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नगरोटा हमले की चूक के कारण सेना पर दबाव, रक्षा मंत्री करेंगे बैठक

Updated: IST Nagrota attack
खुफिया एजेंसियों की पूर्व सूचना के बावजूद हुआ हमला,दो अफसरों सहित सात जवान हुए थे शहीद

नई दिल्ली। नगरोटा में हुए आतंकी हमले की चूक को लेकर सेना पर जिम्मेदारी तय करने का दबाव बढ़ गया है। खुफिया सूचनाओं के बावजूद आतंकियों के हमले में कामयाब होने से रक्षा मंत्रालय से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार तक सेना से खफा बताए जा रहे हैं। इस हमले में दो अफसर समेत सात जवान शहीद हुए थे।

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर बांग्लादेश से वापस लौटने के बाद आज इस मामले पर सेना के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। आतंकी हमले में चूक की नियमित विभागीय जांच के अलावा भी उत्तरी कमान के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ कुछ सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। संभावना है कि आज रक्षा मंत्री इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से भी मुलाकात करें।

सुरक्षा तंत्र की बड़ी विफलता
खुफिया एजेंसियों की तरफ से आतंकी हमले की पूर्व सूचना थी। बीएसएफ ने इस हमले को नाकाम किया। जबकि बीएसएफ के जिस शिविर पर हमला हुआ वह सांबा जिले के चमलियाल में है। जबकि सेना पर जहां हमला हुआ है वह अपेक्षाकृत सुरक्षित स्थान है वहां तक आतंकियों का पहुंचना सुरक्षा तंत्र की भारी विफलता है।

सेना के नए केंद्र निशाने पर
सूत्रों के अनुसार इसमें रणनीतिक चूक हुई है। सेना के जो ज्यादा संवेदनशील ठिकाने हैं, वहां कड़ी चौकसी बरती जा रही है। नगरोटा जैसे स्थानों पर जहां आतंकियों का पहुंचना आसान नहीं था, वहां उतनी सतर्कता नहीं बरती गई। सेना मान रही है कि आतंकियों को स्थानीय मददगारों से जानकारी मिल रही है कि सेना के किन केंद्रों में सुरक्षा चौकस नहीं है।

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