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'माता-पिता की सतर्कता एवं जागरूकता से ही शोषित होने से बच सकता है बचपन

Updated: IST mandsaur news
बाल सरंक्षण पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का हुआ समापन

रतलाम/मंदसौर.

बच्चों की सुरक्षा के लिए बेहद कड़े कानून बनाए गए है। कानून में सभी की जिम्मेदारी भी तय की गई है लेकिन जब तक हमारे अंदर बच्चों के प्रति अपनेपन का भाव नहीं जागेगा, हम उनके कल्याण के लिए बेहतर काम नहीं कर सकते। बच्चों के हित के लिए कानून से अधिक मानवीय संवेदनाओ की जरूरत है। यह बात जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी रविंद्र महाजन ने कहीं। वे गुरुवार को बाल संरक्षण द्वारा होटल ऋतुवन में आयोजित दो दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि यौन शोषण की घटनाएं दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, जिसका मूल कारण माता- पिता का बच्चों पर ध्यान न देना। बच्चों के यौन शोषण को रोकने का सबसे प्रभावी और कारगर उपाय है माता-पिता की अति सतर्कता एवं जागरूकता। बच्चों को सुरक्षित एवं असुरक्षित स्पर्श की पहचान नहीं होती। इसी का फायदा उठाते हुए अपराधी बच्चों का शोषण करते रहते है, इसके लिए बेहद आवश्यक है उनकी सुरक्षा। माता-पिता की जागरूकता से ही बच्चों के बचपन को शोषित होने से बचाया जा सकता है। समाज का गिरता नैतिक स्तर गहरी चिंता का विषय है।

बालिकाओं के साथ बालकों की सुरक्षा भी जरूरी है

प्रशिक्षण में जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी नीमच राजीव द्विवेदी ने कहा कि एक सर्वेक्षण के अनुसार बाल यौन शोषण के कुल अपराधों में 92 प्रतिशत अपराधी नजदीकी व्यक्ति पाए गए है। जिन पर बच्चों को भरोसा था, इनमें चाचा, मामा, फूफा, कजिन, सौतेले पिता या भाई भी शामिल है। उन्होंने कहा कि अपराधों के आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि लड़कियां ही नही लड़के भी असुरक्षित है। यदि लड़कों के साथ भी कोई इस प्रकार की हरकत करता है तो उसे भी कानून में दोषी माना गया है।

सभी बच्चों को दिखाई जाएं फिल्म 'कोमल

बाल संरक्षण अधिकारी एवं नोडल अधिकारी (पोक्सो) राघवेन्द्र शर्मा ने कहा कि 18 वर्ष से कम आयु के किसी भी बालक- बालिका के साथ कोई भी ऐसा व्यवहार जिससे उसके स्वाभिमान एवं अस्मिता को खतरा होता है यौन शोषण की श्रेणी में आता है। प्रशिक्षण में समूह परिचर्चा, प्रश्नोतरी, केस स्टडी, प्रतिभागियों का प्रस्तुतिकरण, कार्य के दौरान आने वाली कठिनाइयों एवं बेहतर कार्य के लिए सुझाव भी मांगे गए। इसमें मुख्य सुझाव प्राप्त हुआ कि बच्चों के कोमल बचपन को असुरक्षित स्पर्श से बचाने के लिए उनको लघु फिल्म 'कोमलÓ दिखानी चाहिए। बाल यौन शोषण रोकथाम आधारित इस फिल्म से बच्चे सुरक्षित असुरक्षित स्पर्श की पहचान कर सकेंगे। प्रशिक्षण में बाल कल्याण समिति एवं किशोर न्याय बोर्ड सदस्य, विधिक सहायता अधिकारी, श्रम निरीक्षक, जिले के सभी पुलिस थानों के बाल कल्याण अधिकारी, परियोजना अधिकारी, बाल संरक्षण इकाई के अधिकारी कर्मचारी, बालश्रम, चाइल्ड लाइन, बालगृह, शिशुगृह एवं छात्रावास अधीक्षक उपस्थित थे।

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