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अनुमानों से बड़ा निकला धरती के करीब से गुजरा लघुग्रह

Updated: IST Asteroid
भारतीय ताराभौतिकी संस्थान के प्रोफेसर (सेनि) रमेश कपूर ने बताया कि इस लघु ग्रह को लेकर खगोल वैज्ञानिकों का जो अनुमान था उससे कहीं अधिक बड़ा और युग्म रूप में निकला

बेंगलूरु. एक बेहद रोमांचकारी खगोलीय घटना के तहत लघु ग्रह '2014 जेओ-25' पिछले 19 अप्रेल को भारतीय समयानुसार शाम 5.30 बजे 1 लाख 17 हजार 482 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से पृथ्वी से महज 17.6 लाख किलोमीटर की दूरी से होकर निकल गया। यह दूरी पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की औसत दूरी से केवल 4.6 गुणा ही अधिक है। अंतरिक्ष में दूरियों को देखते हुए यह दूरी काफी कम कही जाएगी।

भारतीय ताराभौतिकी संस्थान के प्रोफेसर (सेनि) रमेश कपूर ने बताया कि इस लघु ग्रह को लेकर खगोल वैज्ञानिकों का जो अनुमान था उससे कहीं अधिक बड़ा और युग्म रूप में निकला। वैज्ञानिकों इस लघु ग्रह का आकार 650 मीटर माना गया था। जब लघु ग्रह धरती के निकट पहुंचा तो दूरबीनों के अलावा इसका अध्ययन कैलिफोर्निया में स्थित गोल्डस्टोन सोलर सिस्टम राडार तथा पोर्टोरिको की आरएसीबो रेडियो वेधशाला से किया गया। इस दौरान राडार की तस्वीरें 7.5 मीटर प्रति पिक्सल की प्राप्त हुईं जिसे अच्छी विभेदन क्षमता का माना जाएगा।

दरअसल, इतने पास से होकर गुजरने वाले इतने बड़े लघु ग्रह को लेकर वैज्ञानिकों में बड़ा उत्साह था। उन्होंने बताया कि मंगल व बृहस्पति की कक्षाओं के भीतर सूर्य से 2 से एयू की दूरी के अंदर लाखों की संख्या में छोटे-छोटे लघु ग्रह हैं जो एक बेल्ट के रूप में सूर्य का परिभ्रमण करते हैं। उनका सम्मिलत भार चंद्रमा से भी कम होगा। इनमें से कई हजार छोटे-छोटे पिंड मंगल व बृहस्पति के आकर्षण वश पृथ्वी निकट कक्षाओं में आ गए हैं।

खगोल में कोई भी पिंड आकार में दस मीटर से बड़ा लघु ग्रह है। इनमें वे लघु ग्रह जो 100 मीटर या इससे बड़े हैं तथा पृथ्वी से 75 लाख किलोमीटर के भीतर आ जाते हैं बेहद खतरनाक लघु ग्रह कहे जाते हैं। लघु ग्रह '2014 जेओ-25Ó बेहद खतरनाक श्रेणी का था।

ऐसा था लघु ग्रह

प्रोफेसर कपूर ने बताया कि तस्वीरों में यह लघु ग्रह दो जुड़े हुए पिंडों के रूप में नजर आया। इसके दोनों घटकों के आकार हैं 640 मीटर और 670 मीटर है। इस तरह इसका कुल आकार 1.3 किलोमीटर है। यह दोनों घटक भूतकाल में कभी अलग रहे होंगे। राडार तस्वीरों में यह लघु ग्रह अपनी अक्ष पर घूमता नजर आता है। इन तस्वीरों में उसकी सतह पर कुछ समतल तो कुछ अवतल हिस्से नजर आते हैं। लघु ग्रह के अध्ययन अभी जारी हैं। आरएसीबो के 300 मीटर रेडियो दूरदर्शी से और अधिक साफ तस्वीरों की उम्मीद है। इस लघु ग्रह को नासा ने 'द रॉक' नाम दिया है।

दस साल बाद बेहद करीब आएगा एक लघुग्रह

तेरह साल पहले 4179 टूटैसि नामक लघुग्रह सितम्बर 2004 में चंद्रमा की दूरी से महज 4 गुणा अधिक दूरी से होकर गुजरा था। एक ऐसा ही अन्य लघु ग्रह है 1999 एएन1 उसका आकार है 800 मीटर। अगस्त 2017 में यह चंद्रमा जितनी दूरी से होकर गुजरेगा। यह नजदीकी बेहद रोमांचकारी होगी। अगर ऐसा कोई लघु ग्रह यदि पृथ्वी से टकरा जाए तो उससे उत्पन्न ऊर्जा हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु से उत्पन्न हुई ऊर्जा से भी एक हजार गुणा अधिक होगी। हालांकि, ऐसी कोई घटना हजारों साल में शायद एक बार हो।

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