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पुणे शहर में स्वाइन फ्लू का कहर, अब तक 38 लोगों की मौत

Updated: IST swine flue
वर्ष 2009 में महाराष्ट्र के पुणे शहर में कहर बरपा चुका स्वाइन फ्लू एक बार फिर लोगों की जीवन लील रहा है। यहां के अस्पतालों में बुधवार को तीन महिलाओं की स्वाइन फ्लू से मौत हो गई। पुणे नगर पालिका के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार जनवरी से अब तक यहां स्वाइन फ्लू से 38 लोगों की मृत्यु हो चुकी है।

पुणे. वर्ष 2009 में महाराष्ट्र के पुणे शहर में कहर बरपा चुका स्वाइन फ्लू एक बार फिर लोगों की जीवन लील रहा है। यहां के अस्पतालों में बुधवार को तीन महिलाओं की स्वाइन फ्लू से मौत हो गई। पुणे नगर पालिका के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार जनवरी से अब तक यहां स्वाइन फ्लू से 38 लोगों की मृत्यु हो चुकी है, जिनमें से 11 लोग पुणे के हैं और बाकी दूसरे लोग पुणे के बाहर के हैं। वहीं पूरे राज्यभर में स्वाइन फ्लू के कारण इस वर्ष अब तक 127 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 644 मामले अस्पताल में आए थे। बुखार से परेशान जुन्नर की एक 35 वर्षीय महिला की स्वाइन फ्लू के कारण बुधवार शाम को केईएम अस्पताल में मृत्यु हो गयी। महिला को 12 अप्रैल को इस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहीं, अहमदनगर की एक 47 वर्षीय महिला जो दो अप्रैल से बीमार थी, उसे 12 अप्रैल को रूबी हाल क्लीनिक में भर्ती कराया गया था, जहां उसकी भी बुधवार को स्वाइन फ्लू के कारण मृत्यु हो गई। एक अन्य मामले में बारामती की एक 32 वर्षीय महिला की 18 अप्रैल को मृत्यु हो गई थी। महिला को छह अप्रैल को रूबी हाल क्लीनिक में भर्ती कराया गया था।

2.4 लाख लोगों में से 220 लोग स्वाइन फ्लू पॉजिटिव
पुणे में 2.4 लाख लोगों की जांच की गई थी, जिनमें से 220 लोग स्वाइन फ्लू के विषाणु से ग्रसित पाए गए। इस वर्ष जनवरी से अब तक एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) के विषाणु से 38 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। राज्य सर्वेक्षण(महामारी) के अधिकारी डॉ. प्रदीप अटुटे ने के मुताबिक स्वाइन फ्लू के अधिकतर मामले महाराष्ट्र के पश्चिमोत्तर क्षेत्र के हैं।

2009 में भी स्वाइन फ्लू ने पुणे में बरपाया था कहर
इससे पहले वर्ष 2009 में स्वाइन फ्लू से यहां हजारों लोगों की मौत हुई थी। डॉ़ आवटे के मुताबिक वर्ष 2009 और 2015 में इस बीमारी की चपेट में आने से सबसे अधिक लोग मारे गए थे। स्वास्थ्य मंत्री दीपक सावंत के चिकित्सक डॉ़. बिलोलिकर ने कहा कि स्वाइन फ्लू की रोकथाम के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए एक समिति का गठन किया है, जो सभी जिला और उप-जिला अस्पतालों एवं प्राथिमक चिकित्सा केन्द्रों में कार्यशालाओं का आयोजन करेगी। उन्होंने कहा कि सुरक्षात्मक उपायों से ही इससे बचाव संभव है। उन्होंने आशंका जताई है कि तापमान में उतार-चढ़ाव इस बीमारी से मौत का एक वजह हो सकती है।

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