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दमानी ने महज एक स्टॉक और दो दिन में कमाए ६१०० करोड़ रुपए

Updated: IST radhakishan damani
शेयर बाजार किसी की किस्मत किस कदर बदल सकता है, यह कोई राधाकृष्ण दमानी से सीखे। जाने माने दलालों में शुमार दमानी और उनके परिवार की सम्पत्ति में महज दो दिन और वह भी सिर्फ एक स्टॉक के बूते लगभग ६१०० करोड़ रुपए बढ़ गई। शुक्रवार के ट्रेड में उनकी कंपनी एवेन्यू सुपरमार्ट का शेयर लगभग १९ फीसदी से अधिक बढ़ते हुए ७५० रुपए की ऊंचाई पर पहुंच गया।

मुंबई. शेयर बाजार किसी की किस्मत किस कदर बदल सकता है, यह कोई राधाकृष्ण दमानी से सीखे। जाने माने दलालों में शुमार दमानी और उनके परिवार की सम्पत्ति में महज दो दिन और वह भी सिर्फ एक स्टॉक के बूते लगभग ६१०० करोड़ रुपए बढ़ गई। शुक्रवार के ट्रेड में उनकी कंपनी एवेन्यू सुपरमार्ट का शेयर लगभग १९ फीसदी से अधिक बढ़ते हुए ७५० रुपए की ऊंचाई पर पहुंच गया। दमानी, उनकी पत्नी और भाई गोपालकृषण दमानी की इस कंपनी में ८२.२ फीसदी हिस्सेदारी है। ब्लूमबर्ग बिलियोनर इंडेक्स के अनुसार, दमानी देश के २०वें सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं। ४.१० अरब डॉलर की सम्पत्ति के साथ वह दुनिया के टॉप ५०० अरबपतियों में भी शामिल हो गए हैं।

डी-मार्ट रिटेल स्टोर्स हैं उनके

करीब डेढ़ दशक पहले दमानी की कंपनी एवेन्यू सुपरमार्ट लिमिटेड ने डी-मार्ट नाम से रिटेल स्टोरों की श्रृंखला शुरू की थी। पिछले दिनों कंपनी का आईपीओ (शेयर) जारी किया गया, जो कि 299 रुपए शेयर के हिसाब से बेचा गया था और जब बाजार में उसकी लिस्टिंग हुई तो वह तमाम रिकार्ड तोड़ते हुए 641 रुपए तक जा पहुंचा। मतलब यह कि जिन लोगों ने ये शेयर खरीदे, वे एक ही दिन में ढाई गुना मुनाफा कमा चुके थे। जो शेयर जारी किए गए थे, उनका बाजार मूल्य 40,000 हजार करोड़ है।

33,125 हजार करोड़ की हिस्सेदारी
कंपनी में 82.२ फीसदी शेयर के साथ दमानी परिवार की इसमें हिस्सेदारी 33,125 हजार करोड़ रुपए से भी अधिक हो गई। एक ही झटके में वे इतने अमीर हो गए कि उन्होंने अनिल अंबानी, अजय पीरामल, राहुल बजाज जैसे स्थापित लोगों को भी पीछे छोड़ दिया। इस समय देश में जितने भी सुपर बाजार चल रहे हैं। अगर उन सबकी शेयरों की कीमत को भी जोड़ दिया जाए, तब भी डी-मार्ट उन सबसे आगे निकल जाता है।

कैसे पहुंचे यहां तक

दमानी को दलाल स्ट्रीट में व्हाइट एंड व्हाइट के नाम से जाना जाता है। करीब 32 साल पहले वे बॉल-बेयरिंग बेचने का धंधा करते थे। उनके पिता शेयर बाजार में आम दलाल थे। पिता की अचानक मृत्यु के बाद उन्हें अपनी दुकान बंद करके उनका काम संभालना पड़ा। 1990 के दशक में जब हर्षद मेहता बाजार पर छाया हुआ था, दोनों का टकराव हुआ। हर्षद, बैंकों का पैसा लगाकर बाजार को उठा रहा था और दमानी सस्ते में खरीदे शेयर उसे बेच रहे थे। उन्होंने खरीदने की जगह बेचने पर जोर दिया। जब गड़बड़ी का खुलासा हुआ तो हर्षद ध्वस्त हो गया पर दमानी अरबपति बन चुके थे।

११८ स्टोर हैं उनकी कंपनी के
आज देश के 45 शहरों में उनके 118 स्टोर काम करते हैं। सभी अपनी खरीदी जगह पर खोले गए हैं। इसलिए उन्हें किराए की चिंता नहीं करनी पड़ती है। जहां वालमार्ट, मेट्रो एजी सरीखी कंपनियां अपने घाटे ही कम नहीं कर पा रही हैं, वहीं डी-मार्ट का लाभ तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने आज तक अपना एक भी स्टोर बंद नहीं किया। उन्होंने मुनाफे में रिलायंस रिटेल व फ्यूचर रिटेल को काफी पीछे छोड़ दिया है। वे किशोर बियानी के बाजार की तुलना में कहीं सस्ता सामान बेचकर उससे ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं।

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