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यहां करवा चौथ का व्रत मतलब पति की मौत

Updated: IST karva chauth vrat : 10 funny tips for husband
एक जगह ऐसी भी है कि व्रत करने पर पति की मौत ही हो जाती है। व्रत तो दूर की बात, सजना—संवरना भी पति पर भारी पड जाता है ।

मथुरा. करवा चौथ में पति की लम्बी उम्र की कामना की जाती है लेकिन एक जगह ऐसी भी है कि व्रत करने पर पति की मौत ही हो जाती है। व्रत तो दूर की बात, सजना—संवरना भी पति पर भारी पड जाता है । सुरीर कस्बे में एक हिस्सा ऐसा है, जहां एक सती का श्राप विवाहिताओं को सुहाग सलामती के व्रत की इजाजत नहीं देता है। सैकड़ों वर्ष से चली आ रही इस श्राप की परम्परा से मुक्ति का विवाहिताओं को अभी तक इंतजार है।

रहती है कसक मन में

सुरीर के मोहल्ला वघा में सैकडों विवाहिताओं को करवा चौथ का त्यौहार कोई मायने नही रखता। एक सती के श्राप का भय उन्हें अपने पति की दीर्घायु की कामना के व्रत की इजाजत नही दे रहा है। जिसकी कसक हर साल इस मोहल्ले की विवाहिताओं के मन में बनी रहती है। इसी लिए यहाँ की विवाहिताएं करवा चौथ वाले दिन अपने पति की लम्बी आयु की कामना के लिए आज के दिन उपवास नही करती है ना श्रृंगार करती है ना मेंहदी लगाती है

यह है सती की कहानी

गाँव के बुजुर्ग राम लखन ने बताया की बात सैकड़ों वर्ष पुरानी है । जब नौहझील के गांव रामनगला का एक ब्राह्मण युवक यमुना के पार स्थित ससुराल से अपनी नवविवाहिता पत्नी को विदा कराकर सुरीर के रास्ते भैंसा बुग्गी से लौट रहा था । रास्ते में सुरीर के कुछ लोगों ने बुग्गी में जुते भैंसे को अपना बता कर विवाद शुरू कर दिया । इस विवाद में सुरीर के लोगों के हाथों गांव रामनगला के इस युवक की हत्या हो गयी। अपने सामने पति की मौत से कुपित नवविवाहिता इस मुहल्ले के लोगों श्राप देते हुये पति के शव के साथ सती हो गयी।

टूट पडा कहर

इसे सती का श्राप कहें कि पति की मौत से बिलखती पत्नी के कोप का कहर। इस घटना के बाद मुहल्ले पर काल बन कर टूटे कहर ने जवान युवकों को ग्रास बनाना शुरू कर दिया। तमाम विवाहितायें विधवा हो गयीं और मुहल्ले में मानों आफत की बरसात सी होने लगी। उस समय बुजर्गों ने इसे सती के कोप का असर माना और उस सती का थान(मन्दिर) बनवाकर क्षमा याचना की ।

थम गया सिलसिला

बृद्धा सुनहरी देवी ने सती माँ की जानकारी देते हुए बताया कहा जाता है कि सती की पूजा अर्चना करने के बाद अस्वाभाविक मौतों का सिलसिला तो थम गया लेकिन सुहाग सलामती के करवा चौथ और पुत्रों की रक्षा के अहोई आठें के त्योहारों पर सती के श्राप की बंदिश लग गयी। तभी से इस मुहल्ले के सैकड़ों परिवारों में कोई विवाहिता न तो साज श्रंगार करती है और न ही पति के दीर्घायु को करवा चौथ का व्रत रखती है।

कोई नहीं तैयार

सैकड़ों वर्ष से चली आ रही इस परम्परा का पीढ़ी दर पीढ़ी निर्वहन होता चला आ रहा। इस श्राप से मुक्ति की पहल करने की कोई विवाहिता तैयार नहीं होती है। पहले से चली आ रही इस परम्परा को तोड़ने में सभी को सती के श्राप के भय से उन्हें अनिष्ट की आशंका सताती है। मन्दिर के समीप रहने बाली बिबाहिता ने सती माँ के श्राप के बारे में बताते हुए कहा कि करवा चौथ हमने भी नही मनाई और न ही व्रत रखा ।ये श्राप उनकी बेटी व ननद पर भी लागू है। जिसने भी ये व्रत किया उसका सर्व नाश हो गया ।

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