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martyr families demand to take strict action against pak

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शहीद परिवारों की मांग,पाक को करारा जवाब दे सरकार

martyr families demand to take strict action against pak

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martyr families demand to take strict action against pak
8/7/2013 10:58:00 AM
martyr families demand to take strict action against pak
पटना/नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर के पुंछ सेक्टर की सरला पोस्ट पर पाकिस्तान के हमले में पांच भारतीय जवान शहीद हो गए थे। इनमें से चार 21 बिहार रेजीमेंट के और एक मराठा रेजीमेंट का जवान शामिल है। बिहार सरकार ने शहीदों के परिजनों को 10-10 लाख रूपए की आर्थिक मदद देने की घोषणा की है। शहीद जवानों के परिजनों की मांग है कि सरकार पाकिस्तान को करारा जवाब दे।

हमले में शहीद हुए जवान

1.शंभु शरण राय-नायक,21 बिहार रेजीमेंट

2.प्रेम नाथ सिंह- लांस नायक,21 बिहार रेजीमेंट

3.रघुनंदन प्रसाद,सिपाही,21 बिहार रेजीमेंट

4.विजय कुमार राय, सिपाही, 21 बिहार रेजीमेंट

5.किंदालिक माने, नायक, 14 मराठा लाइट इंफेंट्री बटालियन

सिंह के परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल

बिहार रेजीमेंट के शहीद प्रेमनाथ सिंह के परिजनों का रो रो कर बुरा हाल है। उनको एक तरफ शहादत पर गर्व है तो सरकार की चुप्पी को लेकर गुस्सा भी है। सिंह पिछले महीने ही छुट्टी पर घर आए थे। सिंह अपने पीछे पत्नी और तीन बच्चों को छोड़कर गए हैं। सिंह के पिता राज कुमार सिंह पेशे से किसान हैं।

शंभु शरण राय के घर में पसरा मातम

बिहार के आरा जिले के बिमवा हर्दियां गांव के रहने वाले शंभु शरण राय के घर में भी मातम पसरा है। पत्नी सपना और मां सदमे में हैं। शंभु शरण के चार भाई हैं। एक भाई सियाराम राय सेना में हैं। दूसरा बिहार की मिलिट्री पुलिस में और सबसे छोटा भाई हरेराम राय वायुसेना में हैं। पिता बंशीधर राय मधुबनी जेल में कांस्टेबल हैं। शंभु शरण राय अपने पीछे पत्नी और चार बच्चे छोड़ गए हैं।

बेटी को साइकिल दिलाने का वाद कर गए थे राय

बिहार रेजीमेंट के शहीद विजय कुमार का परिवार भी सदमें हैं। वे दीघा के बेकहां गांव के रहने वाले थे। कुमार अपने पीछे पत्नी और दो बच्चों को छोड़कर गए हैं। कुमार पिछले हफ्ते ही नौकरी पर लौटे थे। घर छोड़ते वक्त उन्होंने बेटी से वादा किया था कि अगली बार जब वह घर आएंगे तो साइकिल लाकर देंगे। विजय कुमार की पहली पोस्टिंग दानापुर में हुई थी,बाद में उन्हें सरहद पर भेज दिया गया।

महाराष्ट्र के किंदालीक माने के पिंपलखुर्द गांव में सन्नाटा पसरा है। गांव में जब माने के शहादत की खबर आई तो सारा गांव चौपाल पर एकत्रित हो गया। माने ने 1997 में सेना में शामिल हुए थे। वह अपने पीछे पत्नी,दो बच्चों को छोड़कर गए हैं। वे 20 दिन पहले ही छुट्टी पर घर आए थे।
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