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कौन से विधायक के साथ धोखाधड़ी का किया प्रयास

Updated: IST cyber crime
आम से लेकर खास तक को बना रहे अपराधी निशाना

रतलाम/मंदसौर.

जिले में साइबर क्राइम लगातार बढ़ता जा रहा है। फरवरी माह में तीन से चार वारदातें सामने आई है। हांलाकि दो वारदातों में धोखाधड़ी की जानकारी लगते ही जैसे ही सामने वाले का नाम पूछा तो फान काट दिया गया। वहीं दो लोगों से करीब एक लाख 14 हजार रूपए की धोखाधड़ी हुई है। वहीं दूसरी और पुलिस इन मामलों में अभी तक एक भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर पाई है।

आम से लेकर खास तक के पास आए फोन

अज्ञात नंबरों से आने वाले फोन से ठगी करने वालों ने कुछ दिनों में करीब तीन से चार लोगों को अपना निशाना बनाया है। इसमें से एक सुवासरा विधायक हरदीप ङ्क्षसह डंग भी है। हांलाकि विधायक डंग की सजगता के कारण उनके साथ आनलाइन धोखाधड़ी नहंी हुई। वहीं नाहरगढ़ के एक व्यक्ति के साथ19 हजार तो भावगढ़ के करजू के एक किसान के साथ 93 हजार रूपए की धोखाधड़ी का मामले सामने आए है।

कुछ दिनों में हुए मामले

केस-1

सुवासरा विधायक हरदीपङ्क्षसह डंग के पास कुछ दिनों पहले अज्ञात नंबर से फोन आया था। जिसमें उनको अज्ञात व्यक्ति ने आठ हजार रूपए के रिचार्ज कर सभी फोन पर मुफ्त बात करने का कहा। विधायक डंग सजगता दिखाते हुए जैसे ही उसका नाम पूछा उसने तत्काल फोन काट दिया।

केस-2

7 फरवरी को भावगढ़ क्षेत्र के ग्राम करजू में किसान रामेश्वर पाटीदार के पास अज्ञात नंबर से फोन आया था। किसान से पिन कोड नंबर पूछकर 93 हजार 800 रूपए की पेटीएम से शॉपिंग कर ली गई थी।

केस-3

8 फरवरी नाहरगढ़ क्षेत्र के ग्राम पानपुर के मदनलाल के पास अज्ञात व्यक्ति का फोन आया और पिन कोड नंबर पूछकर करीब 19 हजार 900 रूपए की खरीदारी कर ली गई।

केस-4

9 फ रवरी को लिंबावास ग्राम के राहुल धनोतिया को 8877741080 से फोन आया और सामने वाले व्यक्ति ने कहा कि मैं सेंट्रल बैंक से बोल रहा हंू और आपके एटीएम कार्ड की तारीख आज खत्म होने वाली है। एक घंटे में एटीएम काम करना बंद कर देगा। इसलिए पिन कोड नंबर दो। राहुल ने जैसे ही उसका नाम पूछा तो उसने मोबाइल काट दिया।

पुलिस को मिली नाम मात्र की सफलता

जानकारी के अनुसार गत वर्ष करीब दस मामले जिले के अलग-अलग थानों में एटीएम से खरीदारी करने या रूपए निकालने के मामले दर्ज हुए है। वहीं इस वर्ष भी दो धोखाधड़ी के मामले में पुलिस थाने में शिकायत की गई है। इन सभी मामलों में पुलिस को अभी तक आरोपियों का पता भी नहीं लगा है। पुलिस अधिकारी केवल आरोपियों का झारखंड और बिहार सहित अन्य अन्य जगहों से वारदात करने की बात कहते है। लेकिन आरोपियों तक नहीं पहुंचते है।

इनका कहना...

इस तरह के ऑनलाइन फ्राड अपराधी फे क आईडी, फर्जी सीम, इंटरनेट के माध्यम से करते है। इसके लिए विशेष टीम गठित की जाएगी जो साइबर टीम की मदद से आरोपियेां को पकड़ेगी।

- अजय प्रतापङ्क्षसह, एएसपी मंदसौर।

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