ा अभ्यास भी करवाते है। यही नहीं वे नन्हे खिलाडिय़ों से सीनियर खिलाडिय़ों के बीच लगातार मैच करवाते है। यही वजह है कि 14,17 व 19 आयु वर्ग में राज्य स्तरीय हॉकी खेल प्रतियोगिताओं में मंदसौर जिले के खिलाडिय़ों को कोई सानी ही नहीं है। एक दो बार नहीं वरन् अनेक बार विभिन्न आयु वर्ग में यहां के खिलाड़ी प्रदेश के अन्य जिलों के खिलाडिय़ों को नाकों चने चबवाकर ट्राफी पर कब्जा कर चुके है। वर्तमान में भी इस उबड़-खाबड़ मैदान पर करीब दो बार कोई तीन बार तो कोई चार बार

मध्यप्रदेश हॉकी टीम का प्रतिनिधित्व कर चुके हॉकी खिलाड़ी नियमित अभ्यास करते है।

भारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाड़ी नीलू डाडिया का कहना है कि शेखावत व उपाध्याय के कारण व कड़े अनुशासन, खेल के प्रति समर्पण, कड़ी मेहनत कर सकी। यही वजह है कि उन्हें ग्वालियर के हॉकी एकेडमी में तुरंत शामिल कर लिया गया। और वे देश के लिए खेल पा रही है।प्रियंका चंद्रावत ने कह कि इंडियन आइल कंपनी की महिला हॉकी टीम में शामिल होना बहुत टेड़ी खीर है। पर मंदसौर जैसे छोटे कस्बे के खिलाडिय़ों को मौका मिलना और मुश्किल। पर शेखावत जैसे हॉकी कोच ने आत्मविश्वास जगाया।कड़ा अभ्यास करवाया।शारीरिक और मानसिक रूप से कठोर परिश्रम करवाकर मजबूत किया।तीन बार राष्ट्रीय प्रतियोगिता में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व कर चुकी ईशा अग्रवाल ने कहा कि वे हाल ही में 14 आयु वर्ग में राष्ट्रीय हॉकी प्रतियोगिता में शामिल होकर आईहै। उनकी टीम ने जबरजस्त प्रदर्शन किया। इसका श्रेय केवल शेखावत एवं उपाध्याय सर को जाता है। कोच अमरङ्क्षसह शेखावत ने कहा कि उनके खेल मैदान पर पहली शर्त अनुशासन है।मैदान पर अमीर-गरीब, ऊंच-नीच, सरकारी-निजी स्कूल का कोई भेद नहीं है। यहां सबको समानता के साथ नियमित रूप से विगत चार दशकों से बच्चों को हॉकी सिखाया जा रहा है। यह बड़े दुख की बात है कि जिस शहर से पांच सौ राष्ट्रीय खिलाड़ी निकले थे उस शहर के पास अपना एक भी हॉकी का खेल मैदान नहीं है।

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