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महाशिवरात्रि पर त्रि-स्पर्शा युति और अहोरात्र श्रवण नक्षत्र का दुर्लभ योग

Updated: IST 12 secret of god Shiva
सर्वार्थ सिद्ध योग के साथ ही प्रदोष, श्रवण नक्षत्र होने से रहेगी विशेष फलदायी

रतलाम/मंदसौर.

शिव और शक्ति की आराधना का पर्व महाशिवरात्रि श्रद्धा और भक्ति के साथ 24 फरवरी को मनाया जाएगा। इस बार तीन विशेष योग बनने के कारण महाशिवरात्रि शिव भक्तों के लिए विशेष रहेगी। इस बार महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्ध योग के साथ ही प्रदोष, श्रवण नक्षत्र होने से यह विशेष फलदायी रहेगी। फाल्गुन कृष्ण पक्ष में त्रि-स्पर्शा योग यानी त्रयोदशी चतुर्दशी व अमावस्या की युति में महाशिवरात्रि मनाए जाने का विधान है और इस बार 24 फरवरी को ऐसी ही युति पड़ रही है। इस दिन अहोरात्र श्रवण नक्षत्र होने से यह शिवरात्रि अत्यंत दुर्लभ योगों से परिपूरित है। शुक्रवार को पड़ रही महाशिवरात्रि पर प्रात:कालीन गोचर में भाग्येश शुक्र उच्च का होकर धनाभाव में बैठा है। इस युति को ऐश्वर्य योग के रूप में संबोधित किया जाता है। शास्त्रों में शुक्र को भौतिक सुख, धन-संवाद का कारक माना गया है। उच्च के शुक्र शिवरात्रि पर मीन राशि में स्थित है।

शिवलिंग का प्रादुर्भाव और शिव-विवाह

शास्त्रों में मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग प्रादुर्भाव हुआ था। यह भी मान्यता है कि इस दिन शिव-पार्वती विवाह बंधन में बंधे थे। आमतौर पर महाशिवरात्रि की पूजा एक दिन पहले रात्रि से शुरू हो जाती है लेकिन इस बार पूजा शिवरात्रि के दिन 24 फरवरी से होगी। शिवरात्रि 23 फरवरी की रात को 4.30 बजे बाद शुरू हो जाएगी, लेकिन उदय तिथि होने के कारण यह 24 फरवरी को ही मनाई जाएगी। इससे इस दिन रात्रि में शिव पूजन श्रेष्ठ फलदायी है।

पाताल लोक में भद्रा का पूजन में असर नहीं

महाशिवरात्रि पर रात्रि 9.38 से भद्रा शुरू हो रही है लेकिन इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार मकर राशि की भद्रा पाताल लोक की होती है। पाताल लोक की भद्रा से किसी प्रकार का अनिष्ट नहीं होता। ज्योतिषियों के अनुसार श्रवण नक्षत्र के साथ शिवरात्रि का योग इसके पूर्व वर्ष 2006 व 2007 तथा वर्ष 2009 व 2015 में बना था। दो वर्षो बाद महाशिवरात्रि पर नक्षत्र योग और प्रदोष में श्रवण नक्षत्र का योग शिव भक्तों पर अधिक कृपा बरसाएगा।

ऐसे करें शिव को प्रसन्न

पंडित शास्त्री के अनुसार इस दिन शिव लिंग व मंदिर में शिव को गाय के कच्चे दूध से स्नान कराने पर विद्या प्राप्त होती है। गन्ने के रस से स्नान करने पर लक्ष्मी प्राप्त होती है एवं शुद्घ जल से स्नान कराने पर सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। पुराणों में कहा गया है कि जो मनुष्य वर्ष भर में कभी भी उपवास नहीं करता है लेकिन वह शिवरात्रि पर व्रत रखता है तो उसे सालभर उपवास रखने का फल प्राप्त हो जाता है। शिवरात्रि के दिन भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के साथ ही गंगा स्नान और दान का अधिक पुण्य माना जाता है।

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शिव मंदिरों में तैयारियां प्रारंभ

महाशिवरात्रि पर्व को लेकर जिले के प्रमुख शिव मंदिरो मेंं तैयारियां प्रारंभ हो गई है। मंदिरों में रंगाई-पुताई के साथ ही समितियों की बैठकों का दौर जारी है। महाशिवरात्रि पर विभिन्न आयोजन होंगे। भगवान पशुपतिनाथ मंदिर में भी उपसमिति की बैठक 20 फरवरी को होगी। इससे पहले यहां सुरक्षा सहित अन्य व्यवस्थाएं दुरस्त की जा रही है। मंदिर में पुलिस द्वारा बेरीकेट्स, वॉच टॉवर, बेग स्केनर सहित अन्य सुरक्षा संसाधन लगाए गए है। पशुपतिनाथ मंदिर प्रबंधक राहुल रुनवाल ने बताया कि मंदिर समिति द्वारा साफ सफाई एवं विद्युत व्यवस्था के लिए नगरपालिका को पत्र लिखा गया है। गोताखोरों की व्यवस्था के लिए भी संबंधित विभाग को पत्र लिखा गया है। मंदिर के सभी प्रमुख पहुंच मार्ग पर व्हाईट लाइनिंग करने के लिए भी नपा को पत्र लिखा गया है। सुरक्षा व्यवस्थाओं के लिए पुलिस विभाग को पत्र लिखा गया है।

संस्थाएं नि:शुल्क संभालेगी व्यवस्थाएं

महाशिवरात्रि पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु आने के मद्देनजर मंदिर समिति इस बार संगठनों को जोड़ रही है। मंदिर में इस बार महाशिवरात्रि पर कई संस्थाओं के पदाधिकारी व कार्यकर्ता नि:शुल्क व्यवस्थाएं संभालेंगे। संस्थाओं के सदस्य साफ-सफाई की व्यवस्था, जूता स्टैंड की व्यवस्था, सहित अन्य व्यवस्थाएं शामिल है। मंदिर कार्यालय को अभी तक सत्य सांई समिति, आरती मंडलों सहित अन्य सामाजिक संगठनों की सहमति प्राप्त हुई है।

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