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जब एक साल थे तब पिता करगिल युद्ध में हुए थे शहीद, अब 18 साल बाद देश के लिए जवान ने भी दिया बलिदान

Updated: IST 18 years on kargil martyrs son makes supreme sacri
देश की सुरक्षा के लिए हाजिन में शहीद हुए आशुतोष के पिता हवलदार लाल साहिब ने भी देश की शरहद की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देते हुए शहीद हो गए थे. जिस वक्त आशुतोष के पिता लाल साहिब देश के लिए कुर्बान हुए, तब उनकी उम्र महज 1 साल थी...

बीते मंगलवार को कश्मीर के हाजिन में आतंकवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में राष्ट्रीय रायफल(13) के उत्तर प्रदेश के जौनपुर के रहने वाले आशुतोष कुमार वीरगति को प्राप्त हो गए थे। लेकिन अब जो खबर सामने आ रही है उसे जान कर आपको गर्व की अनुभूति होगी।

दरअसल देश की सुरक्षा के लिए हाजिन में शहीद हुए आशुतोष के पिता हवलदार लाल साहिब ने भी देश की शरहद की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देते हुए शहीद हो गए थे. जिस वक्त आशुतोष के पिता लाल साहिब देश के लिए कुर्बान हुए, तब उनकी उम्र महज 1 साल थी।

साल 1999 में हुए भारत-पाक के बीच हुए कारगिल युद्ध के दौरान आशुतोष के पिता लाल साहिब ने घुसपैठियों के भेष में पाकिस्तानी सैनिकों को शहीद होने से पहले ढेर कर दिया था।

कारगिल युद्ध के लगभग 18 साल बाद लाल साहिब और देश के सपूत आशुतोष ने भी कश्मीर के हाजिन इलाके में शहीद होने से पहले आतंकवादियों को मौत के घाट उतारा और फिर देश के लिए कुर्बान हो गए।

इस मुठभेड़ में आशुतोष बुरी तरह घायल हो गए थे जिन्हें श्रीनगर के बेस अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें बचाया न जा सका। गुन्नेर आशुतोष कुमार उन चार जवानों में से एक थे, जो मंगलवार को इस मुठभेड़ में शहीद हो गए थे। एक आतंकी भी इस अॉपरेशन में मारा गया था। इस एनकाउंटर को लीड कर रहे मेजर एस दहिया ने भी अस्पताल में दम तोड़ दिया था। वो भी आतंकियों से लड़ते हुए घायल हो गए थे।

श्रीनगर में सेना के प्रवक्ता कर्नल राजेश कालिया ने बताया कि आशुतोष कुमार के खून में ही देशभक्ति और बलिदान की भावना थी। उनके पिता हवलदार लाल साहिब भी 1999 में करगिल युद्ध के दौरान शहीद हो गए थे। उनके पिता के बलिदान के कारण ही वह सिर्फ 19 साल की उम्र में सेना में भर्ती हो गए थे।

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