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भारतीय शिल्पकारों को वैश्विक बाजारों से जोड़ रहा डायरेक्ट क्रिएट 

Updated: IST Craftsman
देश भर में शिल्पकारों की बेहतर मंच उपलब्ध कराने के साथ उनके काला को निखारने और उसके सही मूल्य दिलाने का काम डायरेक्ट शिल्प कर रहा है। यह संस्थान राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के शिल्पकारों को एक मंच पर लाने का काम कर रहा है।

नई दिल्ली. देश भर में शिल्पकारों की बेहतर मंच उपलब्ध कराने के साथ उनके काला को निखारने और उसके सही मूल्य दिलाने का काम डायरेक्ट शिल्प कर रहा है। यह संस्थान राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के शिल्पकारों को एक मंच पर लाने का काम कर रहा है। इस मंच के जरिए कलाकारों एवं इसके कद्रदानों के मध्य एक कड़ी का काम करता है। साथ ही कलाकारों द्वारा निर्मित स्वदेशी सामानों को उनके राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभात रहा है। डायरेक्ट क्रिएट के संस्थापक राजीव लोकेंद ने कहा कि हम अपने इस मंच के द्वारा शिल्पकला से जुड़े लोग जिसमें एक स्वतंत्र कलाकार, डिज़ाइनर, इसके उपभोक्ता, शिल्पकला को बढ़ावा देने के लिए इसके सेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों एवं उद्यमी संगठनों के लिए नई परिभाषा गढऩा चाहते हैं जिससे इस समुदाय के लिए भरपूर अवसर उत्पन्न हो। इसके साथ ही कलाकारों के लिए एक सामूहिक सामुदाय भी विकसित हो।
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रचनात्मकता को पहचानने की जरूरत
एक कलात्मक कार्य में बहुत सी रचनात्मकता सम्मिलित होती है। प्राचीनकाल से ही भारतवर्ष इस मामले में बहुत धनी रहा है फिर भले बात हस्त कला की हो या इसके बनाने वाले शिल्पिकारों की। भारत के हर राज्य की उसके शिल्पिकारों एवं उनके द्वारा निर्मित वस्तुओं के कारण हमेशा से अपनी एक अलग पहचान है। उदाहरण के लिए मध्य प्रदेश एक ऐसा राज्य है जहां धातु के बर्तनों एवं अन्य सामानों पर की गयी शिल्पकारी एवं चित्रकारी उसकी शिल्पकला के अद्भुत नमूने हैं। हालांकि यहां के जनजातीय चित्रकार आज लुप्त होकर एक गुमनामी का जीवन जी रहे है क्योंकि उन्हें ऐसा प्रतीत होता है की उनकी कला का कोई खरीदार नहीं है।

सही मेहनताना नहीं मिल रहा
आज शिल्पकला से जुड़े कलाकारों के समुदाय को उनके काम के अनुसार पर्याप्त एवं सम्मानजनक मेहनताना दिया जाना चाहिए जो की नहीं मिल रहा है। हस्तशिल या फिर किसी भी और कला से निर्मित सामानों को तैयार करने में एक कलाकार को कई कठिन चरणों से गुजरना पड़ता है। साथ ही बहुत सा समय भी खर्च करना होता है। ऐसे में ये बहुत जरूरी है की कलाकारों को उनके द्वारा बनाई गयी कलाकृतियों के लिए सम्मानजनक राषी दी जानी चाहिए। मगर आज तक ऐसा पाया गया है की उन्हें दी जाने वाली राशी एवं उनके काम के मुकाबले काफी कम होती है।
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शिल्पकारों को मिले एक स्थाई मंच
आज के समय में सभी कलाकारों को एक स्थाई मंच प्रदान करने की भी आवश्यकता है जिसके द्वारा वे अपनी कला का प्रदर्शन अपनी कलाकारी उसके सही कद्रदानों तक पहुंचा सके। इसके साथ ही उन्हें ऐसा मंच प्रदान करना होगा जहां वे अपने जैसे विभिन्न कला के कलाकारों से अक्सर मिल सके एवं अपनी कला एवं ज्ञान को आपस में बांट सके । आज के आधुनिक युग में जहां तकनीक की सहायता से विश्व के विभिन्न देश एक साथ आकर एक गांव का रूप ले चूंके है। ऐसे में यह बेहद जरूरी हो गया है की हम अपने देश के हस्तशिल्प उधोग एवं निर्मित कलाकृतियों को संरक्षण प्रदान आगे बढ़ जाए। ऐसा इस उद्दयोग, इससे जुड़े कलाकारों, कलाकृतियों का पर्याप्त समर्थन कर उनके विकास के लिए जरूरी सहायता प्रदान करने से होगा। इसके लिए हमें अपने देश के हस्तशिल्प के निर्माताओं को उनके द्वारा तैयार किए गए असली कलाकृतियों को विक्रेताओं के रूप में विश्व के मानचित्र पर सफलतापूर्वक स्थान दिलान होगा। रचनात्मक कलाओं से जुड़े कलाकारों को एक ही तरीके से एक साथ से जोड़कर दुनिया के सामने लाने से उन्हें व्यापारिक अवसर प्रदान होंगे। इसके लिए "मेक इन इंडिया" अभियान की ओर बहुत ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।

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