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जानें क्यों ‘मध्यस्थता न्यायाधिकरण’ पहुंचे इंफोसिस के पूर्व सीएफओ

Updated: IST Rajiv Bansal
इंफोसिस के पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी (सीएफओ) राजीव बंसल ने कंपनी छोड़ते समय तय हुए भुगतान की बकाया राशि पाने के लिए एक मध्यस्थता न्यायाधिकरण की शरण ली है।

बेंगलुरु। इंफोसिस के पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी (सीएफओ) राजीव बंसल ने कंपनी छोड़ते समय तय हुए भुगतान की बकाया राशि पाने के लिए कानूनी लड़ाई शुरू कर दी है। अब बंसल ने एक मध्यस्थता न्यायाधिकरण की शरण ली है। न्यायाधिकरण की ओर से सुप्रीम कोर्ट पूर्व न्यायाधीश आरवी रविन्द्रन को मध्यस्थता के लिए नियुक्त किया है। सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच मई के पहले सप्ताह में मध्यस्थता वार्ता हो सकती है। इंफोसिस ने तय राशि में से बंसल को 12 करोड़ रुपए का भुगतान नहीं किया है।

राजीव ने 2015 में छोड़ी थी इंफोसिस
जब राजीव बंसल ने वर्ष 2015 में इंफोसिस को छोड़ा था, तब कंपनी उनको 17.38 करोड़ रुपए देने पर सहमति जताई थी। यह बंसल के 24 माह के वेतन के बराबर की धनराशि थी। लेकिन, इंफोसिस ने केवल 5 करोड़ रुपए का भुगतान किया और अन्य राशि रोक दी। इंफोसिस का कहना था कि बंसल के साथ समझौता गैर प्रतिस्पर्धी दायित्वों के लिए किया गया था। लेकिन इस तरह के अधिकारों और दायित्वों के संबंध में कुछ स्पष्ट नहीं होने के कारण कुछ भुगतान को रोक दिया गया है।

एनआर नारायन मूर्ति ने उठाए थे सवाल
राजीव बंसल और इंफोसिस के बीच हुए इस संबंध विच्छेद पर इंफोसिस के सह संस्थापक एनआर नारायन मूर्ति समेत कई प्रेक्षकोंं ने सवाल उठाए थे। नारायन ने इस प्रकार के किसी भी भुगतान को ‘मुंहभरी’ कहा था। साथ ही उन्होंने कंपनी के बोर्ड को इस मामले में किसी भी प्रकार का खुलासा नहीं करने को कहा था।

न्यायाधीश रविन्द्रन का टिप्पणी से इनकार
मीडिया रिपोटर््स के अनुसार, जब न्यायाधीश आरवी रविन्द्रन से मामले के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मध्यस्थता एक निजी मामला है। वह इस मामले में एक न्यायाधीश और निर्णायक की स्थिति में हैं और एक लंबित मामले पर टिप्पणी नहीं कर सकते।

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